ट्रंप का बड़ा बयान: रूस प्रतिबंध कानून में ईरान और हिज्बुल्लाह को भी शामिल करने पर विचार
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार, 14 जुलाई को संकेत दिया कि दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा समर्थित रूस-विरोधी प्रतिबंध विधेयक का दायरा बढ़ाकर उसमें ईरान और हिज्बुल्लाह को भी शामिल किया जा सकता है। यह बयान व्हाइट हाउस में इराकी प्रधानमंत्री अली अल-जैदी के साथ बैठक के दौरान आया, जहाँ मध्य-पूर्व की भू-राजनीति पर विस्तृत चर्चा हुई।
मुख्य घटनाक्रम
ट्रंप से जब पूछा गया कि क्या वे इस कानून पर हस्ताक्षर करेंगे, तो उन्होंने कहा कि सांसद इस प्रतिबंध पैकेज का विस्तार करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे पता है कि लिंडसे इसे बहुत चाहते थे।' ट्रंप ने आगे कहा कि 'इस बात की अच्छी संभावना है कि यह हो जाएगा।'
उन्होंने स्पष्ट किया कि विधेयक में ईरान को जोड़ना 'एक बहुत बड़ा कदम' होगा और हिज्बुल्लाह को भी इसमें शामिल किए जाने की संभावना है। यह कदम दिवंगत सीनेटर ग्राहम के सम्मान में उठाया जाएगा, जो रूस के विरुद्ध कड़े प्रतिबंधों के सबसे मुखर समर्थकों में से एक थे।
भारत और चीन पर द्वितीयक प्रतिबंधों का सवाल
जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या इस विधेयक में भारत और चीन जैसे देशों पर द्वितीयक प्रतिबंध भी लगाए जाएँगे, तो उन्होंने साफ कहा कि अभी इस पर कोई चर्चा नहीं हुई है। उनके शब्दों में, 'अगर यह चीन, भारत और दूसरे देशों पर द्वितीयक प्रतिबंधों की बात है, तो हमें देखना होगा। इस पर अभी चर्चा नहीं हुई है।' यह बयान उन देशों के लिए कुछ राहत देने वाला है जो रूस के साथ व्यापारिक संबंध बनाए हुए हैं।
मध्य-पूर्व पर ट्रंप का आकलन
बैठक के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की क्षेत्रीय शक्ति काफी कमज़ोर हो चुकी है। उन्होंने कहा, 'हम मध्य-पूर्व के दबंग को हटा रहे हैं। ईरान मध्य-पूर्व का दबंग था। उसने इराक और हर दूसरे देश को डराया-धमकाया।' उन्होंने यह भी कहा कि 'अब कोई डर नहीं है, क्योंकि उनकी सैन्य ताकत को बहुत नुकसान पहुंचा है।'
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में तनाव का माहौल बना हुआ है और अमेरिका की ईरान-नीति पर वैश्विक नज़रें टिकी हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
विश्लेषकों के अनुसार, यदि ईरान और हिज्बुल्लाह को रूस-विरोधी प्रतिबंध ढाँचे में शामिल किया जाता है, तो यह अमेरिकी विदेश नीति का एक व्यापक पुनर्गठन होगा। आलोचकों का कहना है कि ऐसे किसी भी कदम से मध्य-पूर्व में कूटनीतिक जटिलताएँ और बढ़ सकती हैं, जबकि समर्थकों का तर्क है कि यह क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने वाली ताकतों पर एकीकृत दबाव बनाएगा।
आगे क्या होगा
ट्रंप के बयान के बाद अब सभी की नज़रें अमेरिकी कांग्रेस पर हैं, जहाँ इस विधेयक के विस्तार पर औपचारिक बहस होनी बाकी है। यह स्पष्ट नहीं है कि भारत और चीन से जुड़े द्वितीयक प्रतिबंधों का मसला कब और किस रूप में सामने आएगा, लेकिन ट्रंप के संकेत से वैश्विक कूटनीतिक हलचल तेज़ हो गई है।