ट्रंप-नेतन्याहू की सहमति: ईरान परमाणु खतरे का पूर्ण उन्मूलन अनिवार्य
सारांश
मुख्य बातें
इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 24 मई 2025 को फोन पर हुई बातचीत में इस बात पर एकमत होकर स्पष्ट किया कि ईरान के साथ किसी भी अंतिम परमाणु समझौते में परमाणु खतरे का पूर्ण उन्मूलन अनिवार्य शर्त होनी चाहिए। नेतन्याहू ने कहा कि इसका अर्थ है — ईरान की परमाणु संवर्धन साइट्स को नष्ट करना और संवर्धित परमाणु सामग्री को उसके भू-क्षेत्र से पूरी तरह हटाना।
बातचीत में क्या तय हुआ
नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य को पुनः खोलने के लिए प्रस्तावित समझौता-ज्ञापन (MOU) और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम समझौते की रूपरेखा पर चर्चा की। उन्होंने ट्रंप की इज़रायल की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की — विशेष रूप से ऑपरेशन रोरिंग लायन और ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान अमेरिकी और इज़रायली सेनाओं के संयुक्त अभियान का उल्लेख करते हुए।
नेतन्याहू ने कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप की तरह मेरी नीति भी स्पष्ट है — ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दोनों देशों की साझेदारी युद्ध के मैदान में सिद्ध हो चुकी है और पहले से कहीं अधिक मजबूत है।
मसौदा समझौते का विवरण
रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित मसौदा समझौते में सभी मोर्चों पर संघर्ष समाप्त करने का प्रावधान शामिल हो सकता है, जिसमें लेबनान में इज़रायल के हवाई हमले भी शामिल हैं। यह प्रावधान नेतन्याहू के लिए असहज करने वाला हो सकता है, क्योंकि वे ईरान-समर्थित सशस्त्र समूह हिज़्बुल्लाह के पूर्ण निरस्त्रीकरण की माँग पर अड़े हुए हैं।
गौरतलब है कि ट्रंप ने फोन वार्ता में लेबनान समेत हर मोर्चे पर खुद को सुरक्षित रखने के इज़रायल के अधिकार को भी दोहराया।
लेबनान में जारी संघर्ष
अमेरिकी मध्यस्थता से पिछले महीने लागू हुए संघर्ष विराम के बावजूद इज़रायल ने लेबनान में — विशेष रूप से लितानी नदी के दक्षिण और उत्तर दोनों क्षेत्रों में — नियमित हवाई हमले जारी रखे हैं। जवाब में ईरान-समर्थित हिज़्बुल्लाह ने उत्तरी इज़रायल और दक्षिणी लेबनान में इज़रायली सैनिकों पर रॉकेट और ड्रोन हमले किए हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता के कई दौर चल चुके हैं और क्षेत्रीय तनाव अपने चरम पर है।
आगे क्या होगा
होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े MOU और परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम समझौते की बातचीत अभी जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिज़्बुल्लाह निरस्त्रीकरण की शर्त और ईरान की परमाणु सामग्री को उसके क्षेत्र से हटाने की माँग — दोनों ही किसी भी व्यापक समझौते की राह में सबसे बड़ी बाधाएँ बनी रहेंगी।