ईरानी मिसाइल हमले के बाद ट्रंप ने नेतन्याहू को किया फोन, संयम बरतने की सलाह
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार, 8 जून 2026 को फोन पर बातचीत की — यह वार्ता तब हुई जब ईरान ने बेरूत में हुए इजरायली हवाई हमलों के जवाब में इजरायल पर कम से कम 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इजरायल के सरकारी टीवी चैनल कान टीवी ने इस फोन कॉल की जानकारी दी, हालांकि दोनों नेताओं के कार्यालयों की ओर से कोई आधिकारिक बयान तत्काल जारी नहीं किया गया।
ट्रंप की इजरायल को सलाह
फोन कॉल से पहले ट्रंप ने इजरायल के चैनल 12 न्यूज से कहा था कि वह नेतन्याहू को जवाबी हमला न करने की सलाह देंगे। उनका तर्क था कि वह नहीं चाहते कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही युद्धविराम वार्ताएं इस तनाव की भेंट चढ़ जाएं।
ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से कहा, 'मैं ईरान से यही कहूंगा कि आपने अपनी मिसाइलें दाग दी हैं, अब बस कीजिए। बातचीत की मेज पर वापस आइए और समझौता कीजिए।'
समझौते की संभावना पर ट्रंप का दावा
ट्रंप ने दावा किया कि मिसाइल हमले से ठीक पहले वॉशिंगटन और तेहरान किसी परमाणु समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके थे। उन्होंने कहा, 'हम बहुत करीब थे। मेरा मानना है कि आने वाले सोमवार, मंगलवार या बुधवार तक समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते थे। लेकिन अब यह घटना हो गई।'
उन्होंने यह भी स्वीकार किया, 'यह निश्चित रूप से बातचीत को आगे बढ़ाने में मदद नहीं करेगी।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय संघर्ष-विराम की उम्मीद लगाए बैठा है।
मिसाइल हमले का विवरण
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने रविवार को तीन अलग-अलग चरणों में कम से कम 10 बैलिस्टिक मिसाइलें इजरायल की ओर दागीं। इजरायली सेना ने दावा किया कि सभी मिसाइलों को रास्ते में ही रोक लिया गया। रविवार रात तक इजरायली सेना ने बताया कि ईरान की ओर से चार मिसाइल हमलों की लहरें इजरायल की तरफ भेजी जा चुकी हैं।
फिलहाल किसी के घायल होने या किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। हालांकि, इन हमलों के कारण उत्तरी इजरायल के कई इलाकों में सायरन बजाए गए, जिससे नागरिकों में दहशत का माहौल रहा।
इजरायल की प्रतिक्रिया और आगे का खतरा
दो इजरायली सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इजरायल इस हमले का 'कड़ा जवाब' देगा। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्र पहले से ही बेरूत हमलों को लेकर अस्थिर था। आलोचकों का कहना है कि यदि इजरायल जवाबी कार्रवाई करता है, तो ट्रंप की मध्यस्थता की कोशिशें गंभीर रूप से कमज़ोर पड़ सकती हैं।
आगे क्या
ट्रंप-नेतन्याहू फोन वार्ता के नतीजे और इजरायल की संभावित जवाबी कार्रवाई पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़र टिकी है। अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता का भविष्य अब इस सैन्य टकराव के रुख पर काफी हद तक निर्भर करेगा। आने वाले घंटे मध्य-पूर्व के तनाव की दिशा तय करने में निर्णायक साबित हो सकते हैं।