13 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नेतन्याहू ने ट्रंप की ईरान परमाणु कूटनीति का समर्थन किया, अमेरिकी सैन्य सहायता शून्य करने का संकेत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नेतन्याहू ने ट्रंप की ईरान परमाणु कूटनीति का समर्थन किया, अमेरिकी सैन्य सहायता शून्य करने का संकेत

सारांश

नेतन्याहू ने ट्रंप की ईरान कूटनीति को हरी झंडी दी — लेकिन साथ ही संकेत दिया कि इजरायल अब अमेरिकी सैन्य सहायता के बिना भी खड़ा हो सकता है। ट्रंप का दावा है कि ईरान समझौते के करीब था, पर ड्रोन हमले ने सब बदल दिया।

मुख्य बातें

इजरायली PM बेंजामिन नेतन्याहू ने 13 जुलाई को एनबीसी न्यूज़ के 'मीट द प्रेस' में राष्ट्रपति ट्रंप की ईरान परमाणु कूटनीति का समर्थन किया।
नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल भविष्य में अमेरिकी सैन्य सहायता पर निर्भरता शून्य तक ला सकता है।
ट्रंप का दावा — ईरान एक 'बेहतरीन समझौते' पर सहमत हो गया था, लेकिन करीब एक घंटे के भीतर जहाज पर ड्रोन हमला कर दिया।
ट्रंप ने पुष्टि की कि होर्मुज़ स्ट्रेट खुला रहा और अमेरिका ने रात भर ईरान पर नए हमले किए।
नेतन्याहू ने दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम को इजरायल का सबसे मजबूत अमेरिकी समर्थक बताते हुए श्रद्धांजलि दी।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 13 जुलाई को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान परमाणु कार्यक्रम पर कूटनीतिक पहल का खुलकर समर्थन किया और कहा कि इजरायल भविष्य में अमेरिकी सैन्य सहायता पर अपनी निर्भरता शून्य तक ला सकता है। एनबीसी न्यूज़ के कार्यक्रम 'मीट द प्रेस' में दिए साक्षात्कार में नेतन्याहू ने कहा कि संयुक्त अभियानों ने ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम से उत्पन्न तात्कालिक खतरे को काफी हद तक पीछे धकेल दिया है।

नेतन्याहू ने ट्रंप को दिया समर्थन

नेतन्याहू ने कार्यक्रम में कहा, 'मेरा मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप बातचीत के ज़रिए समझौते की हर संभावना आजमाना चाहते हैं, खासकर परमाणु मुद्दे पर। लेकिन यदि ईरान अपने वादों से पीछे हटता है तो वह ताकत का इस्तेमाल करने से भी नहीं हिचकिचाएंगे। इसलिए मेरा मानना है कि राष्ट्रपति को यह अवसर दिया जाना चाहिए।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता एक नाज़ुक मोड़ पर है।

ट्रंप का दावा — समझौते के करीब था ईरान

उसी कार्यक्रम में एक अलग साक्षात्कार में राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि ईरान एक जहाज पर ड्रोन हमला करने से ठीक पहले एक 'बेहतरीन समझौते' पर सहमत हो गया था। ट्रंप के अनुसार, 'वे (ईरान) कल एक समझौते के लिए तैयार हो गए थे। वह हमारे लिए एक बेहतरीन समझौता था। उसमें परमाणु कार्यक्रम जैसी कोई बात नहीं थी। उन्होंने सब कुछ छोड़ने पर सहमति जताई थी। लेकिन इसके बाद वे बातचीत से उठकर चले गए और करीब एक घंटे के भीतर एक जहाज पर ड्रोन लॉन्च कर दिया।' ट्रंप ने यह भी पुष्टि की कि होर्मुज़ स्ट्रेट खुला रहा और अमेरिका ने रात भर ईरान पर नए हमले किए।

इजरायल की बढ़ती आत्मनिर्भरता

नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल अब इतना सक्षम हो गया है कि वह अमेरिकी सैन्य सहायता पर अपनी निर्भरता धीरे-धीरे कम कर सकता है। उन्होंने कहा, 'अब हम इतने सक्षम हो गए हैं कि भविष्य में इस सहायता को शून्य तक ला सकते हैं।' गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल के बीच दशकों पुराने रक्षा सहायता समझौते रहे हैं, और यह बयान उस रिश्ते में एक नई आत्मविश्वास की भावना को दर्शाता है।

ईरान खतरा — इजरायल और पश्चिम दोनों के लिए

नेतन्याहू ने अमेरिका के साथ संयुक्त अभियान के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा, 'इजरायल अमेरिका का बेहद आभारी है कि उसने हमारे साथ मिलकर ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने और उन्हें पहुंचाने की क्षमता विकसित करने से रोकने के लिए कदम उठाए। यह खतरा केवल इजरायल के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे पश्चिमी देशों और स्वयं अमेरिका के लिए भी था।' आलोचकों का कहना है कि ईरान की वास्तविक परमाणु क्षमता पर अभी भी स्वतंत्र सत्यापन की ज़रूरत है।

सीनेटर लिंडसे ग्राहम को श्रद्धांजलि

नेतन्याहू ने दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम को याद करते हुए कहा कि वह हमेशा इजरायल की बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए अधिक अमेरिकी सहायता की वकालत करते थे और मानते थे कि इजरायल को सैन्य सहायता अमेरिका के सुरक्षा हितों के भी अनुरूप है। उन्होंने ग्राहम को अमेरिकी सीनेट में इजरायल के सबसे मजबूत समर्थकों में से एक बताया। आने वाले हफ्तों में अमेरिका-ईरान वार्ता की दिशा यह तय करेगी कि कूटनीति या सैन्य दबाव — कौन-सा रास्ता आगे बढ़ेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस वक्त आया है जब इजरायल हाल के संयुक्त अभियानों में अमेरिकी सैन्य ताकत का सबसे अधिक लाभ उठा चुका है — यह विरोधाभास अनदेखा नहीं किया जा सकता। ट्रंप का 'बेहतरीन समझौते' का दावा स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है, और ईरान की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है। असली सवाल यह है कि क्या यह कूटनीति टिकाऊ है या केवल सैन्य दबाव की आड़ में एक अस्थायी विराम — जो ईरान के परमाणु महत्वाकांक्षाओं को वास्तव में नहीं रोकती।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेतन्याहू ने ट्रंप की ईरान कूटनीति का समर्थन क्यों किया?
नेतन्याहू का मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप परमाणु मुद्दे पर बातचीत की हर संभावना आजमाना चाहते हैं और ज़रूरत पड़ने पर सैन्य बल के लिए भी तैयार हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप को यह अवसर दिया जाना चाहिए।
इजरायल अमेरिकी सैन्य सहायता कब शून्य कर सकता है?
नेतन्याहू ने कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी, लेकिन कहा कि इजरायल अब इतना सक्षम हो गया है कि 'भविष्य में' अमेरिकी सैन्य सहायता को शून्य तक लाया जा सकता है। यह बयान इजरायल की बढ़ती रक्षा क्षमताओं के संदर्भ में आया है।
ट्रंप ने ईरान के साथ टूटे समझौते के बारे में क्या कहा?
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान एक 'बेहतरीन समझौते' पर सहमत हो गया था जिसमें परमाणु कार्यक्रम छोड़ना शामिल था, लेकिन करीब एक घंटे के भीतर ईरान ने एक जहाज पर ड्रोन हमला कर दिया और वार्ता से बाहर चला गया। यह दावा अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है।
होर्मुज़ स्ट्रेट की स्थिति क्या है?
राष्ट्रपति ट्रंप ने पुष्टि की कि होर्मुज़ स्ट्रेट खुला रहा। साथ ही उन्होंने बताया कि अमेरिका ने रात भर ईरान पर नए हमले किए हैं।
सीनेटर लिंडसे ग्राहम का इजरायल से क्या संबंध था?
नेतन्याहू ने दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम को इजरायल के सबसे मजबूत समर्थकों में से एक बताया। ग्राहम इजरायल की बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए अधिक अमेरिकी सहायता की वकालत करते थे और मानते थे कि यह सहायता अमेरिका के सुरक्षा हितों के भी अनुरूप है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 1 साल पहले