नेतन्याहू ने ट्रंप की ईरान परमाणु कूटनीति का समर्थन किया, अमेरिकी सैन्य सहायता शून्य करने का संकेत
सारांश
मुख्य बातें
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 13 जुलाई को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान परमाणु कार्यक्रम पर कूटनीतिक पहल का खुलकर समर्थन किया और कहा कि इजरायल भविष्य में अमेरिकी सैन्य सहायता पर अपनी निर्भरता शून्य तक ला सकता है। एनबीसी न्यूज़ के कार्यक्रम 'मीट द प्रेस' में दिए साक्षात्कार में नेतन्याहू ने कहा कि संयुक्त अभियानों ने ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम से उत्पन्न तात्कालिक खतरे को काफी हद तक पीछे धकेल दिया है।
नेतन्याहू ने ट्रंप को दिया समर्थन
नेतन्याहू ने कार्यक्रम में कहा, 'मेरा मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप बातचीत के ज़रिए समझौते की हर संभावना आजमाना चाहते हैं, खासकर परमाणु मुद्दे पर। लेकिन यदि ईरान अपने वादों से पीछे हटता है तो वह ताकत का इस्तेमाल करने से भी नहीं हिचकिचाएंगे। इसलिए मेरा मानना है कि राष्ट्रपति को यह अवसर दिया जाना चाहिए।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता एक नाज़ुक मोड़ पर है।
ट्रंप का दावा — समझौते के करीब था ईरान
उसी कार्यक्रम में एक अलग साक्षात्कार में राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि ईरान एक जहाज पर ड्रोन हमला करने से ठीक पहले एक 'बेहतरीन समझौते' पर सहमत हो गया था। ट्रंप के अनुसार, 'वे (ईरान) कल एक समझौते के लिए तैयार हो गए थे। वह हमारे लिए एक बेहतरीन समझौता था। उसमें परमाणु कार्यक्रम जैसी कोई बात नहीं थी। उन्होंने सब कुछ छोड़ने पर सहमति जताई थी। लेकिन इसके बाद वे बातचीत से उठकर चले गए और करीब एक घंटे के भीतर एक जहाज पर ड्रोन लॉन्च कर दिया।' ट्रंप ने यह भी पुष्टि की कि होर्मुज़ स्ट्रेट खुला रहा और अमेरिका ने रात भर ईरान पर नए हमले किए।
इजरायल की बढ़ती आत्मनिर्भरता
नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल अब इतना सक्षम हो गया है कि वह अमेरिकी सैन्य सहायता पर अपनी निर्भरता धीरे-धीरे कम कर सकता है। उन्होंने कहा, 'अब हम इतने सक्षम हो गए हैं कि भविष्य में इस सहायता को शून्य तक ला सकते हैं।' गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल के बीच दशकों पुराने रक्षा सहायता समझौते रहे हैं, और यह बयान उस रिश्ते में एक नई आत्मविश्वास की भावना को दर्शाता है।
ईरान खतरा — इजरायल और पश्चिम दोनों के लिए
नेतन्याहू ने अमेरिका के साथ संयुक्त अभियान के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा, 'इजरायल अमेरिका का बेहद आभारी है कि उसने हमारे साथ मिलकर ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने और उन्हें पहुंचाने की क्षमता विकसित करने से रोकने के लिए कदम उठाए। यह खतरा केवल इजरायल के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे पश्चिमी देशों और स्वयं अमेरिका के लिए भी था।' आलोचकों का कहना है कि ईरान की वास्तविक परमाणु क्षमता पर अभी भी स्वतंत्र सत्यापन की ज़रूरत है।
सीनेटर लिंडसे ग्राहम को श्रद्धांजलि
नेतन्याहू ने दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम को याद करते हुए कहा कि वह हमेशा इजरायल की बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए अधिक अमेरिकी सहायता की वकालत करते थे और मानते थे कि इजरायल को सैन्य सहायता अमेरिका के सुरक्षा हितों के भी अनुरूप है। उन्होंने ग्राहम को अमेरिकी सीनेट में इजरायल के सबसे मजबूत समर्थकों में से एक बताया। आने वाले हफ्तों में अमेरिका-ईरान वार्ता की दिशा यह तय करेगी कि कूटनीति या सैन्य दबाव — कौन-सा रास्ता आगे बढ़ेगा।