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ट्रंप ने नेतन्याहू को बताया 'कठोर इंसान', कहा— 'उन्हें अमेरिका का शुक्रगुज़ार होना चाहिए'

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ट्रंप ने नेतन्याहू को बताया 'कठोर इंसान', कहा— 'उन्हें अमेरिका का शुक्रगुज़ार होना चाहिए'

सारांश

ट्रंप ने नेतन्याहू को 'कठोर इंसान' कहा और उन्हें अमेरिका का आभारी होने की नसीहत दी — यह बयान तब आया जब इजरायल को ईरान वार्ता से बाहर रखा गया। 19 जून को जेनेवा में ईरान-अमेरिका शांति समझौते पर हस्ताक्षर की तैयारी है, जिसमें पाकिस्तान मध्यस्थ है।

मुख्य बातें

डोनाल्ड ट्रंप ने 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' को दिए इंटरव्यू में बेंजामिन नेतन्याहू को 'कठोर इंसान' बताया।
ट्रंप ने कहा कि परमाणु समझौता विफल होने पर ईरान पर हमले दोबारा हो सकते हैं।
अमेरिका मध्य पूर्व का 'संरक्षक' बनने के बदले क्षेत्रीय आय का 20 प्रतिशत लेने पर विचार कर सकता है।
ईरान-अमेरिका वार्ता में इजरायल शामिल नहीं था; इजरायली अधिकारियों ने समझौते की शर्तों पर चिंता जताई।
19 जून को जेनेवा, स्विट्जरलैंड में शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने हैं; पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका में।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को 'कठोर इंसान' करार दिया है और कहा है कि नेतन्याहू को अमेरिका के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए। 15 जून को प्रकाशित 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने यह भी दावा किया कि यदि ईरान के साथ परमाणु समझौता विफल हुआ, तो ईरान पर हमले दोबारा शुरू हो सकते हैं।

ट्रंप का नेतन्याहू पर बयान

ट्रंप ने इंटरव्यू में कहा, 'वह बहुत मुश्किल आदमी हैं। और सच कहूं तो उन्हें हमारे प्रति बहुत आभारी होना चाहिए। क्योंकि यदि ईरान के पास परमाणु हथियार होता, तो इजरायल दो घंटे भी नहीं टिक पाता।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-इजरायल संबंधों में रणनीतिक सहयोग बरकरार रहने के बावजूद दोनों नेताओं के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद उभरते दिख रहे हैं।

ईरान परमाणु समझौता और होर्मुज़ जलडमरूमध्य

ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ हुआ नया समझौता यह सुनिश्चित करेगा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ 'स्थायी रूप से टोल-फ्री' रहे। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भी तारीफ करते हुए उन्हें 'जेंटलमेन' कहा, जिन्होंने होर्मुज़ में दखलअंदाजी नहीं की। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भी ट्रंप ने सराहा।

इजरायल की चिंताएँ और वार्ता से बाहर होना

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ताओं में इजरायल सीधे तौर पर शामिल नहीं था। इजरायली अधिकारियों के बीच समझौते की शर्तों को लेकर गहरी चिंता बताई जा रही है। उनका कथित तौर पर मानना है कि यह समझौता ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पर्याप्त सुरक्षा गारंटी नहीं देता।

मध्य पूर्व का 'संरक्षक' बनने का प्रस्ताव

ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका मध्य पूर्व का 'संरक्षक' बनने पर विचार कर सकता है और बदले में क्षेत्र की आय का 20 प्रतिशत हिस्सा ले सकता है। यह प्रस्ताव क्षेत्रीय कूटनीति में एक नई और विवादास्पद दिशा की ओर संकेत करता है।

जेनेवा में शांति समझौते की तैयारी

गौरतलब है कि अपने 80वें जन्मदिन पर ट्रंप ने ट्रुथ सोशल के माध्यम से शांति समझौते पर पहुँचने की जानकारी साझा की थी। ईरान ने भी इस पर सकारात्मक बयान जारी किया। पाकिस्तान इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया कि दोनों देश 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में शांति समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। यह समझौता मध्य पूर्व की भू-राजनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अमेरिका-इजरायल संबंधों में एक असामान्य तनाव का संकेत है। मध्य पूर्व की आय का 20% लेने का प्रस्ताव — यदि गंभीरता से लिया जाए — क्षेत्रीय संप्रभुता पर बड़े सवाल खड़े करता है। जेनेवा समझौते की टिकाऊ सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को किस हद तक संबोधित किया जाता है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने नेतन्याहू के बारे में क्या कहा?
ट्रंप ने 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू को 'बहुत मुश्किल आदमी' बताया और कहा कि उन्हें अमेरिका का आभारी होना चाहिए। उनका तर्क था कि अमेरिकी पहल के बिना ईरान के परमाणु खतरे से इजरायल को गंभीर नुकसान हो सकता था।
ईरान-अमेरिका परमाणु समझौते में इजरायल क्यों शामिल नहीं था?
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ताओं में इजरायल को सीधे तौर पर शामिल नहीं किया गया। इजरायली अधिकारियों ने कथित तौर पर समझौते की शर्तों पर चिंता जताई है, यह मानते हुए कि यह ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पर्याप्त सुरक्षा गारंटी नहीं देता।
जेनेवा में 19 जून को क्या होने वाला है?
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अनुसार, अमेरिका और ईरान 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में शांति समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। पाकिस्तान इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ इस समझौते में क्यों महत्वपूर्ण है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख जलमार्ग है। ट्रंप ने दावा किया कि नया समझौता इस जलडमरूमध्य को 'स्थायी रूप से टोल-फ्री' रखेगा, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर ईरान का दबाव समाप्त होगा।
ट्रंप के मध्य पूर्व 'संरक्षक' प्रस्ताव का क्या मतलब है?
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका मध्य पूर्व का 'संरक्षक' बन सकता है और बदले में क्षेत्र की आय का 20 प्रतिशत हिस्सा ले सकता है। यह एक अभूतपूर्व प्रस्ताव है जिसकी व्यावहारिकता और क्षेत्रीय स्वीकार्यता पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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