ईरान परमाणु समझौते पर ट्रंप का दावा: 'मुझसे ज़्यादा ताकतवर कोई नहीं', मध्य पूर्व युद्ध टला
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार, 18 जून को फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन के बाद एक विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरान के साथ हुए समझौते को अपने कार्यकाल की सबसे बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि करार दिया। उन्होंने दावा किया कि इस समझौते ने मध्य पूर्व में एक बड़े युद्ध को टाल दिया, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का मार्ग प्रशस्त किया और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से स्थायी रूप से रोका। ट्रंप ने आक्रामक लहजे में कहा कि 'मुझसे ज़्यादा ताकतवर कोई नहीं था।'
समझौते का स्वरूप और मुख्य शर्तें
ट्रंप के अनुसार यह समझौता रविवार को संपन्न हुआ और इसे उन्होंने एक एमओयू (समझौता ज्ञापन) बताया। उन्होंने कहा कि ईरान इस बात पर सहमत हो गया है कि वह न तो परमाणु हथियार बनाएगा और न ही खरीदेगा। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में जोड़ा, 'अगर वे समझौते का सम्मान नहीं करते, तो हम शायद तब तक उन पर बमबारी करते रहेंगे जब तक वे इसका सम्मान नहीं करते।' ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान को दी जाने वाली आर्थिक राहत उसके व्यवहार पर निर्भर करेगी और अमेरिका सीधे निवेश नहीं करेगा।
सैन्य ताकत का हवाला
ट्रंप ने 2020 में ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या के अपने आदेश और ईरानी सेना तथा परमाणु सुविधाओं पर हाल के हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी सैन्य दबाव ने समझौते को संभव बनाया। उनके अनुसार, 'अगर यह डील नहीं होती, तो हम अगले तीन-चार हफ्ते या दो साल तक बम गिराते रहते, होर्मुज स्ट्रेट कभी नहीं खुलता और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में रुकावट बनी रहती।' यह ऐसे समय में आया है जब रूढ़िवादी आलोचक ईरान पर सैन्य दबाव बनाए रखने की वकालत कर रहे थे, जिसे ट्रंप ने सिरे से खारिज कर दिया।
बाज़ार और आर्थिक प्रभाव
ट्रंप ने इस समझौते को तेल की कीमतों में गिरावट और शेयर बाज़ार में तेजी से सीधे जोड़ा। उन्होंने कहा, 'हर बार जब हमने शांति की संभावना पर बात की, शेयर बाज़ार रॉकेट की तरह ऊपर चला गया।' वॉल स्ट्रीट जर्नल के विश्लेषण के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने और वैश्विक तेल आपूर्ति में रुकावट के खतरे के कम होने से मध्य पूर्व के बाहर भी बड़े आर्थिक लाभ हो सकते हैं।
अमेरिकी मीडिया का विश्लेषण
द न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक विश्लेषण के अनुसार, यह समझौता कई हफ्तों के सैन्य टकराव से हटकर प्रतिरोधक क्षमता और बातचीत के ज़रिए अनुपालन सुनिश्चित करने वाले ढाँचे की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन इस आकलन पर दाँव लगा रहा है कि भविष्य में दोबारा सैन्य कार्रवाई की आशंका ही समझौते को लागू कराने के लिए पर्याप्त होगी और किसी औपचारिक संधि ढाँचे की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। वाशिंगटन पोस्ट ने इसे ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की सबसे अहम विदेश नीति पहलों में से एक बताया है।
व्यापक क्षेत्रीय शांति की उम्मीद
ट्रंप ने संकेत दिया कि यह समझौता एक बड़े क्षेत्रीय समझौते की नींव बन सकता है। उन्होंने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि यह शांति समझौता पूरे मिडिल ईस्ट में एक बहुत बड़ी डील की शुरुआत होगी।' जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान उन्होंने विश्व नेताओं से भी इसी उम्मीद को साझा किया। आने वाले हफ्तों में इस एमओयू के क्रियान्वयन की दिशा और ईरान की व्यावहारिक प्रतिक्रिया ही इस दावे की असली परीक्षा होगी।