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ट्रंप ने ईरान परमाणु समझौते को बताया ऐतिहासिक, G7 में मोदी सहित विश्व नेताओं ने किया स्वागत

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ट्रंप ने ईरान परमाणु समझौते को बताया ऐतिहासिक, G7 में मोदी सहित विश्व नेताओं ने किया स्वागत

सारांश

ट्रंप ने एवियन G7 के बाद ईरान समझौते को 'ऐतिहासिक' बताया — संघर्ष विराम, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का पुनः संचालन और ईरान की परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता। PM मोदी सहित सभी G7 नेताओं ने स्वागत किया। समझौते पर शीघ्र हस्ताक्षर की उम्मीद।

मुख्य बातें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 17 जून 2026 को फ्रांस के एवियन में G7 के बाद ईरान समझौते को 'ऐतिहासिक सफलता' बताया।
समझौते में ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने और न खरीदने का वादा किया।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पुनः खुला; व्यापारिक जहाजों की आवाजाही और ऊर्जा आपूर्ति बहाल होने की उम्मीद।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सभी G7 नेताओं ने समझौते का स्वागत किया।
समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर अगले एक-दो दिनों में अपेक्षित।
ट्रंप ने चेतावनी दी — समझौता न माने तो ईरान पर फिर सैन्य कार्रवाई संभव।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार, 17 जून 2026 को फ्रांस के एवियन में संपन्न जी7 शिखर सम्मेलन के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरान के साथ हुए समझौते को 'ऐतिहासिक सफलता' करार दिया। उन्होंने कहा कि इस समझौते ने तीन प्रमुख लक्ष्य एक साथ हासिल किए — मौजूदा सशस्त्र संघर्ष की समाप्ति, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का पुनः संचालन, और ईरान द्वारा परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता। ट्रंप ने बताया कि रविवार को हुए इस समझौते पर शीघ्र ही औपचारिक हस्ताक्षर होने की संभावना है।

समझौते की मुख्य शर्तें

ट्रंप के अनुसार, ईरान ने सहमति जताई है कि वह न तो परमाणु हथियार बनाएगा और न ही उन्हें किसी अन्य माध्यम से हासिल करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबद्धता परमाणु हथियारों के निर्माण और अधिग्रहण — दोनों पर लागू होती है। ट्रंप ने इसे एक 'समझौता ज्ञापन' (MoU) की संज्ञा दी और कहा कि इस पर 'शायद कल या उसके अगले दिन' हस्ताक्षर होंगे।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धि

ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पुनः खुलने को समझौते की सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस जलमार्ग से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पहले ही उल्लेखनीय रूप से बढ़ गई है और आने वाले दिनों में ऊर्जा की सामान्य आपूर्ति भी बहाल हो जाएगी। गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% गुज़रता है, जिसके बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों पर गहरा असर पड़ा था।

मोदी सहित G7 नेताओं की प्रतिक्रिया

ट्रंप ने बताया कि जी7 शिखर सम्मेलन में उपस्थित सभी नेताओं ने इस समझौते का स्वागत किया। उन्होंने विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री मोदी यहां थे, हमारी लंबी बातचीत हुई। वह एक शानदार व्यक्ति हैं। वे सभी इस बात से खुश हैं कि हमने यह समझौता किया है।" ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी देश के नेता ने उनसे ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखने का आग्रह नहीं किया।

कूटनीति बनाम सैन्य कार्रवाई

ट्रंप ने कूटनीतिक मार्ग को श्रेष्ठ बताते हुए कहा कि बातचीत ने वह हासिल किया जो लंबे समय तक सैन्य अभियान से संभव नहीं था। उनके शब्दों में, "अगर हम यह समझौता नहीं करते तो हम दो हफ्ते, तीन हफ्ते, चार हफ्ते या दो साल तक और बम गिरा सकते थे, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कभी नहीं खुलता।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी कांग्रेस के कुछ सदस्य सैन्य दबाव जारी रखने की वकालत कर रहे थे।

चेतावनी: समझौता न माना तो फिर बमबारी

हालांकि, ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि ईरान समझौते की शर्तों का उल्लंघन करता है तो सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू हो सकती है। उन्होंने कहा, "अगर वे इसे नहीं मानते तो शायद हमें फिर से उन पर बमबारी करनी पड़ेगी, जब तक वे इसे नहीं मानते।" यह कथित तौर पर समझौते में एक निगरानी तंत्र की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है, जिसका विवरण अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे 'समझौता ज्ञापन' कहना ही इसकी सीमाएं उजागर करता है — MoU कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होता। 2015 के JCPOA से तुलना करें तो वह भी एक बहुपक्षीय ढाँचा था, जिसे ट्रंप ने खुद 2018 में तोड़ा था; अब वही ट्रंप एकपक्षीय समझौते को 'ऐतिहासिक' बता रहे हैं। सबसे बड़ा अनुत्तरित प्रश्न यह है कि इस समझौते की निगरानी कौन करेगा और उल्लंघन की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय सहमति कैसे बनेगी — जिसका जवाब अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप-ईरान समझौता क्या है और इसमें क्या तय हुआ?
यह रविवार को हुआ एक समझौता ज्ञापन (MoU) है जिसमें ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने और न खरीदने का वादा किया है। इसके साथ ही संघर्ष विराम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को व्यापारिक जहाजों के लिए पुनः खोलना भी इसका हिस्सा है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खुलने से क्या फर्क पड़ेगा?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुज़रता है। इसके पुनः संचालन से ऊर्जा की सामान्य आपूर्ति बहाल होगी और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही, जो पहले ही बढ़ने लगी है, और सुगम होगी।
PM मोदी ने इस समझौते पर क्या कहा?
ट्रंप के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवियन G7 शिखर सम्मेलन में उपस्थित थे और उन्होंने इस समझौते का स्वागत किया। ट्रंप ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच इस विषय पर विस्तृत बातचीत हुई।
अगर ईरान समझौता नहीं माना तो क्या होगा?
ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ईरान समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में बमबारी दोबारा शुरू हो सकती है।
इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर कब होंगे?
ट्रंप ने 17 जून को कहा कि समझौते पर 'शायद कल या उसके अगले दिन' हस्ताक्षर होंगे। हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक तिथि घोषित नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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