ट्रंप का दावा: ईरान परमाणु हथियार न बनाने पर राज़ी, होर्मुज स्ट्रेट में ऐतिहासिक शांति समझौता
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 24 जून 2026 को दावा किया कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने पर सहमत हो गया है और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव समाप्त करने के लिए एक ऐतिहासिक शांति समझौता संपन्न हुआ है। ट्रंप के अनुसार, तेहरान की सैन्य क्षमताओं को इस प्रक्रिया में गंभीर रूप से कमज़ोर किया जा चुका है।
समझौते की मुख्य बातें
एक कार्यक्रम में कर्मचारियों और समर्थकों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, 'जैसा कि आप जानते हैं, हमने होर्मुज स्ट्रेट में संघर्ष को खत्म करने के लिए ईरान के साथ एक ऐतिहासिक शांति समझौता किया है।' उन्होंने यह भी दावा किया कि इस समझौते से दुनिया के सबसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक के ज़रिये ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर करने में मदद मिली है।
ट्रंप ने कहा, 'बीते दिन, होर्मुज स्ट्रेट से 1 करोड़ 90 लाख बैरल तेल निकला — यह इस स्ट्रेट के इतिहास में सबसे अधिक तेल प्रवाह था।' उनके अनुसार, यह आँकड़ा समझौते की व्यावहारिक सफलता का प्रमाण है।
ईरान की सैन्य स्थिति पर ट्रंप के दावे
राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि ईरान को व्यावहारिक रूप से निःशस्त्र कर दिया गया है। उन्होंने कहा, 'हम ईरान को बिना नौसेना, बिना वायुसेना, बिना एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम, बिना मिसाइल क्षमता और बिना परमाणु कार्यक्रम के छोड़ रहे हैं — और वे इस पर सहमत हो गए हैं।'
ट्रंप ने अमेरिकी बी-2 बॉम्बर्स द्वारा ईरान की परमाणु सुविधाओं पर की गई कार्रवाई का भी उल्लेख किया और इसे 'हथौड़े जैसी कार्रवाई' बताया। उनके अनुसार ईरान की अर्थव्यवस्था और रक्षा औद्योगिक आधार को इतना नुकसान पहुँचा है कि 'उन्हें इसे फिर से बनाने में कई साल लगेंगे।'
पिछली सरकारों पर निशाना
ट्रंप ने तर्क दिया कि पिछली अमेरिकी सरकारें 47 वर्षों तक इस मुद्दे को सुलझाने में विफल रहीं। उन्होंने कहा, 'याद रखें, यह आसान नहीं था। 47 सालों तक राष्ट्रपति और अन्य लोग रहे, और अन्य देश भी थे।' यह टिप्पणी स्पष्ट रूप से पूर्व प्रशासनों की कूटनीतिक कोशिशों को नाकाफी ठहराने की कोशिश थी।
आगे की राह
ट्रंप ने संकेत दिया कि वाशिंगटन तेहरान के साथ आगे बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि वे ठीक हो जाएंगे। वे वही करेंगे जो उन्हें करना है।' गौरतलब है कि ये टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में व्यापक चिंता बनी हुई है। विशेषज्ञ इस बात पर नज़र रखे हुए हैं कि ईरान इन दावों की आधिकारिक पुष्टि करता है या नहीं।