ट्रंप का दावा: रविवार को होगा ईरान-अमेरिका परमाणु समझौता, होर्मुज स्ट्रेट तुरंत खुलेगा
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 14 जून 2025 को दावा किया कि ईरान के साथ एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर होने वाले हैं और इसके तुरंत बाद होर्मुज स्ट्रेट को सभी देशों के लिए खोल दिया जाएगा। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस दावे से तत्काल असहमति जताई है, जिससे समझौते की वास्तविक स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।
ट्रंप का ऐलान और 'ट्रुथ सोशल' पोस्ट
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, 'समझौते पर कल हस्ताक्षर होने वाले हैं और जैसे ही यह समझौता साइन होगा, होर्मुज स्ट्रेट सभी के लिए खुल जाएगा।' उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान अब परमाणु हथियार नहीं चाहता और अमेरिका उचित समय पर ईरान के संवर्धित यूरेनियम को हटाने में सहायता करेगा।
ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रस्तावित समझौता ओबामा प्रशासन के परमाणु समझौते से मौलिक रूप से अलग होगा। उन्होंने कहा, 'ओबामा प्रशासन की तरह उन्हें सैकड़ों अरब डॉलर का भुगतान नहीं किया जाएगा, जिसमें 1.7 अरब डॉलर नगद भी शामिल थे। इस बार कोई पैसा हाथ नहीं बदलेगा।'
चेतावनी और 'अंतिम विकल्प'
ट्रंप ने एक साथ कूटनीति और दबाव दोनों का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि इस समझौते के बाद अमेरिका और ईरान के संबंध 'अलग और बेहतर' होंगे, लेकिन यह भी चेताया कि यदि प्रक्रिया 'तेजी से, आसानी से और बिना किसी परेशानी के' आगे नहीं बढ़ी, तो अमेरिका के पास 'अंतिम विकल्प' मौजूद है। राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि ईरान में बची हुई परमाणु सामग्री को बाद में हटाकर नष्ट कर दिया जाएगा।
ईरान की असहमति और वास्तविक स्थिति
ट्रंप के दावों के विपरीत, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकेई ने कथित तौर पर इस बात से इनकार किया कि रविवार को किसी समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने वाले हैं। उन्होंने इसके लिए 'दूसरे पक्ष की हिचकिचाहट' को जिम्मेदार बताया।
बाकेई ने जोर देकर कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई भी संभावित एमओयू केवल आगे की बातचीत जारी रखने की रूपरेखा होगा — इसे अंतिम समझौता नहीं माना जाना चाहिए। ईरानी सरकारी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, परमाणु मुद्दे पर बातचीत अगले 60 दिनों तक जारी रहने की उम्मीद है।
होर्मुज स्ट्रेट और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर असर
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक है, जहाँ से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार होने वाले कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस संकरे समुद्री मार्ग की स्थिति वैश्विक ऊर्जा कीमतों को सीधे प्रभावित करती है।
भारत, जो दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में से एक है, खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े घटनाक्रमों पर लगातार नज़र रखता है। इस जलडमरूमध्य में किसी भी बदलाव का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और शिपिंग लागत पर पड़ता है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर वर्षों से तनाव चला आ रहा है। गौरतलब है कि 2015 के JCPOA (ईरान परमाणु समझौते) से ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में खुद अमेरिका को बाहर निकाला था। दोनों पक्षों के परस्पर विरोधाभासी बयानों को देखते हुए, समझौते की अंतिम रूपरेखा और समयसीमा अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।