उमर खालिद डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग पर ABVP की रोक 'दादागिरी': AIMPLB प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के पूर्व छात्र उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) द्वारा रोका जाना न केवल अनुचित है, बल्कि यह 'दादागिरी' है। इलियास — जो उमर खालिद के पिता भी हैं — ने कानूनी सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि जब तक कोई न्यायालय किसी को दोषी न ठहराए, तब तक उसे निर्दोष माना जाना चाहिए।
डॉक्यूमेंट्री विवाद और कानूनी दलील
इलियास ने कहा कि उमर खालिद के विरुद्ध दायर आरोप-पत्र और चार्जशीट पर करीब छह वर्षों से सवाल उठते रहे हैं, फिर भी अब तक मुकदमे की सुनवाई शुरू नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी देरी के कारण जमानत मिलने में भी रुकावट आ रही है। उनके अनुसार, ऐसे में किसी दस्तावेज़ी फिल्म की स्क्रीनिंग पर रोक लगाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ है।
मदरसों पर कार्रवाई को लेकर BJP पर निशाना
इलियास ने पश्चिम बंगाल में मदरसों को जारी किए गए नोटिस का उल्लेख करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर आरोप लगाया कि भाजपा-शासित राज्यों में मदरसों के खिलाफ अलग-अलग तरीकों से कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने असम और उत्तराखंड के बाद पश्चिम बंगाल में भी ऐसी कार्रवाई का उल्लेख किया। उनका कहना था कि किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाना संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है और मदरसों में धार्मिक शिक्षा का अधिकार संवैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत संरक्षित है।
सहारनपुर मस्जिद विध्वंस पर आपत्ति
सहारनपुर में एक मस्जिद को गिराए जाने के प्रकरण पर इलियास ने दावा किया कि संबंधित मस्जिद करीब 100 वर्ष पुरानी थी और उसके स्वामित्व व वक्फ से जुड़े दस्तावेज़ उपलब्ध थे। उनके अनुसार अदालत ने मस्जिद को सील करने का आदेश दिया था, न कि ध्वस्त करने का, लेकिन प्रशासन ने उसे गिरा दिया। उन्होंने इस कदम को गलत और असंवैधानिक बताया।
AIMPLB का 'संविधान बचाओ, भारत बचाओ' अभियान
इलियास ने घोषणा की कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड 17 सितंबर से नवंबर के अंत तक 'संविधान बचाओ, भारत बचाओ' थीम के तहत पूरे देश में जागरूकता अभियान चलाएगा। इस अभियान के केंद्र में संविधान, धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों से जुड़े मुद्दे होंगे। गौरतलब है कि यह अभियान ऐसे समय में आया है जब मदरसा नीति, वक्फ संशोधन और अल्पसंख्यक संस्थाओं पर बहस राष्ट्रीय स्तर पर तेज़ हो रही है।
व्यापक संदर्भ
उमर खालिद 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े UAPA मामले में वर्षों से न्यायिक हिरासत में हैं। उनका मामला न्यायिक विलंब और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बहस के केंद्र में बना हुआ है। आलोचकों का कहना है कि बिना ट्रायल के लंबी हिरासत कानून के शासन पर गंभीर सवाल उठाती है, जबकि अभियोजन पक्ष का तर्क है कि मामले की जटिलता के कारण सुनवाई में समय लग रहा है।