उमर खालिद पर किताब विमोचन का विरोध: बेंगलुरु में BJYM कार्यकर्ता हिरासत में, BJP ने कांग्रेस सरकार पर साधा निशाना

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उमर खालिद पर किताब विमोचन का विरोध: बेंगलुरु में BJYM कार्यकर्ता हिरासत में, BJP ने कांग्रेस सरकार पर साधा निशाना

सारांश

बेंगलुरु में उमर खालिद पर आधारित पुस्तक के विमोचन ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया — BJYM कार्यकर्ता सड़क पर उतरे, पुलिस ने हिरासत में लिया। BJP ने कांग्रेस सरकार पर 'राष्ट्र-विरोधी तत्वों' को संरक्षण देने का आरोप लगाया। UAPA में बंद आरोपी पर किताब और उसका सार्वजनिक विमोचन — यह विवाद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा की बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आया है।

Key Takeaways

  • BJYM कार्यकर्ताओं ने 28 अप्रैल 2026 को बेंगलुरु इंटरनेशनल सेंटर, डोमलूर के पास उमर खालिद पर आधारित पुस्तक विमोचन के विरोध में प्रदर्शन किया।
  • पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बसों में बैठाकर अज्ञात स्थान पर ले जाया।
  • उमर खालिद फिलहाल UAPA के तहत तिहाड़ जेल में बंद हैं; सर्वोच्च न्यायालय उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुका है।
  • BJP सांसद पीसी मोहन और विधान परिषद सचेतक एन. रवि कुमार ने कार्यक्रम का कड़ा विरोध किया।
  • 2020 दिल्ली दंगों में कथित तौर पर 53 लोगों की मौत और लगभग 700 घायल; इस मामले में 18 गिरफ्तार, जिनमें 7 अभी भी हिरासत में।
  • सोमवार, 27 अप्रैल को बेंगलुरु पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह को ज्ञापन सौंपा गया था।

बेंगलुरु में 28 अप्रैल 2026 को भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के कार्यकर्ताओं ने डोमलूर स्थित बेंगलुरु इंटरनेशनल सेंटर के पास उस पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के विरोध में प्रदर्शन किया, जो जेएनयू कार्यकर्ता उमर खालिद पर आधारित है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बसों में बैठाकर अज्ञात स्थान पर ले जाया। उल्लेखनीय है कि उमर खालिद फिलहाल 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत तिहाड़ जेल में बंद हैं।

प्रदर्शन का घटनाक्रम

जैसे ही BJYM कार्यकर्ताओं ने बेंगलुरु इंटरनेशनल सेंटर के बाहर प्रदर्शन शुरू किया, पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें घेर लिया। प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बसों में बैठाया गया और एक अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस शासित राज्य सरकार के खिलाफ नारे लगाए और आरोप लगाया कि सरकार कथित तौर पर आतंकवादी तत्वों का समर्थन कर रही है।

BJP नेताओं की प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद पीसी मोहन ने मंगलवार को इस कार्यक्रम पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा, ''2020 दिल्ली दंगों में कई लोगों की जान गई और संपत्ति को नुकसान हुआ। जो व्यक्ति अभी जेल में है, उसे लेकर किताब का विमोचन करने की क्या जरूरत है?'' मोहन ने आरोप लगाया कि ऐसे आयोजन 'राष्ट्र-विरोधी तत्वों' का महिमामंडन करते हैं और कहा कि अन्य राज्यों में ऐसे कार्यक्रमों की अनुमति नहीं दी जाती।

विधान परिषद में विपक्ष के मुख्य सचेतक एन. रवि कुमार ने भी इस कार्यक्रम का विरोध किया। उन्होंने कहा कि BJP उमर खालिद और शरजील इमाम — दोनों पर आधारित पुस्तकों के विमोचन का कड़ा विरोध करती है, क्योंकि दोनों UAPA के तहत आरोपी हैं। रवि कुमार ने कहा, ''राज्य सरकार को किसी भी परिस्थिति में इसकी अनुमति नहीं देनी चाहिए।''

पुलिस आयुक्त को ज्ञापन

इस कार्यक्रम को रोकने की माँग को लेकर सोमवार, 27 अप्रैल को बेंगलुरु पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह को एक ज्ञापन सौंपा गया था। BJP नेताओं ने अनुरोध किया था कि इस कार्यक्रम को आयोजित होने से रोका जाए। पुलिस आयुक्त की ओर से इस ज्ञापन पर तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई।

उमर खालिद और 2020 दिल्ली दंगे: पृष्ठभूमि

रवि कुमार ने बताया कि फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों में कथित तौर पर 53 लोगों की मौत हुई और लगभग 700 लोग घायल हुए। इस मामले में कुल 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से 11 को जमानत मिल चुकी है, जबकि 7 अभी भी हिरासत में हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएँ खारिज कर दी थीं। शरजील इमाम को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान दिए गए भाषणों के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

आगे क्या

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कर्नाटक में कांग्रेस और BJP के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही चरम पर है। कार्यक्रम के आयोजकों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राज्य सरकार का रुख और पुलिस की अंतिम कार्रवाई आने वाले दिनों में इस विवाद की दिशा तय करेगी।

Point of View

लेकिन गहराई में यह उस बड़े प्रश्न को छूता है — क्या UAPA के तहत विचाराधीन कैदियों पर सार्वजनिक चर्चा की अनुमति होनी चाहिए? BJP का तर्क राजनीतिक रूप से सुविधाजनक है, लेकिन यह नज़रअंदाज़ करता है कि भारतीय न्यायशास्त्र में आरोपी को दोषी नहीं माना जाता। दूसरी ओर, कांग्रेस सरकार की चुप्पी यह सवाल उठाती है कि क्या वह इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख लेने से बच रही है। UAPA की व्यापक आलोचना — जिसमें जमानत मिलना लगभग असंभव है — इस पूरे प्रसंग को और जटिल बनाती है।
NationPress
29/04/2026

Frequently Asked Questions

उमर खालिद पर आधारित किताब का विमोचन कहाँ और कब हुआ?
यह कार्यक्रम बेंगलुरु के डोमलूर स्थित बेंगलुरु इंटरनेशनल सेंटर में 28 अप्रैल 2026 को आयोजित किया गया था। BJYM कार्यकर्ताओं ने इस कार्यक्रम के विरोध में बाहर प्रदर्शन किया।
उमर खालिद को क्यों गिरफ्तार किया गया था?
उमर खालिद को 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया था। वे फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं और सर्वोच्च न्यायालय उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुका है।
BJYM ने इस कार्यक्रम का विरोध क्यों किया?
BJYM और BJP नेताओं का कहना है कि UAPA के तहत आरोपी व्यक्ति पर आधारित पुस्तक का सार्वजनिक विमोचन 'राष्ट्र-विरोधी तत्वों' का महिमामंडन है। BJP सांसद पीसी मोहन ने कहा कि अन्य राज्यों में ऐसे कार्यक्रमों की अनुमति नहीं दी जाती।
2020 दिल्ली दंगों में कितने लोग प्रभावित हुए थे?
BJP नेता एन. रवि कुमार के अनुसार, फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों में कथित तौर पर 53 लोगों की मौत हुई और लगभग 700 लोग घायल हुए। इस मामले में 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से 11 को जमानत मिल चुकी है और 7 अभी भी हिरासत में हैं।
शरजील इमाम कौन हैं और उनका इस विवाद से क्या संबंध है?
शरजील इमाम को CAA और NRC के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान दिए गए भाषणों के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। BJP नेताओं ने उमर खालिद के साथ-साथ शरजील इमाम पर आधारित पुस्तकों के विमोचन का भी विरोध किया है; दोनों UAPA के तहत आरोपी हैं।
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