13 सितंबर 2026
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पंजाब बिजली संकट: कोयला मंत्रालय ने कोयला आपूर्ति की कमी को नकारा, PSPCL के भंडार मानक का 114% उपलब्ध

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पंजाब बिजली संकट: कोयला मंत्रालय ने कोयला आपूर्ति की कमी को नकारा, PSPCL के भंडार मानक का 114% उपलब्ध

सारांश

कोयला मंत्रालय ने पंजाब के बिजली संकट की जिम्मेदारी कोयला आपूर्ति पर डालने से साफ इनकार किया। PSPCL के भंडार मानक से 114% ऊपर हैं, और नाभा व तलवंडी साबो को खपत से अधिक आपूर्ति हो रही है। मंत्रालय का इशारा है — संकट आपूर्ति में नहीं, प्रबंधन में है।

मुख्य बातें

कोयला मंत्रालय ने 13 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि पंजाब के बिजली संकट का कारण कोयला आपूर्ति की कमी नहीं है।
PSPCL के बिजलीघरों में 11 सितंबर 2026 तक कोयला भंडार मानक आवश्यकता का 114 प्रतिशत था।
नाभा पावर को औसतन 5 रेक/दिन आपूर्ति, जबकि खपत 4.3 रेक/दिन ; तलवंडी साबो को 5 रेक/दिन , खपत 3.8 रेक/दिन ।
पचवारा खदान का उत्पादन अप्रैल-सितंबर 2026 में वार्षिक लक्ष्य का 83.67% , जबकि डिस्पैच केवल 68.44% रहा।
मंत्रालय ने PSPCL को बिजलीघरों का अधिकतम उपयोग, तकनीकी निगरानी सुधारने और कोयले का समय पर उठान सुनिश्चित करने की सलाह दी।

कोयला मंत्रालय ने 13 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि पंजाब में चल रहे बिजली संकट के लिए कोयले की अपर्याप्त आपूर्ति जिम्मेदार नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के बिजलीघरों में उपलब्ध कोयला भंडार 11 सितंबर 2026 तक निर्धारित मानक आवश्यकता के 114 प्रतिशत तक पहुँच चुका था। मंत्रालय के अनुसार, संकट की असली वजह बिजलीघरों का कम उपयोग, स्वतंत्र बिजली उत्पादक कंपनियों (IPP) में तकनीकी खराबियाँ और उपलब्ध कोयले का समय पर उठान न होना है।

मुख्य घटनाक्रम

कोयला मंत्रालय ने रविवार को जारी एक आधिकारिक बयान में उन खबरों को सिरे से खारिज किया, जिनमें पंजाब में बिजली उत्पादन की कमी के पीछे कोयले की अनुपलब्धता को कारण बताया गया था। मंत्रालय ने कहा कि कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) राज्य के बिजली संयंत्रों को निर्बाध कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

गौरतलब है कि यह खुलासा ऐसे समय में आया है जब पंजाब में बिजली कटौती को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है। राज्य सरकार और केंद्र के बीच जिम्मेदारी के सवाल पर बहस तेज़ हो गई है।

आपूर्ति के आँकड़े क्या कहते हैं

मंत्रालय द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, पिछले तीन दिनों में नाभा पावर लिमिटेड (राजपुरा) की औसत खपत लगभग 4.3 रेक प्रतिदिन रही, जबकि उसे औसतन 5 रेक प्रतिदिन की आपूर्ति की गई। इसी तरह तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (मानसा) की औसत खपत 3.8 रेक प्रतिदिन रही, जबकि उसे भी 5 रेक प्रतिदिन कोयला उपलब्ध कराया गया।

सितंबर 2026 में अब तक नाभा पावर को औसतन 4.9 रेक प्रतिदिन और तलवंडी साबो पावर को 4.1 रेक प्रतिदिन कोयला आपूर्ति की गई है — दोनों के मामले में यह आँकड़ा उनकी औसत खपत से अधिक है। इससे मंत्रालय का कहना है कि आपूर्ति पक्ष में कोई कमी नहीं है।

पचवारा खदान की स्थिति

मंत्रालय ने बताया कि अप्रैल 2026 से 11 सितंबर 2026 तक पचवारा सेंट्रल कोल माइंस का उत्पादन वार्षिक लक्ष्य के 83.67 प्रतिशत तक पहुँच चुका है, जबकि कोयला प्रेषण (डिस्पैच) लक्ष्य के 68.44 प्रतिशत पर रहा। यह अंतर संकेत देता है कि उत्पादित कोयले का पूरा उठान नहीं हो पाया।

इस खदान से कोयला आपूर्ति की अनुमति PSPCL के स्वामित्व वाली परियोजनाओं के साथ-साथ नाभा पावर और तलवंडी साबो पावर जैसी निजी परियोजनाओं को भी दी गई है। निर्धारित अंतिम उपयोग संयंत्रों की आवश्यकता पूरी होने के बाद खदान के वार्षिक उत्पादन का 50 प्रतिशत तक इन संयंत्रों को उपलब्ध कराया जा सकता है, बशर्ते झारखंड सरकार को देय वैधानिक भुगतानों का पालन किया जाए।

सरकार की सिफारिशें और अगला कदम

कोयला मंत्रालय ने PSPCL को तीन प्रमुख सुधारात्मक कदम उठाने की सलाह दी है: बिजलीघरों की क्षमता का अधिकतम उपयोग, निजी बिजली संयंत्रों में तकनीकी खराबियों की बेहतर और त्वरित निगरानी, तथा CIL की सहायक कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए गए कोयले का समय पर उठान।

मंत्रालय ने कहा कि यदि ये कदम उठाए जाएँ तो पंजाब में बिजली उत्पादन को और बेहतर बनाया जा सकता है और राज्य की ज़रूरतें प्रभावी ढंग से पूरी की जा सकती हैं। यह ऐसे समय में अहम है जब गर्मी के मौसम में बिजली की माँग अपने चरम पर होती है और राज्य के नागरिकों पर इसका सीधा असर पड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो डिस्पैच लक्ष्य महज 68.44% पर क्यों अटका है? यह खाई प्रबंधन और समन्वय की विफलता की ओर इशारा करती है, जिसकी जवाबदेही केंद्र और राज्य दोनों की है। बिजली संकट को केवल कोयला बनाम प्रबंधन की बहस तक सीमित रखना उन लाखों नागरिकों के साथ अन्याय होगा, जिन्हें गर्मी में कटौती झेलनी पड़ रही है।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब के बिजली संकट का असली कारण क्या है?
कोयला मंत्रालय के अनुसार, पंजाब में बिजली उत्पादन की कमी का कारण कोयले की अनुपलब्धता नहीं, बल्कि बिजलीघरों का कम उपयोग, IPP में तकनीकी खराबियाँ और उपलब्ध कोयले का समय पर उठान न होना है। PSPCL के भंडार 11 सितंबर 2026 तक मानक आवश्यकता के 114% थे।
PSPCL के बिजलीघरों में कोयले का भंडार कितना है?
11 सितंबर 2026 तक PSPCL के बिजलीघरों में उपलब्ध कोयला भंडार निर्धारित मानक आवश्यकता के लगभग 114 प्रतिशत के बराबर था, जो पर्याप्त से अधिक है। मंत्रालय ने कहा कि यह आँकड़ा कोयला आपूर्ति की कमी की संभावना को सिरे से खारिज करता है।
नाभा पावर और तलवंडी साबो पावर को कितना कोयला मिल रहा है?
सितंबर 2026 में नाभा पावर को औसतन 4.9 रेक प्रतिदिन और तलवंडी साबो पावर को 4.1 रेक प्रतिदिन कोयला आपूर्ति की गई, जबकि उनकी औसत खपत क्रमशः 4.3 और 3.8 रेक प्रतिदिन रही। दोनों के लिए आपूर्ति खपत से अधिक रही।
पचवारा सेंट्रल कोल माइंस से पंजाब को कोयला कैसे मिलता है?
पचवारा सेंट्रल कोल माइंस से PSPCL की इकाइयों के साथ-साथ नाभा पावर और तलवंडी साबो पावर जैसी निजी परियोजनाओं को भी कोयला आपूर्ति की अनुमति है। निर्धारित अंतिम उपयोग संयंत्रों की आवश्यकता पूरी होने के बाद वार्षिक उत्पादन का 50% तक निजी संयंत्रों को दिया जा सकता है, बशर्ते झारखंड सरकार को देय वैधानिक भुगतान हो।
कोयला मंत्रालय ने PSPCL को क्या सुझाव दिए हैं?
कोयला मंत्रालय ने PSPCL को तीन प्रमुख कदम उठाने की सलाह दी है — अपने बिजलीघरों की क्षमता का अधिकतम उपयोग करना, निजी संयंत्रों में तकनीकी खराबियों की बेहतर निगरानी करना, और CIL की सहायक कंपनियों द्वारा दिए गए कोयले का समय पर उठान सुनिश्चित करना।
राष्ट्र प्रेस
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