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पंजाब बिजली कटौती: शिरोमणि अकाली दल 30 अप्रैल को करेगा राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन

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पंजाब बिजली कटौती: शिरोमणि अकाली दल 30 अप्रैल को करेगा राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन

सारांश

शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब में लगातार हो रही बिजली कटौती के खिलाफ 30 अप्रैल को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। दलजीत सिंह चीमा ने AAP सरकार पर प्रशासनिक अक्षमता का आरोप लगाया। राज्य में बिजली मांग 12,000 मेगावॉट पार कर चुकी है और प्रमुख शहरों में 8-10 घंटे कटौती हो रही है।

मुख्य बातें

शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) ने 30 अप्रैल 2025 को पंजाब में राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है।
दलजीत सिंह चीमा ने 28 अप्रैल को सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा की; एसएडी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने यह निर्णय लिया।
पंजाब में बिजली की मांग 12,000 मेगावॉट से अधिक हो गई है, जिससे लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, बठिंडा, मोहाली और पटियाला में 8-10 घंटे तक कटौती हो रही है।
प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एसएडी नेता एसडीएम/डीसी और पावरकॉम कार्यालयों के सामने धरना देंगे।
बिजली मंत्री संजीव अरोड़ा ने आश्वासन दिया कि कटौती को अधिकतम चार घंटे तक सीमित किया जाएगा।

चंडीगढ़ में शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने मंगलवार, 28 अप्रैल को घोषणा की कि उनकी पार्टी पंजाब में लगातार हो रही बिजली कटौती के खिलाफ 30 अप्रैल को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन करेगी। यह प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब गर्मी के चलते राज्य में बिजली की मांग 12,000 मेगावॉट से भी अधिक हो गई है और आम जनता को रोजाना 8 से 10 घंटे तक बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है।

मुख्य घोषणा और विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा

दलजीत सिंह चीमा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए बताया कि पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को बिजली संकट के प्रति जगाने के लिए यह विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एसएडी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने बिगड़ती बिजली स्थिति को देखते हुए यह निर्णय लिया है।

इस प्रदर्शन के तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ एसएडी नेता और कार्यकर्ता स्थानीय एसडीएम/डीसी और पावरकॉम कार्यालयों के सामने निर्बाध बिजली आपूर्ति की मांग को लेकर धरना देंगे। यह आंदोलन राज्यभर में एक साथ आयोजित किया जाएगा।

बिजली संकट की असली वजह क्या है?

दलजीत सिंह चीमा ने आरोप लगाया कि यह भीषण बिजली कटौती कोई आकस्मिक घटना नहीं है, बल्कि यह खराब बिजली नियोजन, समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने में विफलता और घोर प्रशासनिक अक्षमता का सीधा परिणाम है। उन्होंने कहा कि इस संकट का समाधान करने के बजाय सरकार आंतरिक अस्थिरता और अपने सांसदों व नेताओं के बड़े पैमाने पर दलबदल के बीच अपने अस्तित्व को बचाने में व्यस्त है।

गौरतलब है कि पंजाब में लगातार बढ़ती गर्मी के कारण बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है। पंजाब राज्य बिजली बोर्ड (पीएसपीसीएल) की ओर से कई जगहों पर शटडाउन के कारण लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, बठिंडा, मोहाली और पटियाला जैसे प्रमुख शहरों में रोजाना करीब 8 से 10 घंटे तक बिजली गुल रही।

सरकार की प्रतिक्रिया

इस बीच पंजाब के बिजली मंत्री संजीव अरोड़ा ने स्थिति को स्वीकार करते हुए कहा कि पहले से तय रखरखाव कार्यों के कारण कुछ क्षेत्रों में नियोजित कटौती करनी पड़ी, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक परेशानी हुई। उन्होंने आश्वासन दिया कि अब बिजली कटौती को अधिकतम चार घंटे तक सीमित किया जाएगा ताकि लोगों को राहत मिल सके।

हालांकि विपक्ष इस आश्वासन को अपर्याप्त मान रहा है। आलोचकों का कहना है कि सरकार ने गर्मी के मौसम से पहले पर्याप्त तैयारी नहीं की, जो एक गंभीर प्रशासनिक चूक है।

आम जनता पर असर

पंजाब के करोड़ों निवासियों के लिए यह बिजली संकट रोजमर्रा की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। लंबे समय तक बिजली न रहने से न केवल घरेलू परेशानियां बढ़ी हैं, बल्कि छोटे व्यवसायों, किसानों और उद्योगों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब अप्रैल-मई की भीषण गर्मी में लोगों को बिजली की सबसे अधिक जरूरत होती है।

आने वाले दिनों में 30 अप्रैल का विरोध प्रदर्शन पंजाब की राजनीति में बिजली मुद्दे को और अधिक केंद्र में ला सकता है और सत्तारूढ़ AAP सरकार पर दबाव बढ़ा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह AAP सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल उठाता है — जो सत्ता में आने से पहले 'मुफ्त बिजली' का वादा करती थी। विरोधाभास यह है कि जो पार्टी बिजली सुधार के नाम पर सत्ता में आई, वही आज 8-10 घंटे की कटौती के लिए जिम्मेदार है। शिरोमणि अकाली दल का यह आंदोलन भले ही राजनीतिक हो, लेकिन जनता की वास्तविक पीड़ा को आवाज दे रहा है। मुख्यधारा की मीडिया जहां सिर्फ बयानबाजी कवर कर रही है, वहीं असली सवाल यह है कि गर्मी से पहले बिजली नियोजन में इतनी बड़ी चूक क्यों हुई।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिरोमणि अकाली दल 30 अप्रैल को विरोध प्रदर्शन क्यों कर रहा है?
शिरोमणि अकाली दल पंजाब में लगातार हो रही बिजली कटौती के खिलाफ 30 अप्रैल को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन कर रहा है। पार्टी का आरोप है कि AAP सरकार की प्रशासनिक अक्षमता के कारण लोगों को 8-10 घंटे तक बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है।
पंजाब में बिजली कटौती कितने घंटे हो रही है?
पंजाब के प्रमुख शहरों जैसे लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, बठिंडा, मोहाली और पटियाला में रोजाना करीब 8 से 10 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है। PSPCL के शटडाउन कार्यों के कारण स्थिति और खराब हुई है।
पंजाब में बिजली की मांग कितनी हो गई है?
गर्मी बढ़ने के साथ पंजाब में बिजली की मांग 12,000 मेगावॉट से भी अधिक हो गई है। इससे राज्य की बिजली वितरण प्रणाली पर भारी दबाव पड़ रहा है।
पंजाब सरकार ने बिजली कटौती पर क्या कहा?
बिजली मंत्री संजीव अरोड़ा ने कहा कि पूर्व-नियोजित रखरखाव कार्यों के कारण कटौती हुई और अब इसे अधिकतम चार घंटे तक सीमित किया जाएगा। हालांकि विपक्ष इस आश्वासन को अपर्याप्त मान रहा है।
एसएडी का विरोध प्रदर्शन कहां होगा?
एसएडी का विरोध प्रदर्शन पंजाब के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक साथ होगा। वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता स्थानीय एसडीएम/डीसी और पावरकॉम कार्यालयों के सामने निर्बाध बिजली आपूर्ति की मांग को लेकर धरना देंगे।
राष्ट्र प्रेस
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