PIB फैक्ट चेक ने खारिज किया 'बिजली संकट' का दावा, 2 मई को 229 GW मांग पूरी तरह पूरी हुई
सारांश
Key Takeaways
नई दिल्ली में पीआईबी (PIB) फैक्ट चेक ने रविवार, 4 मई 2026 को स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह दावा कि कोयले की कमी के कारण भारत गंभीर बिजली संकट और ग्रिड फेलियर का सामना कर रहा है — पूरी तरह भ्रामक और निराधार है। एजेंसी ने अपने आधिकारिक एक्स (X) हैंडल पर पोस्ट कर इस दावे का खंडन किया और कहा कि यह केवल लोगों में अनावश्यक घबराहट फैलाने की कोशिश है।
वायरल दावे में क्या था
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक पोस्ट तेज़ी से वायरल हो रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कोयले की कमी के चलते देश को गंभीर बिजली संकट और ग्रिड फेलियर का सामना करना पड़ रहा है। इस पोस्ट को बड़े पैमाने पर शेयर किया गया, जिससे आम नागरिकों में भ्रम और चिंता की स्थिति उत्पन्न हुई। पीआईबी फैक्ट चेक ने इसे तथ्यों के आधार पर सिरे से नकारा।
PIB के आँकड़े क्या कहते हैं
एजेंसी ने बताया कि 2 मई 2026 को देश में अधिकतम बिजली की मांग 229 गीगावॉट (GW) दर्ज की गई, जिसे पूर्णतः पूरा किया गया। इस दौरान देश में कहीं भी बिजली की कमी की स्थिति नहीं बनी। इसके अतिरिक्त, थर्मल पावर प्लांट्स के पास वर्तमान में 53.702 मिलियन टन कोयला उपलब्ध है, जो आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
ग्रिड सुरक्षा पर भरोसा
पीआईबी फैक्ट चेक ने यह भी स्पष्ट किया कि देश में बिजली की उपलब्धता पूरी तरह संतोषजनक बनी हुई है और ग्रिड संचालन तथा वितरण पूर्व निर्धारित योजनाओं के अनुसार सुचारू रूप से जारी है। एजेंसी के अनुसार, मौजूदा फ्रीक्वेंसी कंट्रोल डिफेंस मैकेनिज्म पर्याप्त ऑपरेशनल मार्जिन प्रदान करते हैं, जिससे ग्रिड का संचालन पूरी तरह सुरक्षित बना हुआ है।
नागरिकों से अपील
पीआईबी फैक्ट चेक ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस तरह की भ्रामक खबरों पर ध्यान न दें। यदि उन्हें भारत सरकार से संबंधित कोई संदिग्ध या भ्रामक जानकारी मिलती है, तो तुरंत एजेंसी को सूचित करें। इसके लिए पीआईबी फैक्ट चेक ने अपना व्हाट्सएप नंबर और ईमेल आईडी भी साझा किया है। गौरतलब है कि हाल के महीनों में सरकारी नीतियों और बुनियादी ढाँचे को लेकर फर्ज़ी दावों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जिसके मद्देनज़र यह खंडन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब देश में गर्मियों के मौसम में बिजली की मांग अपने चरम पर होती है। सरकार और संबंधित एजेंसियाँ आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की फर्ज़ी खबरें न केवल सार्वजनिक विश्वास को नुकसान पहुँचाती हैं, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र में अनावश्यक अस्थिरता भी पैदा कर सकती हैं। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे केवल सरकारी और प्रमाणित स्रोतों से जानकारी लें।