टोक्यो ट्रायल की 80वीं वर्षगांठ: चीन ने जापानी सैन्यवाद को दी कड़ी चेतावनी, इतिहास दोहराने पर विश्व-विरोध की बात कही
सारांश
Key Takeaways
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने 3 मई 2026 को टोक्यो ट्रायल की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक अदालती प्रक्रिया ने 11 देशों की न्यायिक शक्ति को एकजुट कर अकाट्य प्रमाणों और कड़े कानूनी सिद्धांतों के आधार पर यह स्थापित किया कि जापानी सैन्यवाद ने आक्रमण युद्ध छेड़ा और अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन किया। प्रवक्ता की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब जापान के पुनः सैन्यीकरण को लेकर क्षेत्रीय तनाव चर्चा में है।
टोक्यो ट्रायल का ऐतिहासिक महत्व
टोक्यो ट्रायल ने अनेक एशियाई देशों में जापानी आक्रमणकारियों द्वारा किए गए अपराधों का पर्दाफाश किया। अदालत ने तौजौ हिदेकी सहित 25 ए-क्लास युद्ध अपराधियों को फाँसी या कारावास की सज़ा सुनाई। यह मुकदमा द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय न्याय की दिशा में उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम माना जाता है।
चीनी प्रवक्ता के अनुसार, यह ट्रायल काहिरा घोषणा और पोट्सडैम विज्ञप्ति का कार्यान्वयन था, जिसने विजयी देशों और पीड़ित राष्ट्रों की सामूहिक इच्छाशक्ति को प्रतिबिंबित किया। साथ ही इसने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों को लागू कर द्वितीय विश्व युद्ध की विजय-उपलब्धियों की रक्षा की।
जापान की अंतरराष्ट्रीय वापसी और शर्त
प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि टोक्यो ट्रायल के फैसले को स्वीकार करना जापान की अंतरराष्ट्रीय समुदाय में पुनः स्वीकार्यता का मूल सिद्धांत है। उनका यह बयान जापान-चीन के बीच ऐतिहासिक विवादों की पृष्ठभूमि में विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जापानी सैन्यवाद पर चिंता
प्रवक्ता ने कहा कि 80 वर्षों के बाद भी जापानी सैन्यवाद की दुष्ट परंपरा पूरी तरह मिटाई नहीं गई है और वह छिपे रूप से पनप रही है। उनके अनुसार, जापानी दक्षिणपंथी शक्तियाँ जापानी समाज में गलत ऐतिहासिक अवधारणाएँ भर रही हैं और पुनः सैन्यीकरण बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। इस संदर्भ में टोक्यो ट्रायल के सिंहावलोकन का व्यावहारिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
विश्व शांति के लिए कड़ी चेतावनी
प्रवक्ता ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति या शक्ति आक्रमण के इतिहास को पलटने की कोशिश करती है, तो उसे निश्चित रूप से विश्वभर के शांतिप्रेमियों का कड़ा विरोध झेलना पड़ेगा और उसे एक बार फिर इतिहास के कटघरे में खड़ा किया जाएगा। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब जापान अपनी रक्षा नीति में बड़े बदलाव कर रहा है और रक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की जा रही है।
चीन का यह कूटनीतिक संदेश स्पष्ट है — द्वितीय विश्व युद्ध की विरासत और उसके न्यायिक निर्णय आज भी अंतरराष्ट्रीय संबंधों की नींव हैं, और उन्हें नकारने की कोई भी कोशिश क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन सकती है।