पंजाब में ₹341 करोड़ की 'कमीशन लूट': अकाली दल का AAP सरकार पर बड़ा आरोप
सारांश
मुख्य बातें
शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने 22 अगस्त को चंडीगढ़ में आरोप लगाया कि पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ₹25,000 करोड़ के सरकारी ऋण पर कमीशन के नाम पर ₹341 करोड़ सरकारी खजाने से निकालने की तैयारी में है। अकाली दल के अनुसार, यह ऋण चुनावी खर्च के लिए लिया गया था और सरकारी गारंटी के तहत होने के कारण इस पर कोई कमीशन देना उचित नहीं है।
मुख्य आरोप: कमीशन की ज़रूरत क्यों नहीं
अकाली दल के नेता एनके शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जब ऋण सरकारी गारंटी के तहत लिया गया हो, तो ₹341 करोड़ का कमीशन देना पूरी तरह अनावश्यक और संदिग्ध है। उन्होंने इस पूरे मामले की स्वतंत्र जाँच की माँग की और कहा कि यह मामला भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी से भरा हुआ है।
शर्मा ने यह भी कहा कि इतनी बड़ी राशि का ऋण लेने के बावजूद राज्य सरकार ने कोई ठोस पूंजी निवेश योजना नहीं बनाई, जो सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करती है।
PSPCL और GMADA पर संकट के बादल
शर्मा के अनुसार, AAP सरकार राज्य की दो प्रमुख संस्थाओं — पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) और ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) — को 8.65 प्रतिशत की ऊँची ब्याज दर पर भारी ऋण लेने के लिए विवश कर रही है, जिससे ये संस्थाएँ दिवालिया होने की कगार पर पहुँच सकती हैं।
उन्होंने बताया कि PSPCL द्वारा लिया जा रहा ₹10,000 करोड़ का ऋण अगले 20 वर्षों में ₹17,300 करोड़ के ब्याज का बोझ पैदा करेगा। इसका सीधा असर बिजली दरों पर पड़ेगा — उद्योग पर अभी ₹9 प्रति यूनिट का शुल्क है, जो बढ़कर ₹13 प्रति यूनिट हो सकता है, जिससे राज्य में नए औद्योगिक निवेश पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।
इसी तरह, GMADA पर ₹15,000 करोड़ के ऋण का बोझ पड़ने से वह घाटे में जा सकती है और उसके कर्मचारियों के वेतन तक खतरे में पड़ सकते हैं, ऐसा अकाली दल का दावा है।
नौकरियों के दावों पर सवाल
शर्मा ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि AAP सरकार ने युवाओं को 65,000 नई सरकारी नौकरियाँ देने का वादा किया था, लेकिन पिछले चार वर्षों में केवल 24,000 रिक्तियों का विज्ञापन ही प्रकाशित किया गया। उन्होंने सरकार से अपने कार्यकाल के दौरान नियुक्त सभी 65,000 कर्मचारियों की सूची सार्वजनिक करने की माँग की।
अन्य आरोप: महंगाई भत्ता और विज्ञापन खर्च
अकाली दल के नेता ने राज्य कर्मचारियों को महंगाई भत्ता न देने और सरकारी विज्ञापनों पर ₹5,000 करोड़ खर्च करने के लिए भी AAP सरकार की तीखी आलोचना की। उनका कहना था कि यह जनता के पैसे का दुरुपयोग है।
आगे क्या होगा
अकाली दल ने इस पूरे मामले की स्वतंत्र जाँच की माँग की है। यह देखना होगा कि AAP सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या कोई आधिकारिक जाँच एजेंसी इस मामले को संज्ञान में लेती है। पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव से पहले ये आरोप राजनीतिक रूप से और अधिक तीखे हो सकते हैं।