सवाई माधोपुर में रेत माफिया का हमला: कॉन्स्टेबल सुरेंद्र सिंह को ट्रैक्टर से कुचला, बुज़ुर्ग महिला भी घायल
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के सवाई माधोपुर ज़िले में अवैध बजरी खनन के खिलाफ अभियान के दौरान 7 अक्टूबर 2026 को रेत माफिया ने पुलिस पर हमला किया — एक ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक ने कथित तौर पर वाहन रोकने का संकेत दे रहे कॉन्स्टेबल सुरेंद्र सिंह को सीधे टक्कर मार दी और पहिया उनके पैर पर चढ़ा दिया। यह घटना चौथ का बरवाड़ा थाना क्षेत्र के भेडोला रोड पर बुधवार सुबह करीब 9 बजे हुई।
मुख्य घटनाक्रम
चौथ का बरवाड़ा पुलिस स्टेशन के कॉन्स्टेबल सुरेंद्र सिंह और उनके साथी पुलिसकर्मी मंगलवार की रात रूटीन पेट्रोलिंग के बाद वापस लौट रहे थे। बुधवार की सुबह भेडोला रोड पर उन्होंने चौथ का बरवाड़ा की दिशा से तेज़ रफ़्तार से आती एक संदिग्ध ट्रैक्टर-ट्रॉली देखी। कॉन्स्टेबल ने हाथ देकर ड्राइवर को रुकने का इशारा किया, लेकिन ड्राइवर ने रफ़्तार कम करने की बजाय कथित तौर पर गाड़ी और तेज़ कर दी और सीधे उन्हें टक्कर मार दी।
सुरेंद्र सिंह सड़क पर गिर पड़े, जिसके बाद ट्रैक्टर का पहिया उनके पैर पर चढ़ गया। इसी घटना में सड़क किनारे मवेशियों के लिए चारा लेकर जा रही करीब 85 वर्षीया बुज़ुर्ग महिला जूमी को भी टक्कर लगी। हमले के बाद ट्रैक्टर चालक वाहन लेकर मौके से फरार हो गया।
घायलों को उपचार और चालक की तलाश
स्थानीय नागरिकों और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तत्काल दोनों घायलों को नज़दीकी कम्युनिटी हेल्थ सेंटर पहुँचाया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल कॉन्स्टेबल सुरेंद्र सिंह को पहले जिला अस्पताल और फिर बेहतर उपचार के लिए जयपुर रेफर किया गया। चौथ का बरवाड़ा थाना प्रभारी अजीत कुमार ने बताया कि फरार चालक के खिलाफ कॉन्स्टेबल को कुचलने की कथित कोशिश और अवैध बजरी खनन व परिवहन के आरोपों में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस दल आसपास के इलाकों में छापेमारी कर चालक का पता लगाने में जुटा है।
राजस्थान में खनन माफिया के हमलों की बढ़ती श्रृंखला
यह घटना प्रतापगढ़ में 21 सितंबर 2026 की रात हुई उस घटना के कुछ ही दिनों बाद सामने आई है जिसमें फॉरेस्ट रेंजर प्रताप सिंह चुंडावत की कथित तौर पर एक डंपर ट्रक ने अवैध खनन रोकने की कोशिश के दौरान कुचलकर हत्या कर दी थी। गौरतलब है कि यह राजस्थान में अवैध खनन माफिया द्वारा प्रवर्तन दलों पर किया गया हालिया हमलों की एक लंबी श्रृंखला का हिस्सा है — एक ऐसा पैटर्न जो तब भी नहीं थम रहा जब न्यायिक निगरानी और सरकारी सक्रियता दोनों बढ़ रही हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को चंबल नदी क्षेत्र में अवैध खनन पर रोक से संबंधित निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था।
सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार ने फॉरेस्ट रेंजर प्रताप सिंह चुंडावत की मृत्यु के बाद की गई कार्रवाई का ब्यौरा देने वाली रिपोर्ट न्यायालय में सौंपी। उच्चतम स्तर की न्यायिक दखलअंदाज़ी के बावजूद ज़मीनी स्थिति बदलती नहीं दिख रही।
आम जनता और प्रवर्तन दलों पर असर
सवाई माधोपुर की यह घटना साफ़ दर्शाती है कि अवैध खनन नेटवर्क अब खुलेआम प्रवर्तन दलों को निशाना बनाने से नहीं हिचकिचाता। एक निर्दोष बुज़ुर्ग महिला का घायल होना इस बात का प्रमाण है कि माफिया की आक्रामकता अब आम नागरिकों के लिए भी सीधा खतरा बन चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक गिरफ्तारी और सज़ा की दर नहीं बढ़ती, ऐसी वारदातें जारी रहेंगी।