23 सितंबर 2026
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प्रतापगढ़ रेंजर प्रताप सिंह चुंडावत को शहीद दर्जे की मांग तेज, अवैध खनन विरोधी ऑपरेशन में गई थी जान

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प्रतापगढ़ रेंजर प्रताप सिंह चुंडावत को शहीद दर्जे की मांग तेज, अवैध खनन विरोधी ऑपरेशन में गई थी जान

सारांश

राजस्थान के प्रतापगढ़ में अवैध खनन माफिया से लड़ते हुए जान देने वाले रेंजर प्रताप सिंह चुंडावत की कहानी सिर्फ एक हादसे की नहीं है — यह उस खतरनाक खामोश जंग की तस्वीर है जो राज्य के वनकर्मी रोज़ लड़ते हैं। शहीद दर्जे की माँग अब एक सवाल बन चुकी है: क्या सरकार जंगलों के इन रखवालों को वह सम्मान देगी जो उनकी ड्यूटी माँगती है?

मुख्य बातें

रेंजर प्रताप सिंह चुंडावत की मौत सोमवार रात करीब 11:30 बजे प्रतापगढ़, राजस्थान में अवैध खनन विरोधी ऑपरेशन के दौरान हुई।
आरोप है कि डंपर चालक ने वाहन तेज़ कर रेंजर और उनकी मोटरसाइकिल को लगभग 50 मीटर तक घसीटा।
सांसद सीपी जोशी , एडीएम विजयेश पांड्या और डीएफओ सुरेश अग्रवाल ने शहीद दर्जे की माँग सरकार को भेजने की बात कही।
फरार डंपर चालक की तलाश में पुलिस की तीन विशेष टीमें तैनात; जेसीबी और ट्रैक्टर जब्त।
रेंजर अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले थे; पत्नी आशा कुंवर , 13 वर्षीय बेटी गुंजन और 8 वर्षीय बेटे अनिरुद्ध का सहारा छिना।
प्रतापगढ़ में 1,319 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र; घटना ने खाली पदों और कर्मचारियों की कमी पर बहस फिर से शुरू की।

राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में अवैध खनन के खिलाफ रात के ऑपरेशन में अपनी जान गँवाने वाले वन विभाग के रेंजर प्रताप सिंह चुंडावत को शहीद का दर्जा दिलाने की माँग अब व्यापक रूप ले चुकी है। जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ वन अधिकारी और सामाजिक संगठन एकजुट होकर सरकार से यह माँग कर रहे हैं। 40 वर्षीय रेंजर की मौत ने पूरे प्रदेश में वनकर्मियों की सुरक्षा और अवैध खनन माफिया के बढ़ते खतरे पर बहस छेड़ दी है।

रात के अँधेरे में अंतिम ड्यूटी

सोमवार रात करीब 11:30 बजे प्रताप सिंह और उनकी टीम को छोटी सादड़ी इलाके में अवैध खनन और मिट्टी के गैर-कानूनी परिवहन की सूचना मिली। वे घाटी-वाले बालाजी के पास चक सुखद के जंगली क्षेत्र में पहुँचे, जहाँ टीम को एक जेसीबी, एक ट्रैक्टर और मिट्टी से भरा एक डंपर मिला।

पुलिस के मुताबिक, जैसे ही रेंजर ने कार्रवाई शुरू की, डंपर चालक ने अचानक वाहन की गति बढ़ा दी। आरोप है कि रेंजर चुंडावत और उनकी मोटरसाइकिल को करीब 50 मीटर तक घसीटा गया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। अस्पताल पहुँचाने के बावजूद डॉक्टर उन्हें नहीं बचा सके।

जाँच और गिरफ्तारी की कोशिशें

प्रतापगढ़ के एसपी विशाल जांगिड़ ने बताया कि पूछताछ के लिए कई लोगों को हिरासत में लिया गया है और फरार डंपर चालक का पता लगाने के लिए पुलिस की तीन विशेष टीमें तैनात की गई हैं। घटनास्थल पर मिले जेसीबी और ट्रैक्टर को जब्त कर लिया गया है। जाँचकर्ता अवैध मिट्टी परिवहन में कथित तौर पर शामिल सभी लोगों की भूमिका की जाँच कर रहे हैं।

शहीद दर्जे की माँग और राजनीतिक दबाव

सांसद सीपी जोशी ने माँग की है कि रेंजर को शहीद का दर्जा दिया जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। एडीएम विजयेश पांड्या ने पुष्टि की कि यह अनुरोध औपचारिक रूप से सरकार को भेजा जाएगा। डीएफओ सुरेश अग्रवाल ने भी कहा कि वन विभाग की ओर से सरकार को एक स्वतंत्र प्रस्ताव भेजा जाएगा। अंतिम निर्णय राज्य सरकार का होगा।

गौरतलब है कि प्रताप सिंह की सेवा को पहले ही राज्य-स्तरीय पुरस्कार के लिए नामांकित किया जा चुका था। वे बाघों, तेंदुओं, अजगरों और मगरमच्छों से जुड़े बचाव अभियानों में सक्रिय रहे थे और अपने साथियों के बीच एक कुशल निशानेबाज और बेहतरीन तैराक के रूप में जाने जाते थे।

परिवार पर दुखों का पहाड़

प्रताप सिंह अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनके जाने से उनकी पत्नी आशा कुंवर, 13 वर्षीय बेटी गुंजन और 8 वर्षीय बेटे अनिरुद्ध का मुख्य सहारा छिन गया है। परिवार कुछ समय पहले ही प्रताप सिंह के पिता को खो चुका था और अब यह दूसरा आघात परिवार के लिए असहनीय है।

वन क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियाँ

प्रतापगढ़ में लगभग 1,319 वर्ग किलोमीटर का वन क्षेत्र है, जहाँ नियमों का पालन कराना और सुरक्षा सुनिश्चित करना वन विभाग के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी है। इस घटना ने खाली पदों और कर्मचारियों की कमी जैसी पुरानी समस्याओं को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब अवैध खनन माफिया के खिलाफ अभियानों में वनकर्मियों की जान को बढ़ते खतरे की शिकायतें पहले से सामने आ रही थीं। आने वाले दिनों में सरकार का रुख और आरोपी चालक की गिरफ्तारी इस मामले में न्याय की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या राजस्थान सरकार इस दर्जे के साथ परिवार को ठोस आर्थिक सुरक्षा और रिक्त पदों को भरने की प्रतिबद्धता भी देगी। 1,319 वर्ग किलोमीटर के वन क्षेत्र की रक्षा के लिए अपर्याप्त स्टाफ और न्यूनतम सुरक्षा उपकरण — यह वह असुविधाजनक सच है जिस पर राजनीतिक बयानबाज़ी अमूमन चुप रह जाती है।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रेंजर प्रताप सिंह चुंडावत की मौत कैसे हुई?
सोमवार रात करीब 11:30 बजे प्रतापगढ़ के छोटी सादड़ी इलाके में अवैध खनन विरोधी ऑपरेशन के दौरान एक डंपर चालक ने कथित तौर पर वाहन तेज़ कर रेंजर और उनकी मोटरसाइकिल को लगभग 50 मीटर तक घसीटा। गंभीर रूप से घायल रेंजर को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया।
प्रताप सिंह चुंडावत को शहीद दर्जा मिलेगा या नहीं?
एडीएम विजयेश पांड्या और डीएफओ सुरेश अग्रवाल दोनों ने औपचारिक प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजने की बात कही है। सांसद सीपी जोशी ने भी सख्त कार्रवाई और शहीद दर्जे की माँग उठाई है। अंतिम निर्णय राजस्थान सरकार का होगा।
घटना में आरोपी डंपर चालक को पकड़ा गया?
अभी तक डंपर चालक फरार है। पुलिस एसपी विशाल जांगिड़ के मुताबिक आरोपी की तलाश में तीन विशेष टीमें तैनात की गई हैं और अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी जारी है। पूछताछ के लिए कई लोगों को हिरासत में लिया गया है।
रेंजर के परिवार की स्थिति क्या है?
प्रताप सिंह परिवार के एकमात्र कमाने वाले थे। उनके जाने से पत्नी आशा कुंवर, 13 वर्षीय बेटी गुंजन और 8 वर्षीय बेटे अनिरुद्ध का मुख्य सहारा छिन गया है। परिवार हाल ही में प्रताप सिंह के पिता को भी खो चुका था।
इस घटना से राजस्थान के वन विभाग पर क्या असर पड़ेगा?
घटना ने प्रतापगढ़ के 1,319 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र में खाली पदों, कर्मचारियों की कमी और वनकर्मियों की सुरक्षा जैसे मुद्दों को फिर से चर्चा में ला दिया है। आलोचकों का कहना है कि बिना पर्याप्त बल और सुरक्षा उपकरणों के इस तरह के अभियानों में जोखिम और बढ़ जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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