29 अगस्त 2026
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उदयपुर के खेड़ा गांव में 5 पर हमला करने वाला पैंथर पकड़ा, सज्जनगढ़ जैविक उद्यान भेजा

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उदयपुर के खेड़ा गांव में 5 पर हमला करने वाला पैंथर पकड़ा, सज्जनगढ़ जैविक उद्यान भेजा

सारांश

उदयपुर के खेड़ा गांव में दो दिनों में पाँच लोगों पर हमला करने वाला पैंथर शनिवार सुबह वन विभाग के 40 कर्मियों की टीम ने पकड़ लिया। एक की मौत और चार घायल होने के बाद गाँव खाली हो गया था — अब पैंथर सज्जनगढ़ जैविक उद्यान में है।

मुख्य बातें

उदयपुर के खेड़ा गांव में दो दिन तक दहशत फैलाने वाला पैंथर 29 अगस्त की सुबह पकड़ा गया।
हमलों में 45 वर्षीय लोगरलाल मीणा की मौत; जग्गा मीणा, हितेश, कालू और लोगरी बाई घायल — सभी खतरे से बाहर।
डीके तिवारी के नेतृत्व में 40 वनकर्मियों ने 24 घंटे निगरानी रखी; रास्तों पर रेत बिछाकर पदचिह्न ट्रैक किए।
पैंथर को ट्रैंक्विलाइज़र से बेहोश कर सज्जनगढ़ जैविक उद्यान भेजा गया।
ग्रामीणों ने गाँव खाली कर शरण ली थी; पैंथर पकड़े जाने के बाद इलाके में राहत।

उदयपुर के उमरड़ा क्षेत्र के खेड़ा गांव में लगातार दो दिनों तक पाँच ग्रामीणों पर हमला कर दहशत फैलाने वाले पैंथर को वन विभाग ने शनिवार, 29 अगस्त की सुबह आखिरकार पकड़ लिया। पिंजरे में फँसने के बाद उसे ट्रैंक्विलाइज़र से बेहोश कर सज्जनगढ़ जैविक उद्यान भेज दिया गया। इन हमलों में एक व्यक्ति की मौत हो चुकी थी और चार अन्य घायल हुए थे।

मुख्य घटनाक्रम

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पैंथर शुक्रवार तड़के फिर उसी इलाके में लौट आया था। उसकी गतिविधियाँ कैमरा ट्रैप में दर्ज हुईं, लेकिन पिंजरे के निकट आने के बावजूद वह उसमें नहीं घुसा। अधिकारियों ने पुष्टि की कि पशु हमले वाली जगह के करीब 1.5 किलोमीटर के दायरे में ही विचरण कर रहा था। पैंथर के संभावित रास्तों की पहचान के लिए रास्तों पर रेत बिछाई गई, जिससे उसके पदचिह्नों से उसकी सीमित आवाजाही की पुष्टि हुई।

ऑपरेशन की रूपरेखा

उत्तरी वन मंडल के उप वन संरक्षक डीके तिवारी के नेतृत्व में करीब 40 वनकर्मी मौके पर तैनात रहे। विभाग ने एक अतिरिक्त पिंजरा, कई कैमरा ट्रैप और अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की। ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने और 24 घंटे निगरानी रखने के कारण इस दौरान कोई नया हमला नहीं हुआ। अंततः शनिवार को पैंथर पिंजरे में फँस गया।

हमलों का विवरण और नुकसान

पहला हमला मंगलवार देर शाम हुआ था, जिसमें एक युवक घायल हुआ। ग्रामीणों के सामान्य गतिविधियाँ फिर शुरू करने के बाद बुधवार सुबह करीब 6 बजे पैंथर ने फिर हमला कर तीन लोगों को घायल किया। उसी दिन दोपहर करीब 1 बजे एक महिला पर भी हमला हुआ, जिससे हालात और गंभीर हो गए। इन हमलों में 45 वर्षीय लोगरलाल मीणा की मौत हो गई, जबकि 60 वर्षीय जग्गा मीणा, 20 वर्षीय हितेश, 40 वर्षीय कालू और 45 वर्षीय लोगरी बाई घायल हुए। अधिकारियों के अनुसार सभी घायल फिलहाल खतरे से बाहर हैं।

आम जनता पर असर

लगातार हमलों के बाद खेड़ा गांव के लोगों ने गाँव खाली कर दिया था और सरकारी भवनों तथा रिश्तेदारों के घरों में शरण ली थी। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में हुआ जब राजस्थान के कई हिस्सों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएँ बढ़ रही हैं। हालाँकि ग्रामीण अभी पूरी तरह वापस नहीं लौटे हैं, पैंथर के पकड़े जाने से इलाके में राहत और सुरक्षा की भावना बढ़ी है।

क्या होगा आगे

पैंथर को अब सज्जनगढ़ जैविक उद्यान में रखा जाएगा, जहाँ उसके स्वास्थ्य की जाँच की जाएगी। वन विभाग के अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे खेड़ा और आसपास के गाँवों में मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए दीर्घकालिक उपायों पर विचार करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो वन क्षेत्रों के सिकुड़ने और आबादी के जंगल की सीमा तक फैलने से जन्म लेती है। वन विभाग की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन सवाल यह है कि पहले हमले के बाद गाँव को तुरंत खाली क्यों नहीं कराया गया — दूसरे और तीसरे हमले रोके जा सकते थे। दीर्घकालिक समाधान के बिना — चाहे वह बफर ज़ोन हो, जल्द-चेतावनी प्रणाली हो, या पुनर्वास नीति — ऐसी घटनाएँ दोहराती रहेंगी।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उदयपुर के खेड़ा गांव में पैंथर ने कितने लोगों पर हमला किया?
पैंथर ने दो दिनों में पाँच लोगों पर हमला किया। इनमें 45 वर्षीय लोगरलाल मीणा की मौत हो गई, जबकि जग्गा मीणा, हितेश, कालू और लोगरी बाई घायल हुए — अधिकारियों के अनुसार सभी घायल खतरे से बाहर हैं।
पैंथर को कहाँ भेजा गया है?
पकड़े जाने के बाद पैंथर को ट्रैंक्विलाइज़र से बेहोश कर उदयपुर के सज्जनगढ़ जैविक उद्यान भेजा गया है, जहाँ उसके स्वास्थ्य की जाँच की जाएगी।
वन विभाग ने पैंथर को पकड़ने के लिए क्या कदम उठाए?
उप वन संरक्षक डीके तिवारी के नेतृत्व में करीब 40 वनकर्मी तैनात किए गए। अतिरिक्त पिंजरे, कैमरा ट्रैप लगाए गए और रास्तों पर रेत बिछाकर पदचिह्न ट्रैक किए गए। 24 घंटे निगरानी रखी गई और ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया।
खेड़ा गांव के ग्रामीणों ने हमलों के बाद क्या किया?
लगातार हमलों के बाद खेड़ा गांव के निवासियों ने गाँव खाली कर दिया और सरकारी भवनों तथा रिश्तेदारों के घरों में शरण ली। पैंथर के पकड़े जाने के बाद इलाके में राहत है, हालाँकि ग्रामीण अभी पूरी तरह वापस नहीं लौटे हैं।
क्या उदयपुर क्षेत्र में पैंथर के हमले पहले भी हुए हैं?
राजस्थान के उदयपुर सहित कई ज़िलों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएँ पहले भी दर्ज होती रही हैं। वन क्षेत्रों के निकट बसे गाँवों में तेंदुए और पैंथर के हमलों की घटनाएँ राज्य में नई नहीं हैं, हालाँकि इस बार की घटना की तीव्रता और मौत असामान्य रही।
राष्ट्र प्रेस
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