राजस्व मामलों में 'तारीख पर तारीख' बंद हो: CM योगी ने 5 साल पुराने केसों के निस्तारण के दिए सख्त निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 29 अगस्त 2026 को वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि उत्तर प्रदेश के राजस्व न्यायालयों में 5 वर्ष से अधिक समय से लंबित सभी मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाए। उन्होंने कहा कि आम नागरिक की जमीन, संपत्ति और अधिकारों से जुड़े प्रकरणों में अनावश्यक विलंब किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और 'तारीख पर तारीख' की प्रवृत्ति को हर हाल में समाप्त करना होगा।
मुख्य निर्देश और राजस्व मामलों की समीक्षा
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि नायब तहसीलदार कोर्ट से लेकर राजस्व परिषद के न्यायालयों तक सभी स्तरों पर 5 वर्ष से अधिक समय से लंबित राजस्व प्रकरणों को चिन्हित कर नियोजित प्रयासों के साथ निस्तारित कराया जाए। उन्होंने विशेष रूप से धारा 33 के अंतर्गत अविवादित वरासत के मामलों को मिशन मोड में निपटाने का निर्देश दिया।
बैठक में राजस्व परिषद की ओर से नामांतरण, सीमांकन, पैमाइश, अंश निर्धारण, वरासत, बंटवारा और भू-उपयोग से संबंधित मामलों की जिलावार स्थिति प्रस्तुत की गई। 5 वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों के लिहाज से शीर्ष 5 जिलों की स्थिति और प्रदेश में सबसे लंबे समय से लंबित शीर्ष 10 प्रकरणों की जानकारी भी मुख्यमंत्री को दी गई।
योगी ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने जिलों में राजस्व न्यायालयों की कोर्टवार समीक्षा स्वयं करें और लंबित प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण से आम नागरिकों को वर्षों तक अधिकारियों और न्यायालयों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी।
जनशिकायतों के निस्तारण पर कड़ा रुख
मुख्यमंत्री ने जनता दर्शन तथा आईजीआरएस (IGRS) में प्राप्त जनशिकायतों के त्वरित और संतुष्टिपरक निस्तारण पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायतों का निस्तारण केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं होना चाहिए — शिकायतकर्ता की वास्तविक समस्या का समाधान सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
समीक्षा में ऐसे प्रकरण सामने आए जहाँ मूल शिकायत के बजाय दूसरी जानकारी के आधार पर निस्तारण किया गया अथवा आवश्यक रिपोर्ट प्राप्त किए बिना ही प्रकरण बंद कर दिया गया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिन मामलों में निस्तारण संतोषजनक नहीं है या गलत आख्या के आधार पर प्रकरण बंद किया गया है, उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा संबंधित जिलाधिकारी अथवा पुलिस कप्तान को भेजकर 5 दिनों में स्पष्टीकरण माँगा जाए।
उन्होंने कहा कि शासन की प्राथमिकता शिकायतों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि आमजन की समस्या का वास्तविक और स्थायी समाधान करना है। यह उल्लेखनीय है कि यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब प्रदेश में लंबित जनशिकायतों की संख्या को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
अपराध नियंत्रण: गंभीर अपराधों में 5.1% की कमी
बैठक में 13 जुलाई से 23 अगस्त के बीच प्रदेश में अपराध की जनपदवार स्थिति का विश्लेषण किया गया। अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) ने बताया कि 13-19 जुलाई की तुलना में 17-23 अगस्त की अवधि में कुल एफआईआर की संख्या में 0.4%, गंभीर अपराधों में 5.1%, महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में 3.9% तथा अनुसूचित जाति/जनजाति के विरुद्ध अपराधों में 11.2% की कमी दर्ज हुई है।
मुख्यमंत्री ने अपराध नियंत्रण के लिए निरंतर सतर्कता और प्रभावी कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने महिला बीट पुलिस अधिकारियों की सक्रियता और क्षेत्र में उनकी उपस्थिति बढ़ाने तथा छेड़खानी और चेन स्नेचिंग जैसी घटनाओं पर कठोरतम कार्रवाई करने के निर्देश दिए। पुलिस जोन और रेंज स्तर पर साप्ताहिक क्राइम एनालिसिस करने के भी निर्देश दिए गए।
जन्माष्टमी, विश्वकर्मा पूजा और गणेश चतुर्थी की तैयारियाँ
आगामी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, विश्वकर्मा पूजा और गणेश चतुर्थी के मद्देनज़र मुख्यमंत्री ने पुलिस-प्रशासन को पूरी सतर्कता और संवेदनशीलता के साथ तैयारियाँ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मथुरा-वृंदावन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए क्राउड कंट्रोल की विस्तृत कार्ययोजना पहले से तैयार करने को कहा गया।
श्री बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन के साथ समन्वय कर अलग कार्ययोजना तैयार करने तथा आवश्यकता के अनुसार होल्डिंग एरिया की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए। गौरतलब है कि मथुरा-वृंदावन में जन्माष्टमी के अवसर पर लाखों श्रद्धालु एकत्रित होते हैं, जिससे भीड़ प्रबंधन एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती बन जाती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यह समीक्षा बैठक उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक और कदम है — अब देखना यह होगा कि जिलाधिकारी और राजस्व अधिकारी इन निर्देशों को ज़मीन पर कितनी तेज़ी से लागू करते हैं।