नेपाल बाढ़: 45 केरलवासी पारगमन स्थलों पर सुरक्षित, 7 से संपर्क बाकी — सतीशन
सारांश
मुख्य बातें
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने 29 अगस्त 2026 को जानकारी दी कि नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बीच नेपाल और भारत के पारगमन स्थलों पर 45 केरलवासी यात्री सुरक्षित हैं और उनकी स्वदेश वापसी की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही कोच्चि से गए 14 सदस्यीय दल समेत कुल 16 केरलवासी पहले ही सुरक्षित घर लौट चुके हैं।
मुख्यमंत्री सतीशन का अपडेट
मुख्यमंत्री सतीशन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि श्रुति शिखामणि (कक्कनाड) और रिनीत मोहन (पिरावोम) सहित 16 केरलवासी सकुशल वापस आ गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी 7 व्यक्तियों से संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है, जिनमें केरल मूल के 4 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक भी शामिल हैं।
इन लापता व्यक्तियों की जानकारी जुटाने के लिए विदेश मंत्रालय से सक्रिय रूप से समन्वय किया जा रहा है। केरल मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देशों पर नोरका रूट्स और दिल्ली स्थित एनआरके विकास कार्यालय भारत पहुँचने वाले सभी यात्रियों के लिए पारगमन और वापसी यात्रा की व्यवस्था में जुटे हैं।
नेपाल में बचाव अभियान
नेपाल सरकार ने 29 अगस्त को पुष्टि की कि बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 114 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। आपदाग्रस्त क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान निरंतर जारी है।
नेपाल पर्यटन बोर्ड द्वारा जारी सूची के अनुसार, 15 देशों के कुल 187 लोगों को बचाया गया है। इनमें सर्वाधिक भारत के 114, उसके बाद चीन के 27 और दक्षिण कोरिया के 20 पर्यटक शामिल हैं। बेल्जियम, बुल्गारिया, जर्मनी, इटली, माल्टा, ओमान, पुर्तगाल, रूस, स्पेन, स्विट्ज़रलैंड, तुर्की और अमेरिका के नागरिकों को भी बचाया गया है।
आम जनता पर असर
लगातार भारी वर्षा के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ने, सड़क संपर्क टूटने और भूस्खलन की घटनाओं ने कई इलाकों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने का काम जारी है।
गौरतलब है कि नेपाल में बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक, तीर्थयात्री, कारोबारी और अन्य नागरिक नियमित रूप से आते-जाते हैं। ऐसे में बाढ़ जैसी आपदा के दौरान उनकी सुरक्षा दोनों देशों की साझा प्राथमिकता बन जाती है।
क्या होगा आगे
विदेश मंत्रालय और केरल सरकार के समन्वित प्रयासों से शेष 7 लापता व्यक्तियों का पता लगाने की कोशिश जारी है। नोरका रूट्स और एनआरके विकास कार्यालय पारगमन स्थलों पर फँसे यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय हैं। नेपाल में मौसम की स्थिति और बचाव अभियान की प्रगति पर दोनों सरकारें नज़र बनाए हुए हैं।