29 अगस्त 2026
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नेपाल बाढ़: 114 भारतीयों समेत 184 पर्यटक बचाए गए, 420 से अभी भी संपर्क नहीं

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नेपाल बाढ़: 114 भारतीयों समेत 184 पर्यटक बचाए गए, 420 से अभी भी संपर्क नहीं

सारांश

नेपाल में 26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ के बाद बचाव अभियान में 114 भारतीयों समेत 15 देशों के 184 पर्यटक सुरक्षित निकाले गए, लेकिन 420 से अभी भी संपर्क नहीं। भारत के विदेश मंत्रालय ने 24 घंटे नियंत्रण कक्ष सक्रिय किया है।

मुख्य बातें

29 अगस्त 2026 दोपहर 1:30 बजे तक 184 विदेशी पर्यटकों को बचाया गया, जिनमें 114 भारतीय , 27 चीनी और 20 दक्षिण कोरियाई नागरिक शामिल हैं।
420 पर्यटकों से अभी भी कोई संपर्क नहीं; 3 पर्यटक अधिकारियों के संपर्क में हैं।
26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में बाढ़ से रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और गोरखा जिले सबसे अधिक प्रभावित।
विदेश मंत्रालय ने प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए 24 घंटे नियंत्रण कक्ष स्थापित किया।
काठमांडू-मुगलिंग सड़क मार्ग पूरी तरह चालू; प्रभावित जिलों के कुछ हिस्सों को छोड़कर देशभर का सड़क नेटवर्क सामान्य।

नेपाल में 26 अगस्त 2026 को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद बचाव अभियान में अब तक 184 विदेशी पर्यटकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिनमें सर्वाधिक 114 भारतीय नागरिक शामिल हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड (एनटीबी) ने 29 अगस्त 2026 को दोपहर 1:30 बजे तक के आँकड़े जारी करते हुए बताया कि अभी भी 420 पर्यटकों से कोई संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है।

मुख्य घटनाक्रम

भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई भयंकर बाढ़ ने रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और गोरखा जिलों को सबसे अधिक प्रभावित किया। नदियों के जलस्तर में अचानक वृद्धि, भूस्खलन और सड़क संपर्क टूटने के कारण सैकड़ों पर्यटक और स्थानीय निवासी फँस गए। एनटीबी द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की गई सूची के अनुसार, 15 देशों के कुल 187 नागरिकों को बचाया गया है।

राष्ट्रीयता के अनुसार बचाए गए लोगों में भारत के 114, चीन के 27 और दक्षिण कोरिया के 20 पर्यटक सबसे अधिक हैं। इनके अतिरिक्त बेल्जियम, बुल्गारिया, जर्मनी, इटली, माल्टा, ओमान, पुर्तगाल, रूस, स्पेन, स्विट्जरलैंड, तुर्की और अमेरिका के नागरिक भी इस सूची में शामिल हैं। 3 पर्यटक अभी भी अधिकारियों के संपर्क में हैं।

बचाव अभियान की स्थिति

नेपाल का संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय, एनटीबी, पर्यटक पुलिस और राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) संयुक्त रूप से खोज, बचाव और निकासी अभियान चला रहे हैं। फँसे हुए, घायल और लापता पर्यटकों का पता लगाने के लिए स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों के साथ तालमेल बनाया गया है। पर्यटन विभाग के अनुसार, प्रभावित नागरिकों की जानकारी और सहायता के लिए संबंधित देशों के राजनयिक मिशनों के साथ भी समन्वय किया जा रहा है।

इसी क्रम में 28 अगस्त को नई दिल्ली स्थित सिंगापुर उच्चायोग के फर्स्ट सेक्रेटरी अब्राहम टैन और न्यूजीलैंड उच्चायोग की काउंसलर जेनी डू टॉयट ने एनटीबी का दौरा किया और अपने-अपने लापता नागरिकों का पता लगाने में सहयोग माँगा।

भारत सरकार की प्रतिक्रिया

भारत सरकार नेपाल के घटनाक्रम पर सतत निगरानी रख रही है। विदेश मंत्रालय ने बाढ़ प्रभावित भारतीय नागरिकों और उनके परिजनों की सहायता के लिए एक 24 घंटे सक्रिय नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है। गौरतलब है कि नेपाल में भारतीय पर्यटकों, तीर्थयात्रियों और कारोबारियों की बड़ी संख्या नियमित रूप से आती-जाती रहती है, जिससे ऐसी आपदाओं में उनकी सुरक्षा दोनों देशों के लिए प्राथमिकता बन जाती है।

सड़क संपर्क और यात्रा सलाह

एनटीबी ने बताया कि काठमांडू-मुगलिंग सड़क मार्ग अब पूरी तरह से चालू हो गया है और सामान्य आवाजाही बहाल हो चुकी है। रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और गोरखा के कुछ बाढ़-प्रभावित हिस्सों को छोड़कर देशभर का शेष सड़क नेटवर्क सामान्य रूप से संचालित है। पर्यटकों और स्थानीय निवासियों से अपील की गई है कि वे स्थानीय अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन करें।

यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल में मानसून अपने चरम पर है और आने वाले हफ्तों में और अधिक वर्षा की संभावना बनी हुई है। बचाव अभियान जारी रहने और 420 लापता पर्यटकों की तलाश के साथ, स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी पर्यटन अवसंरचना और पूर्व-चेतावनी प्रणाली उस गति से नहीं बढ़ी जिस गति से विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। 420 लापता पर्यटकों का आँकड़ा यह सवाल उठाता है कि क्या ट्रेकिंग और पर्यटन परमिट जारी करते समय वास्तविक समय में मौसम-जोखिम आकलन को अनिवार्य बनाया गया है। भारत-नेपाल की खुली सीमा और घनिष्ठ सांस्कृतिक-व्यापारिक संबंधों के मद्देनजर दोनों देशों के बीच आपदा-प्रतिक्रिया का एक स्थायी और स्वचालित तंत्र अभी भी अनुपस्थित दिखता है — यह खाई हर आपदा में उजागर होती है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल बाढ़ में कितने भारतीय नागरिकों को बचाया गया है?
29 अगस्त 2026 तक कुल 114 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचाया गया है। ये सभी 15 देशों के बचाए गए कुल 184 पर्यटकों में सर्वाधिक संख्या में हैं।
नेपाल में बाढ़ कहाँ और कब आई?
26 अगस्त 2026 को भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में भारी बाढ़ आई, जिससे रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और गोरखा जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए। लगातार भारी वर्षा, भूस्खलन और सड़क संपर्क टूटने से स्थिति और गंभीर हो गई।
अभी भी कितने पर्यटक लापता हैं?
29 अगस्त 2026 को दोपहर 1:30 बजे तक 420 पर्यटकों से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। तीन पर्यटक अधिकारियों के संपर्क में हैं और उनकी स्थिति की जानकारी ली जा रही है।
भारत सरकार नेपाल में फँसे नागरिकों की मदद के लिए क्या कर रही है?
विदेश मंत्रालय ने नेपाल बाढ़ के मद्देनजर एक 24 घंटे सक्रिय नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है। यह कक्ष प्रभावित भारतीय नागरिकों और उनके परिजनों को आवश्यक सहायता और जानकारी उपलब्ध कराने के लिए काम कर रहा है।
क्या नेपाल में यात्रा करना अभी सुरक्षित है?
काठमांडू-मुगलिंग सड़क मार्ग पूरी तरह चालू है और सामान्य आवाजाही बहाल हो चुकी है। रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और गोरखा के बाढ़-प्रभावित कुछ हिस्सों को छोड़कर देशभर का सड़क नेटवर्क सामान्य है, लेकिन यात्रियों से अपील की गई है कि वे स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करें।
राष्ट्र प्रेस
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