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घरेलू क्रिकेट में वर्षों की मेहनत, फिर भी टेस्ट टीम से दूर ये 5 भारतीय खिलाड़ी

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घरेलू क्रिकेट में वर्षों की मेहनत, फिर भी टेस्ट टीम से दूर ये 5 भारतीय खिलाड़ी

सारांश

फर्स्ट-क्लास में 8,396 रन, 423 विकेट, 269 विकेट — ये आँकड़े किसी भी चयनकर्ता को रोकने के लिए काफी हैं। फिर भी अभिमन्यु ईश्वरन, धर्मेंद्रसिंह जडेजा, शाहबाज अहमद, शम्स मुलानी और सरफराज खान टेस्ट टीम की परिधि पर खड़े हैं। BCCI की घरेलू-प्रथम नीति और चयन की हकीकत के बीच की यह खाई गहरी होती जा रही है।

मुख्य बातें

अभिमन्यु ईश्वरन ने 114 फर्स्ट-क्लास मैचों में 47 की औसत से 8,396 रन बनाए हैं; 27 शतक और 36 अर्धशतक के बावजूद पिछले तीन साल से टेस्ट डेब्यू का इंतजार।
धर्मेंद्रसिंह जडेजा के 100 फर्स्ट-क्लास मैचों में 423 विकेट ; 2013 से टेस्ट टीम में जगह की प्रतीक्षा — 13 वर्ष बाद भी कोई कैप नहीं।
शम्स मुलानी ने रणजी ट्रॉफी 2025-26 में 7 मैचों में 30 विकेट लिए; 59 फर्स्ट-क्लास मैचों में कुल 269 विकेट ।
शाहबाज अहमद के 43 फर्स्ट-क्लास मैचों में 146 विकेट और 2,493 रन ; भारत के लिए 3 वनडे और 2 टी20 खेले, टेस्ट कैप अभी तक नहीं।
सरफराज खान ने 2024 में टेस्ट डेब्यू किया, लेकिन दो वर्षों में मात्र 6 टेस्ट खेलने का मौका; फर्स्ट-क्लास औसत 64 ।

भारतीय टेस्ट क्रिकेट में चयन की राह घरेलू प्रदर्शन से होकर गुजरती है — यह सिद्धांत भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की नीति का आधार है। बोर्ड अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को भी खाली समय में घरेलू क्रिकेट में भाग लेने की हिदायत दे चुका है, और ईशान किशन तथा श्रेयस अय्यर जैसे नामों के खिलाफ इस नियम को लेकर सख्त कदम भी उठाए जा चुके हैं। लेकिन इस नीति का एक और पहलू है — कुछ खिलाड़ी ऐसे हैं जो वर्षों से रणजी ट्रॉफी और फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में शानदार आँकड़े दर्ज कर रहे हैं, फिर भी चयनकर्ताओं की नज़र उन पर नहीं पड़ रही।

मुख्य घटनाक्रम

घरेलू क्रिकेट को टेस्ट चयन का पैमाना बताने वाली BCCI की नीति के बावजूद, आँकड़ों के आधार पर कम से कम पाँच खिलाड़ी ऐसे हैं जो टेस्ट टीम में मौके के हकदार दिखते हैं। इनके फर्स्ट-क्लास रिकॉर्ड न केवल प्रभावशाली हैं, बल्कि कई बार टीम में चुने जाने वाले खिलाड़ियों से बेहतर भी हैं। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाता है जब भारतीय टेस्ट टीम बदलाव के दौर से गुजर रही है।

अभिमन्यु ईश्वरन — तीन साल से ड्रेसिंग रूम में इंतजार

अभिमन्यु ईश्वरन ने 114 फर्स्ट-क्लास मैचों में 47 की औसत से 8,396 रन बनाए हैं, जिनमें 27 शतक और 36 अर्धशतक शामिल हैं। 2013 में फर्स्ट-क्लास डेब्यू करने वाले ईश्वरन भारतीय ड्रेसिंग रूम तक तो पहुँच चुके हैं, लेकिन पिछले तीन वर्षों से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। अब उनकी उम्र 30 वर्ष हो चुकी है — और करियर की बेस्ट विंडो तेज़ी से सिकुड़ रही है।

धर्मेंद्रसिंह जडेजा — 13 साल, 423 विकेट, शून्य टेस्ट कैप

धर्मेंद्रसिंह जडेजा के आँकड़े किसी भी गेंदबाज़ को ईर्ष्या दिला सकते हैं — 100 फर्स्ट-क्लास मैचों में 423 विकेट, लिस्ट-ए में 121 विकेट और टी20 में 65 विकेट2013 में डेब्यू करने के बाद से वह पिछले 13 वर्षों से भारतीय टेस्ट टीम में जगह बनाने की प्रतीक्षा में हैं। घरेलू सर्किट में उनकी निरंतरता असाधारण है, फिर भी चयनकर्ताओं का ध्यान उनकी ओर नहीं गया है।

शाहबाज अहमद और शम्स मुलानी — ऑलराउंड प्रतिभा, सीमित अवसर

शाहबाज अहमद भारत के लिए 3 वनडे और 2 टी20 अंतरराष्ट्रीय खेल चुके हैं, लेकिन टेस्ट कैप अभी तक नहीं मिली। 43 फर्स्ट-क्लास मैचों में उन्होंने 146 विकेट लिए हैं और 2,493 रन बनाए हैं। दलीप ट्रॉफी 2026 में भी उनका प्रदर्शन ध्यान खींचने वाला रहा है।

मुंबई के स्टार ऑलराउंडर शम्स मुलानी ने 59 फर्स्ट-क्लास मैचों में 269 विकेट झटके हैं और 2,577 रन बनाए हैं। रणजी ट्रॉफी 2025-26 में उन्होंने 7 मैचों में 30 विकेट लिए — यानी प्रति मैच औसतन 4 से अधिक विकेट। इसके बावजूद वह चयनकर्ताओं के रडार पर नहीं आ सके।

सरफराज खान — डेब्यू के बाद भी अनिश्चितता

सरफराज खान ने 2024 में टेस्ट डेब्यू किया, लेकिन पिछले दो वर्षों में उन्हें केवल 6 टेस्ट मैच खेलने का अवसर मिला। जिन मैचों में उन्हें मौका मिला, उनमें भी उनका बल्लेबाजी क्रम लगातार बदलता रहा। फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में 64 की औसत से रन बनाने वाले सरफराज ने फिटनेस पर विशेष ध्यान देते हुए वजन भी कम किया है, लेकिन उनकी काबिलियत के अनुरूप मौके अभी तक नहीं मिले हैं।

आगे क्या

इन पाँचों खिलाड़ियों के आँकड़े इस सवाल को ज़ोर से उठाते हैं कि BCCI की घरेलू-प्रदर्शन-आधारित चयन नीति व्यवहार में कितनी सुसंगत है। जैसे-जैसे भारतीय टेस्ट टीम नए चक्र में प्रवेश करेगी, इन अनदेखे खिलाड़ियों का भविष्य चयन समिति की प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन धर्मेंद्रसिंह जडेजा के 13 साल और 423 विकेट इस दावे पर सवाल खड़े करते हैं। विरोधाभास यह है कि जिन खिलाड़ियों पर घरेलू क्रिकेट न खेलने के लिए कार्रवाई हुई, वे सुर्खियों में रहे — जबकि जो वर्षों से रन और विकेट बटोर रहे हैं, वे अदृश्य हैं। चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और 'नेटवर्क' बनाम 'नंबर' की राजनीति इन खिलाड़ियों के करियर की सबसे बड़ी बाधा बनती दिख रही है। जब तक चयन समिति अपने फैसलों का सार्वजनिक आधार नहीं बताती, घरेलू क्रिकेट को 'मेरिट का मंच' कहना महज़ एक नारा बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिमन्यु ईश्वरन का फर्स्ट-क्लास रिकॉर्ड क्या है?
अभिमन्यु ईश्वरन ने 114 फर्स्ट-क्लास मैचों में 47 की औसत से 8,396 रन बनाए हैं, जिनमें 27 शतक और 36 अर्धशतक शामिल हैं। 2013 में डेब्यू करने वाले ईश्वरन की उम्र 30 वर्ष हो चुकी है और वह पिछले तीन साल से टेस्ट डेब्यू का इंतजार कर रहे हैं।
धर्मेंद्रसिंह जडेजा को टेस्ट टीम में मौका क्यों नहीं मिला?
धर्मेंद्रसिंह जडेजा ने 100 फर्स्ट-क्लास मैचों में 423 विकेट लिए हैं और 2013 से घरेलू क्रिकेट में सक्रिय हैं, लेकिन 13 वर्षों में उन्हें एक भी टेस्ट कैप नहीं मिली। चयनकर्ताओं ने इस पर कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण नहीं दिया है।
शम्स मुलानी रणजी ट्रॉफी 2025-26 में कैसा प्रदर्शन किया?
शम्स मुलानी ने रणजी ट्रॉफी 2025-26 में 7 मैचों में 30 विकेट लिए। कुल मिलाकर 59 फर्स्ट-क्लास मैचों में उनके 269 विकेट और 2,577 रन हैं, जो उन्हें एक प्रभावशाली ऑलराउंडर के रूप में स्थापित करते हैं।
सरफराज खान को टेस्ट टीम में पर्याप्त मौके क्यों नहीं मिले?
सरफराज खान ने 2024 में टेस्ट डेब्यू किया, लेकिन दो वर्षों में केवल 6 टेस्ट मैच खेल सके। उनका बल्लेबाजी क्रम भी लगातार बदलता रहा, जिससे वह अपनी क्षमता नहीं दिखा पाए — जबकि फर्स्ट-क्लास में उनकी औसत 64 है।
BCCI की घरेलू क्रिकेट नीति क्या है?
BCCI ने अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को खाली समय में घरेलू क्रिकेट खेलने की हिदायत दी है और इसका पालन न करने पर ईशान किशन व श्रेयस अय्यर जैसे खिलाड़ियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए हैं। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि यह नीति उन खिलाड़ियों पर समान रूप से लागू नहीं होती जो वर्षों से घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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