घरेलू क्रिकेट में वर्षों की मेहनत, फिर भी टेस्ट टीम से दूर ये 5 भारतीय खिलाड़ी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय टेस्ट क्रिकेट में चयन की राह घरेलू प्रदर्शन से होकर गुजरती है — यह सिद्धांत भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की नीति का आधार है। बोर्ड अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को भी खाली समय में घरेलू क्रिकेट में भाग लेने की हिदायत दे चुका है, और ईशान किशन तथा श्रेयस अय्यर जैसे नामों के खिलाफ इस नियम को लेकर सख्त कदम भी उठाए जा चुके हैं। लेकिन इस नीति का एक और पहलू है — कुछ खिलाड़ी ऐसे हैं जो वर्षों से रणजी ट्रॉफी और फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में शानदार आँकड़े दर्ज कर रहे हैं, फिर भी चयनकर्ताओं की नज़र उन पर नहीं पड़ रही।
मुख्य घटनाक्रम
घरेलू क्रिकेट को टेस्ट चयन का पैमाना बताने वाली BCCI की नीति के बावजूद, आँकड़ों के आधार पर कम से कम पाँच खिलाड़ी ऐसे हैं जो टेस्ट टीम में मौके के हकदार दिखते हैं। इनके फर्स्ट-क्लास रिकॉर्ड न केवल प्रभावशाली हैं, बल्कि कई बार टीम में चुने जाने वाले खिलाड़ियों से बेहतर भी हैं। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाता है जब भारतीय टेस्ट टीम बदलाव के दौर से गुजर रही है।
अभिमन्यु ईश्वरन — तीन साल से ड्रेसिंग रूम में इंतजार
अभिमन्यु ईश्वरन ने 114 फर्स्ट-क्लास मैचों में 47 की औसत से 8,396 रन बनाए हैं, जिनमें 27 शतक और 36 अर्धशतक शामिल हैं। 2013 में फर्स्ट-क्लास डेब्यू करने वाले ईश्वरन भारतीय ड्रेसिंग रूम तक तो पहुँच चुके हैं, लेकिन पिछले तीन वर्षों से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। अब उनकी उम्र 30 वर्ष हो चुकी है — और करियर की बेस्ट विंडो तेज़ी से सिकुड़ रही है।
धर्मेंद्रसिंह जडेजा — 13 साल, 423 विकेट, शून्य टेस्ट कैप
धर्मेंद्रसिंह जडेजा के आँकड़े किसी भी गेंदबाज़ को ईर्ष्या दिला सकते हैं — 100 फर्स्ट-क्लास मैचों में 423 विकेट, लिस्ट-ए में 121 विकेट और टी20 में 65 विकेट। 2013 में डेब्यू करने के बाद से वह पिछले 13 वर्षों से भारतीय टेस्ट टीम में जगह बनाने की प्रतीक्षा में हैं। घरेलू सर्किट में उनकी निरंतरता असाधारण है, फिर भी चयनकर्ताओं का ध्यान उनकी ओर नहीं गया है।
शाहबाज अहमद और शम्स मुलानी — ऑलराउंड प्रतिभा, सीमित अवसर
शाहबाज अहमद भारत के लिए 3 वनडे और 2 टी20 अंतरराष्ट्रीय खेल चुके हैं, लेकिन टेस्ट कैप अभी तक नहीं मिली। 43 फर्स्ट-क्लास मैचों में उन्होंने 146 विकेट लिए हैं और 2,493 रन बनाए हैं। दलीप ट्रॉफी 2026 में भी उनका प्रदर्शन ध्यान खींचने वाला रहा है।
मुंबई के स्टार ऑलराउंडर शम्स मुलानी ने 59 फर्स्ट-क्लास मैचों में 269 विकेट झटके हैं और 2,577 रन बनाए हैं। रणजी ट्रॉफी 2025-26 में उन्होंने 7 मैचों में 30 विकेट लिए — यानी प्रति मैच औसतन 4 से अधिक विकेट। इसके बावजूद वह चयनकर्ताओं के रडार पर नहीं आ सके।
सरफराज खान — डेब्यू के बाद भी अनिश्चितता
सरफराज खान ने 2024 में टेस्ट डेब्यू किया, लेकिन पिछले दो वर्षों में उन्हें केवल 6 टेस्ट मैच खेलने का अवसर मिला। जिन मैचों में उन्हें मौका मिला, उनमें भी उनका बल्लेबाजी क्रम लगातार बदलता रहा। फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में 64 की औसत से रन बनाने वाले सरफराज ने फिटनेस पर विशेष ध्यान देते हुए वजन भी कम किया है, लेकिन उनकी काबिलियत के अनुरूप मौके अभी तक नहीं मिले हैं।
आगे क्या
इन पाँचों खिलाड़ियों के आँकड़े इस सवाल को ज़ोर से उठाते हैं कि BCCI की घरेलू-प्रदर्शन-आधारित चयन नीति व्यवहार में कितनी सुसंगत है। जैसे-जैसे भारतीय टेस्ट टीम नए चक्र में प्रवेश करेगी, इन अनदेखे खिलाड़ियों का भविष्य चयन समिति की प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगा।