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उत्तराखंड: जंगली सूअर, भालू और बंदरों से किसान परेशान, वन विभाग ने बनाई जानवर-वार रणनीति

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उत्तराखंड: जंगली सूअर, भालू और बंदरों से किसान परेशान, वन विभाग ने बनाई जानवर-वार रणनीति

सारांश

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में जंगली सूअर, भालू और बंदर किसानों की फसलें तबाह कर रहे हैं। वन विभाग ने जानवर-वार अलग रणनीति अपनाई है — भालू के लिए मिर्ची धुआं, सूअर-बंदर के लिए पटाखे, और 1,300 बंदर पकड़ने का लक्ष्य। फंड मिलते ही दीर्घकालिक योजना लागू होगी।

मुख्य बातें

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग सहित कई जिलों में जंगली सूअर, भालू, बंदर और गुलदार किसानों की फसलें नष्ट कर रहे हैं।
प्रभागीय वनाधिकारी विनीत कुमार मिश्रा ने अलग-अलग जानवरों के लिए अलग-अलग रणनीति अपनाने की बात कही।
किसानों को भालू भगाने के लिए मिर्ची का धुआं और सूअर-बंदर के लिए पटाखों का सुझाव दिया गया है।
वन विभाग ने इस वर्ष 1,300 बंदर पकड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जो काफी हद तक पूरा हो चुका है।
गुलदारों के लिए संवेदनशील स्थानों पर पिंजरे लगाए जा रहे हैं।
दीर्घकालिक योजना शीर्ष नेतृत्व से फंड मिलने पर लागू होगी; फिलहाल अल्पकालिक उपाय जारी हैं।

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग सहित कई जिलों में जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों ने किसानों की फसलें तबाह कर दी हैं। जंगली सूअर, भालू, बंदर और गुलदार खेतों में घुसकर फसलें नष्ट कर रहे हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब वन विभाग ने मोर्चा संभालते हुए अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों स्तरों पर ठोस कदम उठाने की तैयारी कर ली है।

मुख्य घटनाक्रम

रुद्रप्रयाग के प्रभागीय वनाधिकारी विनीत कुमार मिश्रा ने बताया कि उत्तराखंड के कई जिलों में जंगली जानवरों के कारण खेती करना मुश्किल हो चुका है। उन्होंने कहा, 'यह जंगली जानवर अपने आतंक से पूरी फसल खराब कर दे रहे हैं। इससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।' विभाग ने स्वीकार किया कि जंगली सूअर, बंदर और भालू इस समस्या के मुख्य कारण हैं।

वनाधिकारी मिश्रा के अनुसार, सभी जानवरों पर एक ही नीति काम नहीं करती। उन्होंने स्पष्ट किया, 'हमें अलग-अलग तरकीब अपनाने होंगे, तभी जाकर स्थिति सामान्य हो पाएगी।'

जानवर-वार रणनीति

भालुओं के संदर्भ में वनाधिकारी ने बताया कि ये पहाड़ों पर रहते हैं और रात के समय किसानों की फसलों पर हमला करते हैं। किसानों को सुझाव दिया गया है कि भालू दिखने पर मिर्ची का धुआं करें, जिससे वे भाग जाते हैं।

जंगली सूअर खेतों को सबसे अधिक नुकसान पहुँचा रहे हैं। विभाग ने सूअर और बंदरों को भगाने के लिए किसानों को पटाखे उपलब्ध कराए हैं। बंदरों की बढ़ती आबादी, विशेषकर मंदिरों और पर्यटक स्थलों के आसपास, को नियंत्रित करने के लिए विभाग ने 1,300 बंदरों को पकड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसे इसी वर्ष पूरा करने की बात कही गई है।

गुलदारों पर काबू पाने के लिए सभी संवेदनशील स्थानों पर पिंजरे (केज) लगाए जा रहे हैं, ताकि उन्हें पकड़ा जा सके।

फील्ड सर्वेक्षण और फंड की प्रतीक्षा

वन विभाग के अधिकारियों को फील्ड में भेजकर उन स्थानों को चिह्नित किया जा रहा है जहाँ से जंगली जानवर खेतों में प्रवेश करते हैं। वनाधिकारी मिश्रा ने माना कि जानवरों के व्यवहार और उनके आवागमन के स्रोत का पता लगाना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन विभाग इस दिशा में पूरी जानकारी जुटाने में लगा है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शीर्ष नेतृत्व से पर्याप्त फंड मिलते ही दीर्घकालिक योजनाओं को जमीन पर उतारा जाएगा। फिलहाल अल्पकालिक परियोजनाओं पर काम जारी है।

किसानों पर असर

यह समस्या उत्तराखंड के पहाड़ी किसानों के लिए नई नहीं है। गौरतलब है कि राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष वर्षों से एक गंभीर मुद्दा रहा है, जो पहाड़ी गाँवों से पलायन को और तेज करता है। फसल नष्ट होने से न केवल आजीविका प्रभावित होती है, बल्कि छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति और कमज़ोर होती है।

वन विभाग की सक्रियता से किसानों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। आने वाले महीनों में अल्पकालिक और दीर्घकालिक उपायों के धरातल पर उतरने के बाद ही इस रणनीति की वास्तविक सफलता का आकलन हो सकेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ठोस नीतिगत समाधान अब भी अधूरे हैं। वन विभाग की 'जानवर-वार रणनीति' सही दिशा में है, पर मिर्ची के धुएं और पटाखों जैसे अस्थायी उपाय दीर्घकालिक समाधान नहीं हैं। असली सवाल यह है कि फंड की प्रतीक्षा में दीर्घकालिक योजना कब तक लटकी रहेगी — और तब तक कितनी और फसलें बर्बाद होंगी। पहाड़ी गाँवों से पलायन की बड़ी वजहों में से एक यही मानव-वन्यजीव संघर्ष है, जिसे राज्य सरकार ने अब तक पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तराखंड में जंगली जानवरों से किसानों को क्या नुकसान हो रहा है?
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग सहित कई जिलों में जंगली सूअर, भालू, बंदर और गुलदार किसानों की खड़ी फसलें नष्ट कर रहे हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। भालू रात के समय खेतों पर हमला करते हैं, जबकि जंगली सूअर दिन में भी फसलें उजाड़ देते हैं।
वन विभाग ने जंगली जानवरों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
वन विभाग ने जानवर-वार अलग रणनीति अपनाई है — भालू भगाने के लिए किसानों को मिर्ची का धुआं करने की सलाह दी गई है, सूअर और बंदरों के लिए पटाखे उपलब्ध कराए गए हैं, और गुलदारों के लिए संवेदनशील स्थानों पर पिंजरे लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा विभाग के अधिकारी फील्ड में जाकर जानवरों के प्रवेश-स्थलों को चिह्नित कर रहे हैं।
उत्तराखंड में 1,300 बंदर पकड़ने का लक्ष्य क्यों रखा गया है?
मंदिरों और पर्यटक स्थलों के आसपास बंदरों की आबादी तेज़ी से बढ़ रही है और वे किसानों की फसलों को नुकसान पहुँचा रहे हैं। इसी को देखते हुए वन विभाग ने इस वर्ष 1,300 बंदर पकड़ने का लक्ष्य रखा है, जो काफी हद तक पूरा हो चुका है।
वन विभाग की दीर्घकालिक योजना कब लागू होगी?
प्रभागीय वनाधिकारी विनीत कुमार मिश्रा के अनुसार, शीर्ष नेतृत्व से पर्याप्त फंड मिलते ही दीर्घकालिक योजना को जमीन पर उतारा जाएगा। फिलहाल अल्पकालिक उपायों पर काम जारी है।
उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष की मुख्य वजह क्या है?
वनाधिकारियों के अनुसार, जंगली जानवरों का मानव बस्तियों और खेतों की ओर बढ़ता विचरण इस संघर्ष की मुख्य वजह है। जानवरों के व्यवहार और उनके आवागमन के स्रोत का पता लगाना विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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