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हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद: उत्तराखंड मंत्री खजान दास ने BJP का हाथ होने से किया इनकार

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हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद: उत्तराखंड मंत्री खजान दास ने BJP का हाथ होने से किया इनकार

सारांश

हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस रैली के बाद कथित शुद्धिकरण को लेकर उठे विवाद में उत्तराखंड मंत्री खजान दास ने BJP का हाथ होने से साफ इनकार किया। उन्होंने कहा कि शुद्धिकरण एक संस्था ने किया, BJP का कोई कार्यकर्ता शामिल नहीं था — और जाँच ने भी यही पुष्टि की।

मुख्य बातें

उत्तराखंड मंत्री खजान दास ने 29 अगस्त को कहा कि हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए कथित शुद्धिकरण से BJP का कोई संबंध नहीं है।
कथित शुद्धिकरण एक संस्था द्वारा किया गया था; जाँच में किसी BJP कार्यकर्ता की संलिप्तता नहीं पाई गई।
मंत्री ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के दौरान कथित तौर पर धर्म विशेष से जुड़े नारे लगाए जाने पर चिंता जताई।
कांग्रेस नेता यशपाल आर्य के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि उनके कार्यक्रमों के बाद शुद्धिकरण का कोई मामला नहीं उठा था।
राज्य सरकार ने सामाजिक वैमनस्य फैलाने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।

उत्तराखंड के मंत्री खजान दास ने 29 अगस्त को स्पष्ट किया कि हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली के बाद हुए कथित शुद्धिकरण से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने की अपील की।

विवाद की पृष्ठभूमि

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद रामलीला मैदान में कथित शुद्धिकरण की घटना सामने आई, जिसने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया। कांग्रेस ने इस कार्रवाई के लिए BJP को जिम्मेदार ठहराया। गौरतलब है कि यह मैदान पहले भी अनेक राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रमों का केंद्र रहा है।

मंत्री खजान दास का स्पष्टीकरण

मंत्री खजान दास ने कहा कि कथित शुद्धिकरण एक संस्था की ओर से किया गया था और इसमें BJP का कोई कार्यकर्ता शामिल नहीं था। उन्होंने बताया कि जाँच में भी किसी BJP कार्यकर्ता की संलिप्तता सामने नहीं आई। कांग्रेस के आरोपों को उन्होंने 'तर्कहीन और निराधार' बताया।

उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता यशपाल आर्य का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने भी इसी मैदान में कई कार्यक्रम आयोजित किए हैं, परंतु उस समय शुद्धिकरण का कोई मामला नहीं उठा — जो यह दर्शाता है कि यह विवाद राजनीति से प्रेरित है।

रैली के दौरान नारों पर चिंता

मंत्री ने कहा कि खड़गे की रैली के दौरान कथित तौर पर धर्म विशेष से जुड़े नारे लगाए गए, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी उत्पन्न हुई। उन्होंने एक मौलवी द्वारा कथित चुनौती दिए जाने का भी उल्लेख करते हुए इसे 'दुखद और चिंताजनक' बताया। उत्तराखंड को देवभूमि माना जाता है और यहाँ धार्मिक भावनाओं का सम्मान अनिवार्य है — यह उन्होंने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया।

सामाजिक सद्भाव पर सरकार का रुख

खजान दास ने कहा कि उत्तराखंड एक शांतिप्रिय राज्य है और सामाजिक सद्भाव बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। जो भी लोग समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने या धार्मिक भावनाओं को भड़काने का प्रयास करें, उनके विरुद्ध कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

आगे क्या

मंत्री ने सभी पक्षों से अपील की कि धार्मिक मुद्दों को राजनीतिक टकराव का माध्यम न बनाएँ और संयम बरतें। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाली गतिविधियाँ स्वीकार्य नहीं होंगी और कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उस जाँच की स्वतंत्रता और निष्कर्षों का कोई सार्वजनिक ब्यौरा नहीं दिया गया। रैली में नारों और मौलवी की 'चुनौती' का जिक्र यह भी संकेत देता है कि सत्तारूढ़ दल इस विवाद को केवल खारिज नहीं कर रहा, बल्कि उसे अपने पक्ष में पुनर्परिभाषित करने की कोशिश भी कर रहा है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद क्या है?
हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित तौर पर शुद्धिकरण किया गया, जिसे लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। कांग्रेस ने इसके लिए BJP को जिम्मेदार ठहराया, जबकि BJP ने किसी भी संलिप्तता से इनकार किया।
BJP ने शुद्धिकरण में अपनी भूमिका से क्यों इनकार किया?
उत्तराखंड मंत्री खजान दास ने कहा कि शुद्धिकरण एक संस्था ने किया था और जाँच में भी कोई BJP कार्यकर्ता शामिल नहीं पाया गया। उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को तर्कहीन और निराधार बताया।
रैली के दौरान नारों को लेकर क्या विवाद हुआ?
मंत्री खजान दास के अनुसार, खड़गे की रैली के दौरान कथित तौर पर धर्म विशेष से जुड़े नारे लगाए गए, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी उत्पन्न हुई। उन्होंने एक मौलवी द्वारा कथित चुनौती दिए जाने को भी 'दुखद और चिंताजनक' बताया।
उत्तराखंड सरकार ने सामाजिक सौहार्द पर क्या रुख अपनाया?
मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड एक शांतिप्रिय राज्य है और समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने या धार्मिक भावनाएँ भड़काने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताई गई।
यशपाल आर्य का उदाहरण क्यों दिया गया?
मंत्री खजान दास ने कांग्रेस नेता यशपाल आर्य का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने भी रामलीला मैदान में कई कार्यक्रम किए, लेकिन उस समय शुद्धिकरण का कोई मामला नहीं उठा। इससे उनका तर्क था कि वर्तमान विवाद राजनीति से प्रेरित है।
राष्ट्र प्रेस
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