14 अगस्त 2026
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हल्द्वानी में खड़गे के मंच के 'शुद्धिकरण' पर मायावती का कड़ा विरोध, उत्तराखंड सरकार से दोषियों को जेल भेजने की माँग

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हल्द्वानी में खड़गे के मंच के 'शुद्धिकरण' पर मायावती का कड़ा विरोध, उत्तराखंड सरकार से दोषियों को जेल भेजने की माँग

सारांश

हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे की रैली के बाद मंच के कथित 'शुद्धिकरण' की घटना अब संसद से सड़क तक गूँज रही है। BSP प्रमुख मायावती ने उत्तराखंड सरकार से तत्काल कार्रवाई की माँग करते हुए RSS प्रमुख को भी आड़े हाथों लिया — यह घटना जाति-आधारित भेदभाव की गहरी जड़ों को उजागर करती है।

मुख्य बातें

BSP अध्यक्ष मायावती ने हल्द्वानी में खड़गे की रैली के बाद कथित मंच 'शुद्धिकरण' को अति-निंदनीय बताया।
घटना 8 अगस्त की है, जब रामलीला मैदान में खड़गे की रैली के बाद कथित तौर पर शुद्धिकरण अनुष्ठान हुआ।
मामला संसद तक पहुँचा; राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष खड़गे ने स्वयं इसे उठाया।
मायावती ने उत्तराखंड सरकार से दोषियों को जेल भेजने और RSS प्रमुख से संज्ञान लेने की माँग की।
महाराष्ट्र के नांदेड़ में सुखबीर सिंह बादल पर हमले की घटना पर भी मायावती ने चिंता जताई और सख्त कार्रवाई की माँग की।

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित तौर पर मंच का 'शुद्धिकरण' किए जाने की घटना को 14 अगस्त 2026 को अति-निंदनीय और चिंतनीय करार दिया। उन्होंने उत्तराखंड सरकार से ऐसे जातिवादी और सामंती तत्वों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल जेल भेजने की माँग की।

मुख्य घटनाक्रम

8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे की रैली संपन्न होने के बाद कथित तौर पर मंच का 'शुद्धिकरण' अनुष्ठान किया गया, जिसकी वजह खड़गे का दलित समुदाय से होना बताई गई। यह मामला संसद तक पहुँचा, जहाँ राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में खड़गे ने स्वयं इस घटना पर सवाल उठाए।

खड़गे ने बिना किसी धर्म या समुदाय का नाम लिए कहा कि लोकतंत्र में किसी व्यक्ति के साथ उसकी सामाजिक या जातीय पहचान के आधार पर इस प्रकार का व्यवहार गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी प्रश्न किया कि क्या सार्वजनिक मंच पर ऐसी कार्रवाई संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का उदाहरण मानी जा सकती है।

मायावती की प्रतिक्रिया

मायावती ने शुक्रवार को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, 'उत्तराखंड राज्य के हल्द्वानी में अभी हाल ही में कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के हुए प्रोग्राम के बाद उनके मंच का दलित होने की वजह से शुद्धिकरण किया गया है। यह जानकारी कल संसद के जरिए भी देश को मिली है। यह मामला अति-निंदनीय और चिंतनीय है।'

उन्होंने आगे कहा, 'उत्तराखंड की सरकार बिना कोई देरी किए हुए ऐसे जातिवादी और सामंती तत्वों के विरुद्ध सख्त कानूनों के तहत उचित कार्रवाई करके उन्हें जेल भेजे।' साथ ही उन्होंने RSS प्रमुख से भी इस घटना का संज्ञान लेने की अपील की, यह देखते हुए कि वे दलितों में आर्थिक रूप से सक्षम हुए लोगों को आरक्षण से वंचित करने की बात कर रहे हैं।

नांदेड़ हमले पर भी जताई चिंता

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इसी पोस्ट में महाराष्ट्र के नांदेड़ में शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले की घटना पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'यह घटना भी अति-दुखद और चिंतनीय है।' उन्होंने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार से इस मामले को पूरी गंभीरता से लेते हुए दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करने की माँग की।

आम जनता पर असर

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देश में जातीय भेदभाव और दलित अधिकारों को लेकर बहस तेज़ है। गौरतलब है कि संसद के मंच से इस मुद्दे को उठाए जाने से यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया है। आलोचकों का कहना है कि सार्वजनिक स्थान पर इस तरह के अनुष्ठान संविधान की समता और गरिमा की भावना के विरुद्ध हैं।

क्या होगा आगे

मायावती की माँग के बाद अब सभी की नज़रें उत्तराखंड सरकार पर टिकी हैं कि वह इस कथित घटना में शामिल दोषियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई करती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी समय में दलित राजनीति और जाति-आधारित भेदभाव की बहस को और तीखा कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि उत्तराखंड सरकार कार्रवाई करती है या मामला फ़ाइलों में दब जाता है। गौरतलब है कि इस तरह की घटनाएँ बार-बार सुर्खियाँ बनती हैं, पर जवाबदेही अक्सर अधूरी रहती है। RSS प्रमुख को सीधे संबोधित करना मायावती की रणनीतिक चाल है — आरक्षण बहस और जाति-भेदभाव को एक ही फ्रेम में रखकर वे दलित मतदाताओं को एक स्पष्ट संदेश दे रही हैं।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हल्द्वानी में खड़गे के मंच का 'शुद्धिकरण' क्या था?
8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित तौर पर मंच का 'शुद्धिकरण' अनुष्ठान किया गया, जिसकी वजह खड़गे का दलित समुदाय से होना बताई गई। यह मामला बाद में संसद तक पहुँचा।
मायावती ने इस घटना पर क्या माँग की है?
BSP अध्यक्ष मायावती ने उत्तराखंड सरकार से ऐसे जातिवादी और सामंती तत्वों के विरुद्ध सख्त कानूनों के तहत तत्काल कार्रवाई करते हुए दोषियों को जेल भेजने की माँग की है। उन्होंने RSS प्रमुख से भी इस घटना का संज्ञान लेने की अपील की।
यह मामला संसद तक कैसे पहुँचा?
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्वयं संसद में इस घटना को उठाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी व्यक्ति के साथ उसकी जातीय पहचान के आधार पर ऐसा व्यवहार गंभीर चिंता का विषय है।
मायावती ने नांदेड़ घटना पर क्या कहा?
मायावती ने महाराष्ट्र के नांदेड़ में शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले को अति-दुखद और चिंतनीय बताया। उन्होंने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार से दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की माँग की।
इस घटना का दलित अधिकारों की बहस से क्या संबंध है?
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देश में आरक्षण और दलित अधिकारों पर बहस तेज़ है। मायावती ने RSS प्रमुख के उस बयान से इसे जोड़ा जिसमें आर्थिक रूप से सक्षम दलितों को आरक्षण से वंचित करने की बात कही गई थी, जिससे यह मुद्दा और व्यापक राजनीतिक संदर्भ में आ गया है।
राष्ट्र प्रेस
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