30 अगस्त 2026
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खड़गे की हल्द्वानी रैली के बाद 'शुद्धिकरण' विवाद: भोपाल में कांग्रेस ने SC/ST एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कराई

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खड़गे की हल्द्वानी रैली के बाद 'शुद्धिकरण' विवाद: भोपाल में कांग्रेस ने SC/ST एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कराई

सारांश

हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे की रैली के बाद कार्यक्रम स्थल पर कथित 'गंगाजल शुद्धिकरण' का विवाद मध्य प्रदेश पहुँच गया। भोपाल में कांग्रेस के SC विभाग ने SC/ST अधिनियम के तहत एफआईआर की माँग करते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई — और इसे छुआछूत की मानसिकता का खुला प्रदर्शन बताया।

मुख्य बातें

30 अगस्त को कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग ने भोपाल के एमपी नगर पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
विवाद हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद कार्यक्रम स्थल पर कथित गंगाजल छिड़काव से जुड़ा है।
कांग्रेस का आरोप है कि BJP से जुड़े लोगों ने मंच व मैदान पर 'शुद्धिकरण' की रस्म अदा की।
पार्टी ने SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत एफआईआर और जिम्मेदारों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की माँग की है।
भाजपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की हल्द्वानी (उत्तराखंड) में आयोजित जनसभा के बाद कार्यक्रम स्थल पर कथित तौर पर गंगाजल छिड़ककर 'शुद्धिकरण' किए जाने का विवाद अब मध्य प्रदेश तक फैल गया है। 30 अगस्त को राज्य कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भोपाल के एमपी नगर पुलिस स्टेशन पहुँचकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने की माँग की।

मुख्य घटनाक्रम

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि हल्द्वानी में खड़गे की जनसभा समाप्त होने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े कुछ लोग कार्यक्रम स्थल पर पहुँचे और मंच तथा मैदान पर गंगाजल छिड़का। कांग्रेस के अनुसार, इन लोगों ने इस कृत्य को 'स्थल-शुद्धि' की रस्म बताया।

पुलिस को दी गई लिखित शिकायत में शिकायतकर्ताओं ने कहा कि किसी नेता की रैली के बाद मंच या कार्यक्रम स्थल को इस तरह 'शुद्ध' करना सामाजिक रूप से आपत्तिजनक है और यह अनुसूचित जाति के सदस्यों के विरुद्ध छुआछूत एवं भेदभाव को बढ़ावा देता है।

कांग्रेस की माँगें

मध्य प्रदेश कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — भोपाल पुलिस द्वारा मामले की गहन जाँच, SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज करना, और इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई।

पार्टी ने इस हरकत को 'सामाजिक भेदभाव और छुआछूत की मानसिकता का प्रत्यक्ष प्रदर्शन' करार दिया है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब देश में जातिगत भेदभाव और दलित अधिकारों को लेकर राजनीतिक तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। गौरतलब है कि मल्लिकार्जुन खड़गे स्वयं दलित समुदाय से आते हैं और देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी के अध्यक्ष हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की घटनाएँ सार्वजनिक जीवन में जातिगत पूर्वग्रह की गहरी जड़ों को उजागर करती हैं।

भाजपा की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आगे क्या होगा

भोपाल पुलिस द्वारा शिकायत की जाँच किए जाने की उम्मीद है। यदि SC/ST अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज होती है, तो मामला और अधिक राजनीतिक तूल पकड़ सकता है। कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग ने संकेत दिया है कि यदि पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो वे आंदोलन को आगे बढ़ाएँगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

यदि सत्य है, तो यह संविधान के अनुच्छेद 17 के सीधे उल्लंघन का संकेत देती है। मुख्यधारा की कवरेज इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित कर देती है, लेकिन असली सवाल यह है कि SC/ST अधिनियम के दशकों बाद भी ऐसी घटनाओं की शिकायतें दर्ज कराने की नौबत क्यों आती है। पुलिस की प्रतिक्रिया और संभावित एफआईआर यह तय करेगी कि कानून का तंत्र वाकई काम करता है या नहीं।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हल्द्वानी में खड़गे की रैली के बाद 'शुद्धिकरण' विवाद क्या है?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की हल्द्वानी जनसभा समाप्त होने के बाद कथित तौर पर BJP से जुड़े कुछ लोग कार्यक्रम स्थल पर पहुँचे और मंच व मैदान पर गंगाजल छिड़का। कांग्रेस ने इसे जातिगत भेदभाव और छुआछूत की मानसिकता का प्रदर्शन बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
भोपाल में कांग्रेस ने किस कानून के तहत शिकायत दर्ज कराई है?
कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने की माँग करते हुए भोपाल के एमपी नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दी है। साथ ही जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की भी माँग की गई है।
इस मामले में भाजपा का क्या रुख है?
अभी तक भाजपा की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि यह कृत्य भाजपा से जुड़े लोगों ने किया, लेकिन भाजपा ने इन आरोपों की न पुष्टि की है और न ही खंडन।
यह मामला मध्य प्रदेश तक क्यों पहुँचा?
घटना उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुई, लेकिन मध्य प्रदेश कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर दलित अधिकारों से जुड़ा मुद्दा मानते हुए भोपाल में पुलिस शिकायत दर्ज कराई। पार्टी का कहना है कि यह घटना गहरी जातिगत पूर्वग्रह को दर्शाती है और देशभर में इस पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत क्या कार्रवाई हो सकती है?
इस अधिनियम के तहत अनुसूचित जाति या जनजाति के सदस्यों के विरुद्ध अपमान, भेदभाव या अत्याचार करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी और कठोर सजा का प्रावधान है। यदि पुलिस शिकायत में दर्ज आरोपों को संज्ञेय मानती है, तो संबंधित लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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