हल्द्वानी 'शुद्धिकरण' विवाद: पवन खेड़ा का BJP सरकार पर तंज — 'देखते हैं कब दर्ज होगी FIR'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने 30 अगस्त को नई दिल्ली में हल्द्वानी के तथाकथित 'शुद्धिकरण' विवाद पर उत्तराखंड की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अब तक इस मामले में कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई है। उन्होंने सरकार की निष्क्रियता पर तंज कसते हुए कहा कि वे प्रतीक्षा में हैं कि राज्य सरकार कब इस मामले में कार्रवाई करेगी।
मुख्य घटनाक्रम
खेड़ा ने कहा कि 'शुद्धिकरण' का वीडियो सभी ने अपनी आँखों से देखा है और इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में धर्म को अनावश्यक रूप से घसीटा जा रहा है, जबकि असली सवाल कानूनी कार्रवाई का है। उनके अनुसार, मामला तूल पकड़ने के बाद भी BJP सरकार यह तय नहीं कर पा रही कि आगे क्या कदम उठाए।
खड़गे अपमान प्रकरण पर प्रतिक्रिया
खेड़ा ने इस विवाद को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कथित अपमान से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि देश के एक वरिष्ठ नेता के साथ हुई इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या गृह मंत्री अमित शाह की ओर से निंदा का एक भी शब्द नहीं आया। उन्होंने इसे संविधान का अपमान करार दिया।
समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी के नेता राजकुमार भाटी ने इस प्रसंग को व्यापक संदर्भ में रखते हुए याद दिलाया कि वर्ष 2017 में जब सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपना सरकारी आवास खाली किया था, तब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उसे गंगाजल से धुलवाया था। भाटी ने कहा कि 21वीं सदी में भी ऐसी मानसिकता का होना चिंताजनक है जो पशुओं को देवता और इंसानों को हेय दृष्टि से देखती है।
संविधान और NDA पर खेड़ा का बयान
खेड़ा ने यह भी दावा किया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भागीदार दलों के भीतर भी यह आशंका बनी हुई है कि संविधान के साथ छेड़छाड़ हो सकती है। उन्होंने कहा कि BJP 240 सीटों पर रुक गई, अन्यथा वे संविधान को ही समाप्त कर देते — यह उनका आरोप था।
मन की बात पर टिप्पणी
खेड़ा ने प्रधानमंत्री मोदी के रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' पर भी टिप्पणी करते हुए दावा किया कि भारत बदल चुका है और अब लोग इस कार्यक्रम को पहले जैसी रुचि से नहीं सुनते। यह बयान उन्होंने बिना कोई आँकड़ा प्रस्तुत किए दिया। हल्द्वानी 'शुद्धिकरण' विवाद पर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ होती जा रही है और आने वाले दिनों में सरकार की कार्रवाई — या उसकी अनुपस्थिति — इस मुद्दे की दिशा तय करेगी।