30 अगस्त 2026
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नेपाल बाढ़ में 734 की मौत: पूर्व मंत्री का आरोप, चीन ने आपदा से पहले नहीं दी थी कोई चेतावनी

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नेपाल बाढ़ में 734 की मौत: पूर्व मंत्री का आरोप, चीन ने आपदा से पहले नहीं दी थी कोई चेतावनी

सारांश

नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई ग्लेशियर आपदा में 734 मौतें और 2,498 लापता — और अब पूर्व मंत्री का सीधा आरोप कि चीन ने समय पर चेतावनी नहीं दी। साथ ही दावा कि चीन आपदा के वीडियो अपने प्लेटफॉर्म से हटवा रहा है। यह त्रासदी हिमालयी क्षेत्र में पारदर्शी आपदा-सूचना तंत्र की जरूरत को रेखांकित करती है।

मुख्य बातें

26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई बाढ़ और भूस्खलन में अब तक 734 लोगों की मौत हो चुकी है।
2,498 लोग अभी भी लापता या संपर्क से बाहर हैं, जिनमें 589 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
पूर्व मंत्री माधव प्रसाद चौलागाईं ने आरोप लगाया कि चीन ने आपदा से पहले नेपाल को कोई समय पर अलर्ट नहीं दिया।
चौलागाईं ने चीन के उस दावे को खारिज किया कि ग्लेशियर ध्वंस नेपाल की सीमा में शुरू हुआ; उनके अनुसार यह तिब्बत में शुरू हुआ।
एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार, चीन तिब्बत बाढ़ से जुड़े वीडियो अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटवा रहा है।
नेपाल की चेतावनी प्रणाली ग्लेशियल लेक्स पर केंद्रित थी, जबकि यह आपदा बर्फ-चट्टान गिरने से हुई — एक अप्रत्याशित परिदृश्य।

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन में अब तक 734 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 2,498 लोग अभी भी लापता या संपर्क से बाहर हैं। नेपाल के पूर्व वन एवं पर्यावरण मंत्री माधव प्रसाद चौलागाईं ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इस त्रासदी से पहले चीन की ओर से नेपाल को कोई समय पर चेतावनी नहीं दी गई थी। नेपाल राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, लापता लोगों में 589 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

मुख्य घटनाक्रम

बुधवार सुबह नेपाल-तिब्बत सीमा पर बर्फ, चट्टानों और मलबे का विशाल प्रवाह अचानक आया। ग्लेशियर के टूटने से उत्पन्न मिट्टी, चट्टानों और पानी का यह सैलाब ल्हेंडे खोला से होते हुए भोटे कोशी और त्रिशूली नदी तंत्र में पहुँचा, जिससे सीमा क्षेत्र में व्यापक तबाही मची। सुरक्षा कैमरों की फुटेज में देखा गया कि ग्यिरोंग पोर्ट पर मिट्टी और मलबे की एक विशाल लहर इमारतों पर टूट पड़ी, जबकि लोग अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे थे।

चीन पर आरोप: 'मानवता के खिलाफ'

पूर्व मंत्री चौलागाईं ने एक मीडिया संस्थान से बातचीत में कहा कि नेपाल को चीन की ओर से कोई समय पर अलर्ट नहीं मिला। उन्होंने इस महत्वपूर्ण जानकारी को साझा न किए जाने को 'मानवता के खिलाफ' बताया। चीन के उस दावे को भी उन्होंने सिरे से खारिज किया जिसमें कहा गया था कि ग्लेशियर का ध्वंस नेपाल की सीमा के भीतर शुरू हुआ था। चौलागाईं के अनुसार, यह आपदा तिब्बत में शुरू हुई थी।

उन्होंने कहा, 'स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है' और मामले में अधिक पारदर्शिता की माँग की। साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि इस त्रासदी ने योजना और तैयारी से जुड़ी बड़ी खामियों को भी उजागर किया है।

चेतावनी प्रणाली की खामियाँ उजागर

चौलागाईं के अनुसार, नेपाल की शुरुआती चेतावनी प्रणाली और जलविद्युत परियोजनाओं के लिए किए जाने वाले पर्यावरणीय प्रभाव आकलन मुख्य रूप से ग्लेशियल लेक्स (ग्लेशियर झीलों) पर केंद्रित थे। लेकिन यह त्रासदी बर्फ और चट्टानों के गिरने तथा ग्लेशियर से पोषित नदी तंत्र के ध्वस्त होने से जुड़ी थी — एक ऐसा परिदृश्य जिसकी पहले कभी कल्पना नहीं की गई थी। गौरतलब है कि यह घटना जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी ग्लेशियरों पर बढ़ते खतरे की ओर भी ध्यान दिलाती है।

चीनी सोशल मीडिया से वीडियो हटाने के आरोप

एक अंतरराष्ट्रीय अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन तिब्बत में आई इस विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से जुड़े वीडियो अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटवा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ आने के कुछ ही घंटों के भीतर आपदा के वीडियो चीनी सोशल मीडिया पर प्रसारित होने लगे थे, जिन्हें बाद में अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों ने भी सत्यापित किया। एक भूटानी पत्रकार के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि हटाई जा रही यह सामग्री किसी राजनीतिक विरोध की नहीं, बल्कि प्राकृतिक आपदा की फुटेज थी।

क्या होगा आगे

यह त्रासदी नेपाल और चीन के बीच आपदा-पूर्व सूचना साझाकरण के तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते जलवायु जोखिमों के मद्देनजर दोनों देशों के बीच एक मजबूत और पारदर्शी प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली की तत्काल आवश्यकता है। नेपाल सरकार से अपेक्षा है कि वह इस मुद्दे को राजनयिक स्तर पर उठाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

बाध्यकारी प्रारंभिक चेतावनी प्रोटोकॉल नहीं है — और यह त्रासदी उस अनुपस्थिति की कीमत दर्शाती है। चीन द्वारा वीडियो हटाने के आरोप, यदि सत्य हैं, तो पारदर्शिता की उस कमी को और गहरा करते हैं जो पहले से ही इस आपदा की प्रतिक्रिया पर छाई हुई है। असली सवाल यह है कि क्या नेपाल इस मुद्दे को बीजिंग के साथ राजनयिक स्तर पर उठाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति रखता है, या आर्थिक निर्भरता एक बार फिर जवाबदेही पर भारी पड़ेगी।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल बाढ़ 2026 में कितनी मौतें हुई हैं?
नेपाल राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, 26 अगस्त को आई इस आपदा में अब तक 734 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 2,498 लोग अभी भी लापता या संपर्क से बाहर हैं, जिनमें 589 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
चीन पर नेपाल बाढ़ को लेकर क्या आरोप लगे हैं?
पूर्व वन एवं पर्यावरण मंत्री माधव प्रसाद चौलागाईं ने आरोप लगाया है कि चीन ने आपदा से पहले नेपाल को कोई समय पर चेतावनी नहीं दी। उन्होंने इसे 'मानवता के खिलाफ' बताया और चीन के उस दावे को भी खारिज किया कि ग्लेशियर ध्वंस नेपाल की सीमा के भीतर शुरू हुआ था।
नेपाल बाढ़ की शुरुआत कहाँ से हुई?
पूर्व मंत्री चौलागाईं के अनुसार, यह आपदा तिब्बत में शुरू हुई। ग्लेशियर के टूटने से मिट्टी, चट्टानों और पानी का सैलाब ल्हेंडे खोला से होते हुए भोटे कोशी और त्रिशूली नदी तंत्र में पहुँचा, जिससे नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में व्यापक तबाही हुई।
चीन पर तिब्बत बाढ़ के वीडियो हटाने का आरोप क्यों लगा?
एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन तिब्बत में आई बाढ़ से जुड़े वीडियो अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटवा रहा है। एक भूटानी पत्रकार के हवाले से कहा गया कि यह सामग्री प्राकृतिक आपदा की फुटेज थी, न कि किसी राजनीतिक विरोध की।
नेपाल की चेतावनी प्रणाली इस आपदा में क्यों विफल रही?
चौलागाईं के अनुसार, नेपाल की प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली मुख्यतः ग्लेशियल लेक्स (ग्लेशियर झीलों) पर केंद्रित थी। यह त्रासदी बर्फ और चट्टानों के गिरने तथा ग्लेशियर-पोषित नदी तंत्र के ध्वस्त होने से हुई — एक ऐसा परिदृश्य जिसे पहले कभी इस प्रणाली में शामिल नहीं किया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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