नेपाल बाढ़ में 734 की मौत: पूर्व मंत्री का आरोप, चीन ने आपदा से पहले नहीं दी थी कोई चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन में अब तक 734 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 2,498 लोग अभी भी लापता या संपर्क से बाहर हैं। नेपाल के पूर्व वन एवं पर्यावरण मंत्री माधव प्रसाद चौलागाईं ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इस त्रासदी से पहले चीन की ओर से नेपाल को कोई समय पर चेतावनी नहीं दी गई थी। नेपाल राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, लापता लोगों में 589 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
मुख्य घटनाक्रम
बुधवार सुबह नेपाल-तिब्बत सीमा पर बर्फ, चट्टानों और मलबे का विशाल प्रवाह अचानक आया। ग्लेशियर के टूटने से उत्पन्न मिट्टी, चट्टानों और पानी का यह सैलाब ल्हेंडे खोला से होते हुए भोटे कोशी और त्रिशूली नदी तंत्र में पहुँचा, जिससे सीमा क्षेत्र में व्यापक तबाही मची। सुरक्षा कैमरों की फुटेज में देखा गया कि ग्यिरोंग पोर्ट पर मिट्टी और मलबे की एक विशाल लहर इमारतों पर टूट पड़ी, जबकि लोग अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे थे।
चीन पर आरोप: 'मानवता के खिलाफ'
पूर्व मंत्री चौलागाईं ने एक मीडिया संस्थान से बातचीत में कहा कि नेपाल को चीन की ओर से कोई समय पर अलर्ट नहीं मिला। उन्होंने इस महत्वपूर्ण जानकारी को साझा न किए जाने को 'मानवता के खिलाफ' बताया। चीन के उस दावे को भी उन्होंने सिरे से खारिज किया जिसमें कहा गया था कि ग्लेशियर का ध्वंस नेपाल की सीमा के भीतर शुरू हुआ था। चौलागाईं के अनुसार, यह आपदा तिब्बत में शुरू हुई थी।
उन्होंने कहा, 'स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है' और मामले में अधिक पारदर्शिता की माँग की। साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि इस त्रासदी ने योजना और तैयारी से जुड़ी बड़ी खामियों को भी उजागर किया है।
चेतावनी प्रणाली की खामियाँ उजागर
चौलागाईं के अनुसार, नेपाल की शुरुआती चेतावनी प्रणाली और जलविद्युत परियोजनाओं के लिए किए जाने वाले पर्यावरणीय प्रभाव आकलन मुख्य रूप से ग्लेशियल लेक्स (ग्लेशियर झीलों) पर केंद्रित थे। लेकिन यह त्रासदी बर्फ और चट्टानों के गिरने तथा ग्लेशियर से पोषित नदी तंत्र के ध्वस्त होने से जुड़ी थी — एक ऐसा परिदृश्य जिसकी पहले कभी कल्पना नहीं की गई थी। गौरतलब है कि यह घटना जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी ग्लेशियरों पर बढ़ते खतरे की ओर भी ध्यान दिलाती है।
चीनी सोशल मीडिया से वीडियो हटाने के आरोप
एक अंतरराष्ट्रीय अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन तिब्बत में आई इस विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से जुड़े वीडियो अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटवा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ आने के कुछ ही घंटों के भीतर आपदा के वीडियो चीनी सोशल मीडिया पर प्रसारित होने लगे थे, जिन्हें बाद में अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों ने भी सत्यापित किया। एक भूटानी पत्रकार के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि हटाई जा रही यह सामग्री किसी राजनीतिक विरोध की नहीं, बल्कि प्राकृतिक आपदा की फुटेज थी।
क्या होगा आगे
यह त्रासदी नेपाल और चीन के बीच आपदा-पूर्व सूचना साझाकरण के तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते जलवायु जोखिमों के मद्देनजर दोनों देशों के बीच एक मजबूत और पारदर्शी प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली की तत्काल आवश्यकता है। नेपाल सरकार से अपेक्षा है कि वह इस मुद्दे को राजनयिक स्तर पर उठाए।