वित्त मंत्री सीतारमण का दावा: वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की GDP वृद्धि 7% या उससे अधिक रहेगी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 30 अगस्त 2026 को शिकागो में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि भारत वित्त वर्ष 2026-27 में 7 प्रतिशत या उससे अधिक की आर्थिक वृद्धि दर हासिल करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोविड-19 महामारी के बाद से बनी विकास की गति को वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद बनाए रखा जाएगा।
वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत का रुख
सीतारमण ने कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से उत्पन्न भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं तथा आपूर्ति-श्रृंखला में आई रुकावटों के बावजूद भारत अपनी विकास दर बनाए रखने में सक्षम रहा है। उन्होंने कहा, 'वैश्विक अनिश्चितताओं पर लगातार नज़र रखने और भारत की अपनी ज़रूरतों को समझने की वजह से हम मुश्किल हालात में भी डटे रहे, जबकि कई देश पूरी तरह परेशान हैं और उनके हिसाब-किताब गड़बड़ा गए हैं।'
यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष सहित कई वैश्विक संस्थाएँ उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए वृद्धि अनुमान घटा रही हैं।
कच्चे तेल और उर्वरक आपूर्ति पर असर
वित्त मंत्री ने बताया कि मध्य पूर्व संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट से शुरुआत में कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित हुई। हालाँकि, भारत ने आपूर्ति का वैकल्पिक मार्ग अपनाकर स्थिति को संभाल लिया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कीमतें तेज़ी से बढ़ने के बावजूद सरकार ने किसानों के लिए उर्वरक की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं और सब्सिडी जारी रखी है।
सीतारमण ने आश्वस्त किया कि आगामी रबी सीज़न के लिए नवंबर से उर्वरक की आवश्यकता होगी और देश के पास पर्याप्त भंडार उपलब्ध है।
विदेशी पूंजी और निवेश पर ज़ोर
वित्त मंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था विस्तार पा रही है, सरकार सुधारों को जारी रखेगी और विशेष रूप से विदेशों से अधिक पूंजी आकर्षित करने की कोशिश करेगी। उन्होंने स्वीकार किया कि सरकार के पूंजीगत व्यय पर जोर देने के बाद निजी निवेश तो बढ़ा है, लेकिन देश की बढ़ती पूंजी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय निवेश भी अनिवार्य है।
उन्होंने कहा, 'हमारी महत्वाकांक्षाओं के लिए पूंजी की ज़रूरत है। इसीलिए कनाडा और अमेरिका की यात्रा के दौरान मैं, अन्य मंत्री और स्वयं प्रधानमंत्री — सभी वैश्विक फंड्स से बातचीत कर रहे हैं।'
द्विपक्षीय समझौते और जापान निवेश
सीतारमण ने बताया कि भारत कई देशों के साथ द्विपक्षीय निवेश संधि और द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जापान का दौरा किया, जहाँ उन्होंने 2035 तक 6,000 करोड़ डॉलर का निवेश जुटाने पर ज़ोर दिया।
भारत की यह कूटनीतिक-आर्थिक सक्रियता ऐसे समय में है जब वैश्विक आपूर्ति-श्रृंखलाओं का पुनर्गठन हो रहा है और बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ नए निवेश गंतव्यों की तलाश में हैं।
आगे की राह
वित्त मंत्री की अमेरिकी यात्रा वैश्विक फंड्स और निवेशकों से संवाद के उद्देश्य से की गई है। आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, 7% की वृद्धि दर बनाए रखना तब और अहम हो जाता है जब भू-राजनीतिक दबाव वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर रहे हों। भारत की आगामी नीतिगत दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि वैश्विक अनिश्चितताएँ किस रूप में आकार लेती हैं।