वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बयान: वित्त वर्ष 26 का राजकोषीय घाटा रहेगा संशोधित अनुमानों के अनुरूप

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बयान: वित्त वर्ष 26 का राजकोषीय घाटा रहेगा संशोधित अनुमानों के अनुरूप

सारांश

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में कहा है कि वित्त वर्ष 26 के लिए राजकोषीय घाटा संशोधित अनुमानों के अनुसार रहेगा। उन्होंने सरकार की प्रतिबद्धता और अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भी प्रकाश डाला।

मुख्य बातें

राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 26 के लिए संशोधित अनुमानों के अनुसार रहेगा।
कोविड-19 के बाद की अर्थव्यवस्था में मजबूती आई है।
इकोनॉमिक स्टेबलाइजेशन फंड वैश्विक संकटों का सामना करने में मदद करेगा।
सरकार राजकोषीय अनुशासन के प्रति प्रतिबद्ध है।
पश्चिम एशिया में तनाव भारत के लिए चुनौतियाँ पैदा कर रहा है।

नई दिल्ली, 13 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को लोकसभा में स्पष्ट किया कि सरकार वित्त वर्ष 26 के लिए राजकोषीय घाटे को संशोधित अनुमानों के अनुसार बनाए रखेगी।

संसद में सीतारमण ने यह भी कहा कि अतिरिक्त खर्च के प्रस्तावों के बावजूद, राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 27 के बजट में निर्धारित संशोधित लक्ष्य के अनुरूप रहेगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि सरकार राजकोषीय अनुशासन और समेकन के प्रति प्रतिबद्ध है।

वित्त मंत्री ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद उठाए गए कदमों के कारण देश की अर्थव्यवस्था में मजबूती आई है, और वैश्विक झटकों के बावजूद राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने की क्षमता बढ़ी है।

उन्होंने इकोनॉमिक स्टेबलाइजेशन फंड का प्रस्ताव रखा, जो वैश्विक आर्थिक झटकों का सामना करने के लिए अतिरिक्त राजकोषीय क्षमता प्रदान करेगा।

सीतारमण ने बताया कि यह फंड अप्रत्याशित वैश्विक संकटों, जैसे कि आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान और अन्य बाहरी झटकों से निपटने के लिए सरकार को राजकोषीय हेडरूम प्रदान करेगा।

इस फंड का उद्देश्य वैश्विक अनिश्चितता की अवधि के दौरान अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखना है।

वित्त मंत्री ने कहा कि अप्रत्याशित घटनाओं की आशंका में सरकार आर्थिक स्थिरीकरण के उपायों को तैयार कर रही है।

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष पर उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव भारत के लिए चुनौतियां उत्पन्न कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार इन परिस्थितियों से निपटने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

सीतारमण ने आगे कहा कि सरकार संभावित चुनौतियों, जैसे कि आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं का सामना करने के लिए तत्पर है।

उन्होंने कहा कि भारत का मजबूत व्यापक आर्थिक ढांचा राजकोषीय स्थिरता को बनाकर रखते हुए बाहरी झटकों का सामना करने में सक्षम बनाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजकोषीय घाटा क्या है?
राजकोषीय घाटा वह स्थिति है जब सरकार के खर्चे उसकी आय से अधिक होते हैं।
इकोनॉमिक स्टेबलाइजेशन फंड का क्या महत्व है?
यह फंड वैश्विक आर्थिक संकटों के दौरान अर्थव्यवस्था को स्थिर करने में मदद करेगा।
क्या भारत की अर्थव्यवस्था कोविड-19 के बाद मजबूत हुई है?
हां, वित्त मंत्री के अनुसार, कोविड-19 के बाद उठाए गए कदमों से अर्थव्यवस्था में मजबूती आई है।
पश्चिम एशिया का तनाव भारत को कैसे प्रभावित कर रहा है?
इस तनाव से भारत को आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और ऊर्जा आपूर्ति में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार के आर्थिक स्थिरीकरण उपाय क्या हैं?
सरकार अप्रत्याशित घटनाओं के लिए आर्थिक स्थिरीकरण के उपाय तैयार कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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