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क्या वित्त वर्ष 2027 में भारत का राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.2 प्रतिशत रहेगा? : मॉर्गन स्टेनली

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क्या वित्त वर्ष 2027 में भारत का राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.2 प्रतिशत रहेगा? : मॉर्गन स्टेनली

सारांश

भारत के वित्त वर्ष 2027 के लिए राजकोषीय घाटे का अनुमान 4.2% है, यह पहले के 4.4% से कम है। इसमें सरकार के कर्ज का भी कमी आ रही है। जानिए इस रिपोर्ट में क्या कुछ और खास है!

मुख्य बातें

राजकोषीय घाटा 4.2% रहने की उम्मीद है।
सरकारी कर्ज घटकर 55.1% हो सकता है।
सरकार खर्च में कमी पर ध्यान दे रही है।
टैक्स कलेक्शन में सुधार की संभावना है।
बाजार बजट के बाद उतार-चढ़ाव में रह सकता है।

नई दिल्ली, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आगामी केंद्रीय बजट में अनुमानित है कि वित्त वर्ष 2027 के लिए केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.2 प्रतिशत रहेगा। यह वित्त वर्ष 2026 के 4.4 प्रतिशत के मुकाबले कम होगा।

मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे देश का कुल सरकारी कर्ज भी घटकर जीडीपी का 55.1 प्रतिशत रह सकता है, जो वर्ष 2026 में 56.1 प्रतिशत था।

रिपोर्ट के अनुसार, सरकार धीरे-धीरे खर्च और घाटे को कम करने की दिशा में कार्यरत है, जिससे देश का कर्ज नियंत्रित रह सके।

मॉर्गन स्टेनली ने बताया कि नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ से टैक्स कलेक्शन में सुधार होगा, जिससे सरकार को वर्ष 2027 में टैक्स से अधिक आय प्राप्त होगी और वह बुनियादी ढांचे तथा सामाजिक सुविधाओं पर ज्यादा खर्च कर सकेगी।

सरकार का मुख्य ध्यान पूंजीगत खर्च, रोजगार सृजन, सामाजिक क्षेत्र पर लक्षित खर्च और संरचनात्मक सुधारों को आगे बढ़ाने पर रहेगा।

बजट का शेयर बाजार पर प्रभाव अब पहले की तुलना में कम होता जा रहा है। हालांकि, बाजार की असली चाल बजट से पहले की उम्मीदों पर निर्भर करती है।

मॉर्गन स्टेनली ने कहा कि इस समय बाजार बजट को लेकर थोड़ी सतर्कता दिखा रहा है। बजट के बाद बाजार में उतार-चढ़ाव के साथ-साथ तेजी की संभावना भी बनी हुई है।

बाजट में देखने योग्य प्रमुख बातें - राजकोषीय सुदृढ़ीकरण, पूंजीगत खर्च और क्षेत्रस्तरीय फैसले होंगी।

रिपोर्ट में खासतौर पर पूंजी बाजार सुधारों पर ध्यान देने की बात कही गई है, जिससे विदेशी निवेशकों को भारत में दोबारा निवेश करने के लिए प्रोत्साहन मिल सके।

ब्रोकरेज फर्म ने वित्तीय क्षेत्र, उपभोक्ता वस्तुओं और औद्योगिक कंपनियों को निवेश के लिए बेहतर बताया है।

रिपोर्ट के अनुसार, सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले सरकारी बॉंड की शुद्ध मात्रा लगभग 11.6 लाख करोड़ रुपए रह सकती है, जो पिछले वर्ष के लगभग बराबर है।

हालांकि, वित्त वर्ष 2027 में कुल सरकारी बॉंड जारी करने की मात्रा बढ़कर 15.8 ट्रिलियन रुपए (वित्त वर्ष 2026 में 11.5 ट्रिलियन रुपए) हो सकती है, क्योंकि इस बार पुराने बॉंड का भुगतान ज्यादा है।

ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो सरकारी बॉंड बाजार में कुछ समय के लिए तेजी आ सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर टैरिफ और भू-राजनीति से संबंधित वैश्विक अनिश्चितता विदेशी मांग पर दबाव डाल रही है, लेकिन देश की घरेलू मांग जीडीपी वृद्धि को आगे बढ़ाएगी।

रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2025 की तिमाही के ताजा आर्थिक आंकड़े मजबूत रहे हैं। इससे साफ होता है कि भारत की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में घरेलू खपत की बड़ी भूमिका रहेगी।

इसके साथ ही सरकार और रिजर्व बैंक की नीतियों, लोगों की बढ़ती खरीद क्षमता और बेहतर रोजगार स्थिति से उपभोग में लगातार सुधार बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो देश की आर्थिक स्थिरता को दर्शाता है। यह नीति न केवल कर्ज को नियंत्रित करने में मदद करेगी, बल्कि भविष्य में विकास की संभावनाओं को भी बढ़ाएगी।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का राजकोषीय घाटा क्या है?
राजकोषीय घाटा उस राशि को कहते हैं जो सरकार की आय से अधिक होती है, जिससे कर्ज लेना पड़ता है।
क्यों महत्वपूर्ण है राजकोषीय घाटा?
राजकोषीय घाटा सरकार की वित्तीय स्थिति को दर्शाता है और यह आर्थिक विकास पर प्रभाव डाल सकता है।
क्या भारत का कर्ज सुरक्षित है?
भारत का कर्ज नियंत्रित तरीके से बढ़ रहा है, जिससे यह सुरक्षित माना जा सकता है।
सरकार का क्या खर्च में कमी पर ध्यान है?
सरकार खर्च में कमी और अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने के लिए विभिन्न नीतियों पर काम कर रही है।
बाजार पर बजट का क्या असर होता है?
बजट का बाजार पर प्रभाव होता है, लेकिन यह मुख्यतः बजट से पहले की उम्मीदों पर निर्भर करता है।
राष्ट्र प्रेस
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