सोना-चांदी-प्लैटिनम पर सीमा शुल्क संग्रह ₹10,463 करोड़ पार, 13 मई से 2 अगस्त के बीच का आँकड़ा संसद में पेश
सारांश
मुख्य बातें
कीमती धातुओं पर आयात शुल्क बढ़ाए जाने के बाद 13 मई से 2 अगस्त 2026 के बीच सोने, चांदी और प्लैटिनम के आयात पर सरकार ने कुल ₹10,463 करोड़ का सीमा शुल्क संग्रह किया है। यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार, 10 अगस्त को लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में दी।
धातुवार संग्रह का विवरण
मंत्री चौधरी के अनुसार, इस अवधि में सोने से सर्वाधिक ₹10,040 करोड़ का सीमा शुल्क प्राप्त हुआ। चांदी से ₹328 करोड़ और प्लैटिनम से ₹95 करोड़ का संग्रह हुआ, जिससे तीनों धातुओं का संयुक्त आँकड़ा ₹10,463 करोड़ पर पहुँचा।
शुल्क बढ़ोतरी के तहत 13 मई से सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया गया, जबकि प्लैटिनम पर यह 6.4% से बढ़ाकर 15.4% किया गया। इसके साथ ही सोने-चांदी के डोरे, सिक्के और फाइंडिंग्स पर भी संबंधित शुल्क में बदलाव किए गए।
सरकार का उद्देश्य
वित्त राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय कीमती धातुओं के आयात पर अंकुश लगाने और विदेशी मुद्रा को कच्चे तेल, उर्वरक, औद्योगिक कच्चे माल तथा पूंजीगत वस्तुओं जैसी आवश्यक वस्तुओं के आयात के लिए प्राथमिकता देने के उद्देश्य से लिया गया था।
यह ऐसे समय में आया जब वैश्विक अनिश्चितताओं — विशेषकर पश्चिम एशिया में संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट की प्रभावी नाकेबंदी — के कारण कच्चे तेल के साथ-साथ खाद्य और उर्वरक आयात की कीमतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई थी।
तस्करी पर कार्रवाई
चौधरी ने सदन को यह भी बताया कि 13 मई से 30 जून के बीच प्रवर्तन एजेंसियों ने 161 किलोग्राम तस्करी का सोना जब्त किया और 116 लोगों को गिरफ्तार किया। यह आँकड़ा संकेत देता है कि शुल्क वृद्धि के बाद अवैध मार्गों से सोने की आवक बढ़ी, जिस पर सरकार की नज़र बनी रही।
भारत और सोने की खपत
गौरतलब है कि चीन के बाद भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। यहाँ सोने का आयात मुख्यतः आभूषण क्षेत्र की माँग को पूरा करने के लिए किया जाता है। सोने का आयात विदेशी मुद्रा के महत्वपूर्ण बहिर्वाह का कारण बनता है, इसलिए भुगतान संतुलन के दृष्टिकोण से नीति-निर्माता इसकी बारीकी से निगरानी करते हैं।
आगे की राह
शुल्क वृद्धि के बाद राजस्व संग्रह के ये आँकड़े यह दर्शाते हैं कि सरकार की नीति का वित्तीय असर अपेक्षाओं के अनुरूप रहा है। हालांकि, आभूषण उद्योग के प्रतिनिधियों की ओर से उच्च शुल्क दरों को लेकर चिंताएँ जताई जाती रही हैं। आने वाले महीनों में सरकार यह समीक्षा कर सकती है कि क्या यह नीति विदेशी मुद्रा दबाव को कम करने में पर्याप्त रूप से सफल रही।