सोना ₹1,57,611 प्रति 10 ग्राम, चांदी ₹2,66,213 प्रति किलो; 26 मई को धातुओं में तेज गिरावट
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में 26 मई 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,246 की कमजोरी के साथ ₹1,57,611 प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जो पहले ₹1,58,857 प्रति 10 ग्राम था। वहीं चांदी में ₹4,887 की बड़ी गिरावट आई और इसका भाव ₹2,66,213 प्रति किलो पर फिसल गया।
सोने के विभिन्न कैरेट के दाम
22 कैरेट सोने की कीमत ₹1,45,513 से घटकर ₹1,44,372 प्रति 10 ग्राम हो गई। 18 कैरेट सोने का भाव ₹1,19,143 से कम होकर ₹1,18,208 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। IBJA प्रतिदिन दो बार सोने और चांदी की कीमतें जारी करता है, जो घरेलू बाज़ार में मानक संदर्भ माना जाता है।
MCX पर वायदा कारोबार में भी दबाव
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी दोनों धातुओं में बिकवाली का दबाव रहा। सोने के 5 जून 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का भाव 0.69 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹1,57,989 पर रहा। चांदी के 3 जुलाई 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में 1.96 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज हुई और यह ₹2,71,285 पर बंद हुआ।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में मिला-जुला रुख
वैश्विक स्तर पर कारोबार मिला-जुला रहा। कॉमेक्स पर सोना 0.05 प्रतिशत की मामूली कमजोरी के साथ $4,552 प्रति औंस पर था, जबकि चांदी 0.56 प्रतिशत की बढ़त के साथ $76.62 प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ारों में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और व्यापक आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
LKP Securities के विश्लेषक जतिन त्रिवेदी के अनुसार, सोने की कीमतों में गिरावट की मुख्य वजह कच्चे तेल की अस्थिरता और वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में निवेशकों की निगाहें अमेरिका के महंगाई और GDP डेटा पर टिकी रहेंगी, जो सोने की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
त्रिवेदी ने तकनीकी स्तरों पर भी रोशनी डाली — उनके अनुसार सोने के लिए ₹1,57,000 पर मजबूत सपोर्ट है, जबकि ₹1,61,000 के करीब प्रमुख रुकावट का स्तर है। गौरतलब है कि हाल के हफ्तों में सोना ऐतिहासिक ऊंचाइयों के करीब पहुंचने के बाद मुनाफावसूली के दबाव में है।
निवेशकों के लिए आगे क्या
बाज़ार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के आने के बाद सोने और चांदी की दिशा अधिक स्पष्ट होगी। घरेलू बाज़ार में मौजूदा गिरावट उन निवेशकों के लिए एक अवसर के रूप में देखी जा रही है जो लंबी अवधि के लिए धातुओं में निवेश करना चाहते हैं।