सोने का भाव ₹1,56,072 प्रति 10 ग्राम; चांदी ₹5,296 सस्ती होकर ₹2,60,917 पर — लगातार दूसरी गिरावट
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में 27 मई 2026 को सोने और चांदी के बाज़ार में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,539 की कमज़ोरी के साथ घटकर ₹1,56,072 प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि चांदी की कीमत ₹5,296 लुढ़ककर ₹2,60,917 प्रति किलो रह गई।
सोने की विभिन्न शुद्धता में भाव
IBJA के मुताबिक, 24 कैरेट सोना पहले ₹1,57,611 प्रति 10 ग्राम पर था, जो अब ₹1,56,072 पर आ गया है। 22 कैरेट सोने का दाम ₹1,44,372 से घटकर ₹1,42,962 प्रति 10 ग्राम हो गया। 18 कैरेट सोने की कीमत भी ₹1,18,208 से कम होकर ₹1,17,054 प्रति 10 ग्राम पर पहुँच गई।
गौरतलब है कि IBJA सोने और चांदी के भाव दिन में दो बार जारी करता है, जो देशभर के ज्वेलर्स और निवेशकों के लिए बेंचमार्क का काम करते हैं।
चांदी बाज़ार में भारी दबाव
चांदी की कीमत में बुधवार को तीव्र गिरावट रही। ₹2,66,213 प्रति किलो से लुढ़ककर यह ₹2,60,917 प्रति किलो पर आ गई — यानी एक ही दिन में ₹5,296 की कमज़ोरी। औद्योगिक धातु के रूप में चांदी की माँग वैश्विक आर्थिक संकेतों के प्रति अधिक संवेदनशील मानी जाती है।
वायदा बाज़ार में भी कमज़ोरी
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 जून 2026 का सोने का कॉन्ट्रैक्ट 1.32 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹1,55,530 पर था। 3 जुलाई 2026 का चांदी का कॉन्ट्रैक्ट 2.26 प्रतिशत कमज़ोर होकर ₹2,64,509 पर रहा।
हाजिर और वायदा — दोनों बाज़ारों में एक साथ दबाव यह संकेत देता है कि यह गिरावट तकनीकी नहीं, बल्कि मौलिक कारणों से प्रेरित है।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार का रुख
वैश्विक स्तर पर भी धातुओं पर दबाव रहा। COMEX पर खबर लिखे जाने तक सोना 1.59 प्रतिशत की गिरावट के साथ $4,462 प्रति औंस और चांदी 2.83 प्रतिशत कमज़ोर होकर $74.44 प्रति औंस पर थी। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक निवेशकों की नज़र अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर टिकी है।
आगे क्या होगा
जानकारों के अनुसार, निवेशक अमेरिका के महंगाई और जीडीपी डेटा का इंतज़ार कर रहे हैं, जो 28 मई को अमेरिकी समयानुसार सुबह 8:30 बजे जारी होने की उम्मीद है। इन आंकड़ों के आधार पर ही सोने-चांदी की आगे की दिशा तय होगी। यदि महंगाई के आंकड़े अनुमान से अधिक आए, तो फेडरल रिज़र्व की नीति को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है, जिसका असर सीधे कीमती धातुओं पर पड़ेगा।