सोना ₹1,47,800 और चांदी ₹2,42,582 प्रति किलो पर पहुंची, तीन दिन की गिरावट के बाद बड़ी वापसी
सारांश
मुख्य बातें
सोने और चांदी की कीमतों में शुक्रवार, 12 जून 2026 को तीन दिनों की लगातार गिरावट के बाद जोरदार वापसी दर्ज की गई। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने का भाव ₹3,018 की छलांग के साथ ₹1,47,800 प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव करीब ₹10,000 की बढ़त के साथ ₹2,42,582 प्रति किलो पर जा पहुंचा। इस उछाल की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबरें बताई जा रही हैं।
सोने के सभी कैरेट में तेजी
IBJA के मुताबिक, 24 कैरेट सोना पहले ₹1,44,782 प्रति 10 ग्राम पर था, जो अब ₹1,47,800 प्रति 10 ग्राम हो गया है। 22 कैरेट सोने का दाम ₹1,32,620 से बढ़कर ₹1,35,385 प्रति 10 ग्राम पर पहुंचा। 18 कैरेट सोने का भाव ₹1,08,587 से उठकर ₹1,10,850 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। गौरतलब है कि IBJA दिन में दो बार सोने-चांदी की कीमतें जारी करता है, जो घरेलू बाजार में मानक संदर्भ मानी जाती हैं।
चांदी में करीब ₹10,000 की उछाल
चांदी की कीमत में यह तेजी और भी उल्लेखनीय रही। ₹2,32,591 प्रति किलो से बढ़कर भाव ₹2,42,582 प्रति किलो पर आ गया — यानी एक ही दिन में ₹9,991 की बढ़त। यह बढ़त प्रतिशत के लिहाज से भी सोने से अधिक रही, जो औद्योगिक धातुओं की मांग में सुधार का संकेत देती है।
वायदा बाजार में भी रौनक
हाजिर बाजार के साथ-साथ मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी तेजी देखी गई। सोने का 30 जून 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 0.49 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹1,49,655 पर और चांदी का 24 जून 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 0.70 प्रतिशत की तेजी के साथ ₹2,41,329 पर कारोबार कर रहा था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर COMEX पर सोना 2.22 प्रतिशत चढ़कर $4,205 प्रति औंस और चांदी 4.04 प्रतिशत की बढ़त के साथ $66.58 प्रति औंस पर थी।
अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद से बाजार में जोश
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, इस तेजी के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबरें प्रमुख कारण हैं। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी मेहर की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाना, हॉर्मुज स्ट्रेट से अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी समाप्त करना और ईरान के चारों ओर अमेरिकी सेना के घेराव को खत्म करना शामिल है।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ होने वाली डील 'करीब पूरी होने वाली है' और इसे यूरोप में सप्ताहांत के दौरान हस्ताक्षरित किया जा सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीद में निवेशक सुरक्षित संपत्तियों से थोड़ा बाहर आ रहे हैं — हालांकि, सोने की मांग में कोई बड़ी कमी नहीं आई है।
आगे क्या उम्मीद
यदि अमेरिका-ईरान समझौता वास्तव में हस्ताक्षरित होता है, तो भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम में कमी आने से सोने पर कुछ दबाव संभव है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू मांग और वैश्विक मुद्रास्फीति की चिंताओं के चलते कीमतें ऊंचे स्तर पर टिकी रह सकती हैं। निवेशकों की नजर अब सप्ताहांत की कूटनीतिक गतिविधियों पर टिकी है।