सोना लगातार दूसरे दिन सस्ता, 24 कैरेट ₹1,48,093 पर; चांदी ₹7,497 टूटकर ₹2,40,191 प्रति किलो
सारांश
मुख्य बातें
सोने और चांदी की कीमतों में 18 जून 2026 को लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आँकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोना ₹2,055 सस्ता होकर ₹1,48,093 प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि चांदी ₹7,497 की गिरावट के साथ ₹2,40,191 प्रति किलो पर बंद हुई। अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की नीतिगत घोषणा के बाद वैश्विक बुलियन बाज़ार में आई तेज़ बिकवाली को इस गिरावट की मुख्य वजह माना जा रहा है।
सोने के विभिन्न कैरेट के भाव
IBJA के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का भाव पिछले ₹1,50,148 से घटकर ₹1,48,093 प्रति 10 ग्राम हो गया। 22 कैरेट सोना ₹1,37,536 से कम होकर ₹1,35,653 प्रति 10 ग्राम पर आया। 18 कैरेट सोने का दाम ₹1,12,611 से घटकर ₹1,11,070 प्रति 10 ग्राम रह गया।
वायदा बाज़ार में भी दबाव
हाजिर बाज़ार के साथ-साथ वायदा बाज़ार में भी बिकवाली का दबाव रहा। 5 अगस्त 2026 के सोने के कॉन्ट्रैक्ट में 2.62 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ भाव ₹1,49,845 पर था। 3 जुलाई 2026 का चांदी कॉन्ट्रैक्ट 5.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹2,38,654 पर कारोबार कर रहा था।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार का रुख
वैश्विक स्तर पर भी धातुओं में दबाव स्पष्ट था। खबर लिखे जाने तक COMEX पर सोना 2.75 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ $4,260 प्रति औंस और चांदी 5.99 प्रतिशत की गिरावट के साथ $66 प्रति औंस पर थी। यह गिरावट वैश्विक निवेशकों की बदलती धारणा को दर्शाती है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
एसकेपी सिक्योरिटीज के विश्लेषक जतिन त्रिवेदी ने कहा कि फेडरल रिज़र्व की नीतिगत घोषणा के बाद बुलियन में भारी गिरावट देखी गई। उन्होंने बताया कि नए फेड चेयरमैन केविन वॉर्श की टिप्पणियों से संकेत मिला कि यदि अमेरिकी अर्थव्यवस्था मज़बूत बनी रही, तो 2026 में ब्याज दरों में एक बार बढ़ोतरी हो सकती है। त्रिवेदी ने आगे कहा कि हाल की भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद, फेड के आकलन में स्थिर आर्थिक विकास और मज़बूत लेबर मार्केट की बात कही गई, जिससे डॉलर मज़बूत हुआ और बुलियन की कीमतों पर दबाव बढ़ा।
आगे क्या
गौरतलब है कि सोने की कीमतें इस साल ऊँचे स्तरों से लौटी हैं, और फेड की आक्रामक नीति के संकेत निकट भविष्य में और दबाव बना सकते हैं। बाज़ार विशेषज्ञों की नज़र अब अमेरिकी आर्थिक आँकड़ों और फेड के अगले संकेतों पर टिकी है, जो घरेलू बुलियन बाज़ार की दिशा तय करेंगे।