18 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मायावती का UPI शुल्क पर हमला: 15 अक्टूबर से आमजन की जेब पर पड़ेगा बोझ, स्मार्ट स्कूल से पहले बुनियाद सुधारो

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मायावती का UPI शुल्क पर हमला: 15 अक्टूबर से आमजन की जेब पर पड़ेगा बोझ, स्मार्ट स्कूल से पहले बुनियाद सुधारो

सारांश

मायावती ने एक्स पर सिलसिलेवार पोस्ट में 15 अक्टूबर से लागू UPI शुल्क को 'पूंजीवादी मुनाफाखोरी' करार दिया और UP के 14,500 स्कूलों की स्मार्ट योजना को ₹2 लाख प्रति स्कूल के बजट में अव्यावहारिक बताया — जनता की बुनियादी ज़रूरतें पहले पूरी हों, डिजिटल चकाचौंध बाद में।

मुख्य बातें

BSP अध्यक्ष मायावती ने 18 सितंबर 2026 को एक्स पर केंद्र व राज्य सरकार पर दोहरा हमला बोला।
15 अक्टूबर से लागू होने वाली UPI शुल्क व्यवस्था को उन्होंने 'दोनों हाथों से कर वसूली' बताया।
उत्तर प्रदेश की ₹300 करोड़ की स्मार्ट स्कूल योजना में 14,429 परिषदीय विद्यालय शामिल हैं।
मायावती के अनुसार प्रति स्कूल करीब ₹2 लाख के बजट में बुनियादी सुविधाएं देना संदिग्ध है।
उन्होंने सरकार की नीति को 'कल्याणकारी' की बजाय 'व्यावसायिक' करार दिया।

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने 18 सितंबर 2026 को केंद्र और राज्य सरकार पर दोहरा हमला बोला — एक ओर 15 अक्टूबर से लागू होने वाली नई UPI शुल्क व्यवस्था को 'जनता की जेब काटने' की नीति बताया, तो दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के 14,429 परिषदीय विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल बनाने की ₹300 करोड़ की योजना को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में अधूरा कदम करार दिया। मायावती ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर सिलसिलेवार पोस्ट के ज़रिये ये प्रहार किए।

UPI शुल्क पर मायावती का तीखा विरोध

मायावती ने कहा कि UPI डिजिटल लेनदेन को पहले जमकर प्रोत्साहित करने के बाद अब उस पर शुल्क वसूलना 'मुनाफाखोरी के पूंजीवादी रवैये' के तहत जनता से दोनों हाथों से कर वसूली है। उनके अनुसार, इस व्यवस्था को सरकार चाहे जो नाम दे, 15 अक्टूबर से लागू होने के बाद बोझ अंततः आम जनता की जेब पर ही पड़ेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि भले ही सरकार इसे औपचारिक रूप से 'कर' नहीं मान रही, लेकिन व्यावहारिक असर वही है। यह ऐसे समय में आया है जब देश की बहुसंख्यक आबादी गरीबी और महंगाई की दोहरी मार झेल रही है।

सरकार की नीति पर सवाल

मायावती ने तर्क दिया कि सरकार की नीति और कार्ययोजना 'लाभ कमाने वाली व्यावसायिक' की बजाय 'कल्याणकारी' अधिक होनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'जनता की तंगी और दुख-तकलीफ की अगर सरकार चिंता नहीं करेगी तो फिर कौन करेगा?' — यह पंक्ति उनकी पोस्ट का केंद्रीय भाव रही।

गौरतलब है कि UPI पर शुल्क का मुद्दा विपक्ष और उपभोक्ता संगठनों दोनों के लिए संवेदनशील है, क्योंकि देश में डिजिटल भुगतान अपनाने की दर तेज़ी से बढ़ी है और करोड़ों उपभोक्ता छोटे-छोटे लेनदेन के लिए UPI पर निर्भर हैं।

स्मार्ट स्कूल योजना पर उठाए सवाल

उत्तर प्रदेश सरकार की ₹300 करोड़ की लागत से करीब 14,500 स्कूलों को 'स्मार्ट स्कूल' बनाने की घोषणा को मायावती ने सैद्धांतिक रूप से अच्छा बताया, लेकिन इसके क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्न उठाए। उनका कहना था कि डिजिटल शिक्षा से पहले बच्चों के लिए छत, बेंच, कुर्सी, किताब, शौचालय, खेल का मैदान और साफ-सफाई जैसी बुनियादी ज़रूरतें पूरी होनी चाहिए।

मायावती ने आर्थिक व्यवहार्यता पर सीधा सवाल उठाया कि प्रति विद्यालय करीब ₹2 लाख के बजट में ये सब सुविधाएं सुनिश्चित करना संभव है या नहीं — इस पर सरकार को 'सहानुभूतिपूर्वक विचार' करना चाहिए।

आम जनता और बच्चों पर असर

यह बहस ऐसे समय में उठी है जब उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नामांकन और बुनियादी ढाँचे को लेकर पहले से ही चिंताएं व्यक्त होती रही हैं। आलोचकों का कहना है कि तकनीक-आधारित पहल तब तक प्रभावी नहीं होती जब तक भौतिक बुनियाद मजबूत न हो।

UPI शुल्क के मोर्चे पर, विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे व्यापारी और ग्रामीण उपभोक्ता — जो कम मूल्य के लेनदेन करते हैं — इस बदलाव से सबसे अधिक प्रभावित होंगे। आने वाले हफ्तों में सरकार की ओर से इस पर स्पष्टीकरण और संभावित राहत उपायों की प्रतीक्षा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों मुद्दे मध्यवर्गीय और निम्न-आय वर्ग के मतदाताओं को सीधे छूते हैं, जो BSP का परंपरागत आधार रहा है। लेकिन असली सवाल यह है कि UPI शुल्क की संरचना वास्तव में कितनी पारदर्शी है — सरकार ने अभी तक स्पष्ट नहीं किया कि किस श्रेणी के लेनदेन पर, कितना शुल्क और किसे वहन करना होगा। स्मार्ट स्कूल मोर्चे पर प्रति विद्यालय ₹2 लाख का आँकड़ा वाकई चिंताजनक है — शौचालय निर्माण अकेले इससे अधिक खर्चीला हो सकता है। विपक्ष की आलोचना तब अधिक प्रभावी होती जब वह ठोस वैकल्पिक नीति प्रस्ताव भी रखे; फिलहाल यह घोषणा-आधारित राजनीति की परिचित लय है।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

15 अक्टूबर से UPI पर कौन सा नया शुल्क लागू होने वाला है?
15 अक्टूबर 2026 से एक नई UPI शुल्क व्यवस्था लागू होने की बात कही जा रही है, जिसके तहत डिजिटल लेनदेन पर शुल्क वसूला जा सकता है। मायावती ने इसे आम जनता के खर्च पर अतिरिक्त बोझ बताया है।
मायावती ने UPI शुल्क का विरोध क्यों किया?
मायावती का कहना है कि पहले UPI को खूब बढ़ावा दिया गया और अब उस पर शुल्क लगाना 'पूंजीवादी मुनाफाखोरी' है। उनके अनुसार यह आम और गरीब जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ाएगा जो पहले से महंगाई से त्रस्त है।
UP स्मार्ट स्कूल योजना में क्या है और मायावती को क्या आपत्ति है?
उत्तर प्रदेश सरकार ने करीब 14,429-14,500 परिषदीय विद्यालयों को ₹300 करोड़ की लागत से स्मार्ट स्कूल बनाने की घोषणा की है। मायावती का कहना है कि प्रति स्कूल करीब ₹2 लाख के बजट में छत, शौचालय, बेंच-कुर्सी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी देना संदिग्ध है, डिजिटल उपकरण बाद की बात है।
मायावती के इन बयानों का राजनीतिक मतलब क्या है?
BSP अध्यक्ष मायावती ने ये बयान एक्स पर सिलसिलेवार पोस्ट के ज़रिये दिए, जो उनकी UPI और शिक्षा जैसे जन-जीवन से जुड़े मुद्दों पर केंद्र व UP सरकार को घेरने की कोशिश है। यह BSP के पारंपरिक निम्न-आय और बहुजन मतदाता आधार को संबोधित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
UPI शुल्क से सबसे ज़्यादा कौन प्रभावित होगा?
विशेषज्ञों के अनुसार छोटे व्यापारी, रेहड़ी-पटरी वाले और ग्रामीण उपभोक्ता — जो बड़ी संख्या में कम मूल्य के UPI लेनदेन करते हैं — सबसे अधिक प्रभावित होंगे। शहरी मध्यवर्गीय उपभोक्ताओं पर भी रोज़मर्रा की खरीदारी में असर पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. कल
  3. 4 सप्ताह पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले