टिहरी गढ़वाल में मां चंद्रबदनी मंदिर: 2277 मीटर ऊंचाई पर श्री यंत्र की होती है पूजा
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में समुद्र तल से लगभग 2277 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मां चंद्रबदनी मंदिर शक्ति उपासना का एक प्रमुख केंद्र है, जहाँ देवी की मूर्ति के स्थान पर श्री यंत्र की पूजा की जाती है। यह मंदिर कुंजापुरी और सुरकंडा के बाद टिहरी का तीसरा प्रमुख शक्ति पीठ माना जाता है।
मंदिर की विशेषता और मान्यता
मंदिर के गर्भगृह में माता सती को समर्पित यह धाम पुराणों की मान्यता के अनुसार वह स्थान है जहाँ माता सती का धड़ गिरा था। उस समय कुछ त्रिशूल और मूर्तियाँ भी यहाँ गिरी थीं, और आज भी मंदिर के आस-पास त्रिशूल तथा माता की प्रतिमाएं देखी जाती हैं।
गर्भगृह में स्थापित श्री यंत्र को एक कपड़े के छत्र के नीचे रखा गया है। मंदिर के पुजारी और श्रद्धालु इसी यंत्र की उपासना कर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इसके अतिरिक्त परिसर में अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियाँ भी स्थापित हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने किया मंदिर का उल्लेख
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर मंदिर का एक विशेष वीडियो साझा करते हुए लिखा, 'जनपद टिहरी गढ़वाल में मां चंद्रबदनी मंदिर है, जो शक्ति पूजा का एक बड़ा केंद्र है। यहाँ आस्था, प्रकृति और दिव्यता का अनोखा संगम देखने को मिलता है। चारों ओर फैली हिमालय की शानदार पहाड़ियाँ इस जगह को एक अलग ही दुनिया जैसा एहसास देती हैं। यहाँ हर पल आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।'
धामी ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे टिहरी गढ़वाल की यात्रा के दौरान इस पवित्र धाम में अवश्य दर्शन करें।
प्राकृतिक सौंदर्य और हिमालय का विहंगम दृश्य
इस ऊंचाई पर स्थित होने के कारण मंदिर से केदारनाथ और बद्रीनाथ की बर्फ से ढकी पर्वत चोटियों के साथ-साथ घने जंगलों का अत्यंत मनोरम दृश्य दिखाई देता है। यह प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक वातावरण का दुर्लभ संगम भक्तों को गहरी शांति का अनुभव कराता है।
कैसे पहुंचें मां चंद्रबदनी मंदिर
यह मंदिर टिहरी के जामनीखाल गाँव में स्थित है और श्रीनगर से लगभग 52 किमी तथा टिहरी से करीब 57 किमी की दूरी पर है। मंदिर तक पहुँचने के लिए लगभग 1 किमी का पैदल ट्रेक करना होता है। हरे-भरे वन और पर्वतीय मार्ग इस यात्रा को सुखद एवं यादगार बनाते हैं।
आस्था, प्रकृति और पौराणिक महत्व का यह अनुपम धाम उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर एक विशिष्ट स्थान रखता है, और आने वाले समय में इस क्षेत्र में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की पूरी संभावना है।