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टिहरी गढ़वाल में मां चंद्रबदनी मंदिर: 2277 मीटर ऊंचाई पर श्री यंत्र की होती है पूजा

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टिहरी गढ़वाल में मां चंद्रबदनी मंदिर: 2277 मीटर ऊंचाई पर श्री यंत्र की होती है पूजा

सारांश

टिहरी गढ़वाल की 2277 मीटर ऊंची पहाड़ियों पर बसा मां चंद्रबदनी मंदिर अनूठा इसलिए है क्योंकि यहाँ देवी मूर्ति नहीं, बल्कि श्री यंत्र की पूजा होती है। पौराणिक मान्यता, हिमालय का विहंगम दृश्य और मुख्यमंत्री धामी की अपील — यह धाम उत्तराखंड की आस्था का जीवंत प्रतीक है।

मुख्य बातें

मां चंद्रबदनी मंदिर , टिहरी गढ़वाल , समुद्र तल से 2277 मीटर की ऊंचाई पर जामनीखाल गाँव में स्थित है।
गर्भगृह में देवी मूर्ति के स्थान पर श्री यंत्र की उपासना की जाती है, जो इस मंदिर को विशिष्ट बनाता है।
यह कुंजापुरी और सुरकंडा के बाद टिहरी का तीसरा शक्ति पीठ माना जाता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर वीडियो साझा कर श्रद्धालुओं को यहाँ दर्शन के लिए आमंत्रित किया।
मंदिर श्रीनगर से 52 किमी और टिहरी से 57 किमी दूर है; अंतिम 1 किमी पैदल ट्रेक से तय होता है।

उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में समुद्र तल से लगभग 2277 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मां चंद्रबदनी मंदिर शक्ति उपासना का एक प्रमुख केंद्र है, जहाँ देवी की मूर्ति के स्थान पर श्री यंत्र की पूजा की जाती है। यह मंदिर कुंजापुरी और सुरकंडा के बाद टिहरी का तीसरा प्रमुख शक्ति पीठ माना जाता है।

मंदिर की विशेषता और मान्यता

मंदिर के गर्भगृह में माता सती को समर्पित यह धाम पुराणों की मान्यता के अनुसार वह स्थान है जहाँ माता सती का धड़ गिरा था। उस समय कुछ त्रिशूल और मूर्तियाँ भी यहाँ गिरी थीं, और आज भी मंदिर के आस-पास त्रिशूल तथा माता की प्रतिमाएं देखी जाती हैं।

गर्भगृह में स्थापित श्री यंत्र को एक कपड़े के छत्र के नीचे रखा गया है। मंदिर के पुजारी और श्रद्धालु इसी यंत्र की उपासना कर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इसके अतिरिक्त परिसर में अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियाँ भी स्थापित हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने किया मंदिर का उल्लेख

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर मंदिर का एक विशेष वीडियो साझा करते हुए लिखा, 'जनपद टिहरी गढ़वाल में मां चंद्रबदनी मंदिर है, जो शक्ति पूजा का एक बड़ा केंद्र है। यहाँ आस्था, प्रकृति और दिव्यता का अनोखा संगम देखने को मिलता है। चारों ओर फैली हिमालय की शानदार पहाड़ियाँ इस जगह को एक अलग ही दुनिया जैसा एहसास देती हैं। यहाँ हर पल आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।'

धामी ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे टिहरी गढ़वाल की यात्रा के दौरान इस पवित्र धाम में अवश्य दर्शन करें।

प्राकृतिक सौंदर्य और हिमालय का विहंगम दृश्य

इस ऊंचाई पर स्थित होने के कारण मंदिर से केदारनाथ और बद्रीनाथ की बर्फ से ढकी पर्वत चोटियों के साथ-साथ घने जंगलों का अत्यंत मनोरम दृश्य दिखाई देता है। यह प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक वातावरण का दुर्लभ संगम भक्तों को गहरी शांति का अनुभव कराता है।

कैसे पहुंचें मां चंद्रबदनी मंदिर

यह मंदिर टिहरी के जामनीखाल गाँव में स्थित है और श्रीनगर से लगभग 52 किमी तथा टिहरी से करीब 57 किमी की दूरी पर है। मंदिर तक पहुँचने के लिए लगभग 1 किमी का पैदल ट्रेक करना होता है। हरे-भरे वन और पर्वतीय मार्ग इस यात्रा को सुखद एवं यादगार बनाते हैं।

आस्था, प्रकृति और पौराणिक महत्व का यह अनुपम धाम उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर एक विशिष्ट स्थान रखता है, और आने वाले समय में इस क्षेत्र में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की पूरी संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ सरकार सोशल मीडिया के ज़रिए कम-चर्चित तीर्थस्थलों को राष्ट्रीय मानचित्र पर लाने की कोशिश कर रही है। चंद्रबदनी जैसे मंदिर, जो केदारनाथ-बदरीनाथ की भीड़ से दूर हैं, आध्यात्मिक पर्यटन का एक वैकल्पिक मॉडल पेश करते हैं। असली सवाल यह है कि क्या सरकार इन स्थलों तक पहुँच, बुनियादी ढाँचे और संरक्षण में उतना ही निवेश करती है जितना प्रचार में करती है।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मां चंद्रबदनी मंदिर कहाँ स्थित है?
मां चंद्रबदनी मंदिर उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के जामनीखाल गाँव में समुद्र तल से लगभग 2277 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह श्रीनगर से करीब 52 किमी और टिहरी से लगभग 57 किमी की दूरी पर है।
चंद्रबदनी मंदिर में श्री यंत्र की पूजा क्यों होती है, मूर्ति की नहीं?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह वह स्थान है जहाँ माता सती का धड़ गिरा था। गर्भगृह में देवी मूर्ति के स्थान पर श्री यंत्र स्थापित है, जिसे कपड़े के छत्र के नीचे रखा गया है, और यही इस मंदिर की विशिष्ट उपासना परंपरा है।
मां चंद्रबदनी मंदिर तक कैसे पहुंचा जा सकता है?
मंदिर तक पहुँचने के लिए जामनीखाल गाँव तक सड़क मार्ग से आना होता है, उसके बाद लगभग 1 किमी का पैदल ट्रेक करना पड़ता है। नजदीकी प्रमुख शहर श्रीनगर (52 किमी) और टिहरी (57 किमी) हैं।
चंद्रबदनी मंदिर का धार्मिक महत्व क्या है?
यह माता सती को समर्पित शक्ति पीठ है और टिहरी क्षेत्र में कुंजापुरी व सुरकंडा के बाद तीसरा प्रमुख शक्ति पीठ माना जाता है। पुराणों के अनुसार यहाँ माता सती का धड़ गिरा था, जिससे इसे विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चंद्रबदनी मंदिर के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर मंदिर का वीडियो साझा करते हुए इसे 'शक्ति पूजा का बड़ा केंद्र' बताया और कहा कि यहाँ 'आस्था, प्रकृति और दिव्यता का अनोखा संगम' है। उन्होंने श्रद्धालुओं से टिहरी यात्रा के दौरान इस मंदिर में दर्शन करने की अपील की।
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