29 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

उत्तरकाशी का शक्ति मंदिर: मां आदि शक्ति भगवती को समर्पित, 6 मीटर ऊंचा दिव्य त्रिशूल है मुख्य आकर्षण

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
उत्तरकाशी का शक्ति मंदिर: मां आदि शक्ति भगवती को समर्पित, 6 मीटर ऊंचा दिव्य त्रिशूल है मुख्य आकर्षण

सारांश

उत्तरकाशी का शक्ति मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं — यह पौराणिक गाथा, चमत्कारी त्रिशूल और 13वीं सदी की ऐतिहासिक विरासत का संगम है। मुख्यमंत्री धामी के एक्स पोस्ट ने इस अनमोल धरोहर को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है।

मुख्य बातें

शक्ति मंदिर उत्तराखंड के उत्तरकाशी में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर के भीतर स्थित है और मां आदि शक्ति भगवती को समर्पित है।
मंदिर में 6 मीटर (20 फीट) ऊंचा प्राचीन त्रिशूल स्थापित है, जो लोहे और तांबे से निर्मित है और मौसम के प्रभाव से अप्रभावित रहता है।
मान्यता है कि देवी दुर्गा ने देवासुर संग्राम में इसी त्रिशूल से असुरों का वध किया था; इसका उल्लेख स्कंद पुराण के केदारखंड में मिलता है।
गर्भगृह में अष्टधातु का गोलाकार कलश है, जिसे 13वीं शताब्दी में राजा गणेश ने स्थापित किया था।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 29 जुलाई को एक्स पर वीडियो साझा कर मंदिर की महत्ता को रेखांकित किया।
मंदिर के कपाट वर्षभर खुले रहते हैं; चारधाम यात्रा और नवरात्रि में विशेष भीड़ उमड़ती है।

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित शक्ति मंदिर मां आदि शक्ति भगवती की उपासना का एक अत्यंत पवित्र केंद्र है, जो अपनी पौराणिक महत्ता और अनूठे आध्यात्मिक वातावरण के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष स्थान रखता है। इस मंदिर में स्थापित लगभग 6 मीटर (20 फीट) ऊंचा प्राचीन त्रिशूल यहाँ का सर्वाधिक आकर्षक और रहस्यमयी तत्व माना जाता है। 29 जुलाई को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा कर इस मंदिर की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को रेखांकित किया।

मुख्यमंत्री धामी ने क्या कहा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा, 'उत्तरकाशी जिले में स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर के अंदर बना शक्ति मंदिर मां आदि शक्ति भगवती को समर्पित है। यह मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। मंदिर में स्थापित प्राचीन और दिव्य त्रिशूल शक्ति, भक्ति और मां भगवती के स्वरूप का प्रतीक माना जाता है।' उन्होंने यह भी कहा कि यह पवित्र स्थान प्रत्येक भक्त को शांति और दिव्यता का अनुभव कराता है तथा उत्तरकाशी आने वाले श्रद्धालुओं से मंदिर के दर्शन का आग्रह किया।

दिव्य त्रिशूल की विशेषताएँ और पौराणिक मान्यता

मंदिर परिसर में स्थापित यह त्रिशूल लोहे और तांबे से निर्मित है और सदियों बाद भी मौसम के किसी भी प्रभाव से अछूता है, जो इसे और अधिक चमत्कारी बनाता है। आस्था से जुड़ी एक विशेष मान्यता यह है कि जोर लगाने पर यह त्रिशूल बिल्कुल नहीं हिलता, किंतु श्रद्धापूर्वक केवल एक उंगली से स्पर्श करने पर यह कंपित होता हुआ प्रतीत होता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह त्रिशूल स्वयं देवी दुर्गा ने अपने शक्ति स्वरूप से फेंका था और तभी से यह इसी स्थान पर स्थिर है। स्कंद पुराण के केदारखंड में इस मंदिर का वर्णन मिलता है, जिसके अनुसार देवासुर संग्राम के दौरान माता दुर्गा ने इसी त्रिशूल से असुरों का संहार किया था।

ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व

इस शक्ति स्तंभ के गर्भगृह में अष्टधातु का एक गोलाकार कलश स्थापित है, जिसे 13वीं शताब्दी में राजा गणेश द्वारा प्रतिष्ठित किया गया था। यह मंदिर बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर के ठीक सामने अवस्थित है और उत्तरकाशी की धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर का एक जीवंत प्रतीक माना जाता है।

श्रद्धालुओं की आवाजाही और दर्शन व्यवस्था

मंदिर के कपाट वर्षभर खुले रहते हैं। चारधाम यात्रा और नवरात्रि के अवसरों पर यहाँ श्रद्धालुओं की विशेष रूप से भारी भीड़ उमड़ती है। मंदिर न केवल स्थानीय भक्तों बल्कि देशभर से आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए भी आस्था और शांति का एक प्रमुख स्थल बन चुका है।

आगे क्या

मुख्यमंत्री धामी द्वारा इस मंदिर को सोशल मीडिया पर प्रमुखता से उजागर किए जाने के बाद उत्तरकाशी के धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलने की संभावना है। उत्तराखंड सरकार के धार्मिक पर्यटन प्रोत्साहन अभियान के तहत ऐसे स्थलों की पहचान और प्रचार-प्रसार राज्य की सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो चारधाम के प्रमुख तीर्थों की छाया में अक्सर अनदेखी रह जाती है। मुख्यमंत्री धामी का यह सोशल मीडिया प्रयास राज्य सरकार की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है, जिसमें कम-प्रचलित किंतु गहन आस्था वाले स्थलों को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर लाया जा रहा है। हालाँकि, ऐसे स्थलों पर बढ़ती भीड़ के साथ संरक्षण और अवसंरचना की चुनौती भी उतनी ही वास्तविक है — जिस पर नीतिगत ध्यान देना उतना ही ज़रूरी है जितना प्रचार।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तरकाशी का शक्ति मंदिर कहाँ स्थित है?
शक्ति मंदिर उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर के भीतर, बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर के ठीक सामने स्थित है। यह मां आदि शक्ति भगवती को समर्पित एक प्रमुख धार्मिक स्थल है।
शक्ति मंदिर के त्रिशूल की क्या विशेषता है?
यह त्रिशूल लगभग 6 मीटर (20 फीट) ऊंचा है और लोहे व तांबे से बना है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह मानी जाती है कि जोर लगाने पर यह नहीं हिलता, किंतु श्रद्धापूर्वक एक उंगली से स्पर्श करने पर कंपित होता हुआ महसूस होता है, और सदियों बाद भी मौसम का इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
शक्ति मंदिर का पौराणिक महत्व क्या है?
स्कंद पुराण के केदारखंड में इस मंदिर का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि देवासुर संग्राम के दौरान माता दुर्गा ने इसी त्रिशूल से असुरों का वध किया था और तभी से यह यहाँ स्थापित है। गर्भगृह में अष्टधातु का कलश 13वीं शताब्दी में राजा गणेश द्वारा स्थापित किया गया था।
शक्ति मंदिर के दर्शन का सबसे उचित समय कब है?
मंदिर के कपाट वर्षभर खुले रहते हैं। चारधाम यात्रा और नवरात्रि के दौरान यहाँ विशेष रूप से भारी भीड़ उमड़ती है, इसलिए इन अवसरों पर दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शक्ति मंदिर के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 29 जुलाई को एक्स पर वीडियो साझा करते हुए कहा कि यह मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है और यहाँ का दिव्य त्रिशूल शक्ति, भक्ति और मां भगवती के स्वरूप का प्रतीक है। उन्होंने उत्तरकाशी आने वाले श्रद्धालुओं से इस मंदिर के दर्शन का आग्रह किया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले