उत्तरकाशी श्री काशी विश्वनाथ मंदिर: CM धामी ने X पर शेयर किया भव्य वीडियो, जानें इस 'उत्तर की काशी' की महिमा
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार, 1 जून 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उत्तरकाशी स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर का भव्य वीडियो साझा करते हुए इस प्राचीन शिव धाम की आध्यात्मिक महत्ता को देशभर के श्रद्धालुओं तक पहुँचाया। भागीरथी नदी के तट पर स्थित यह मंदिर 'उत्तर की काशी' के नाम से विख्यात है और चारधाम यात्रियों की आस्था का जीवंत केंद्र है।
मुख्यमंत्री धामी का संदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, "जनपद उत्तरकाशी में स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव की आराधना का एक अत्यंत पवित्र एवं प्रमुख केंद्र है। यह धाम श्रद्धा, आस्था और सनातन संस्कृति का अनुपम प्रतीक है। यहाँ श्रद्धालु आत्मिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और दिव्य अनुभूति का अनुभव करते हैं। आप भी उत्तरकाशी आगमन पर इस पावन मंदिर के दर्शन अवश्य करें।" यह पोस्ट चारधाम यात्रा सीजन के बीच उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहित करने की राज्य सरकार की व्यापक मुहिम का हिस्सा मानी जा रही है।
मंदिर का ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व
उत्तरकाशी जनपद में भागीरथी नदी के पावन तट पर विराजमान श्री काशी विश्वनाथ मंदिर देवभूमि उत्तराखंड के सर्वाधिक प्राचीन शिव मंदिरों में गिना जाता है। इसे 'सौम्य काशी' भी कहा जाता है और इसका आध्यात्मिक महत्व उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ धाम के समतुल्य माना गया है। मान्यता है कि यहाँ बाबा विश्वनाथ साक्षात निवास करते हैं और दर्शनार्थियों को मोक्ष का वरदान प्रदान करते हैं।
गौरतलब है कि यह मंदिर आदिकाल से ऋषि-मुनियों की तपस्थली रहा है और चारधाम यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं के लिए एक अनिवार्य पड़ाव माना जाता है।
स्थापना और पुनर्निर्माण का इतिहास
मंदिर की स्थापना को लेकर मान्यता है कि इसकी मूल स्थापना ऋषि परशुराम द्वारा की गई थी। कालांतर में वर्ष 1857 में टिहरी रियासत की महारानी खनेती देवी ने प्राचीन वेदी के ऊपर मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया। यह ऐतिहासिक तथ्य मंदिर को केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।
स्वयंभू शिवलिंग और विशाल त्रिशूल
मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग स्वयंभू माना जाता है, जो आश्चर्यजनक रूप से दक्षिण दिशा की ओर थोड़ा झुका हुआ है — एक दुर्लभ और विशिष्ट लक्षण जो इसे अन्य शिव मंदिरों से अलग करता है। मंदिर प्रांगण में लगभग 115 फीट ऊँचा एक प्राचीन और विशाल त्रिशूल स्थापित है, जिस पर ब्राह्मी लिपि में लेख अंकित हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसे देवासुर संग्राम में देवताओं द्वारा प्रयुक्त अस्त्र माना जाता है।
पर्यटन और आगे की संभावनाएँ
मुख्यमंत्री धामी की यह पहल ऐसे समय में आई है जब उत्तराखंड में चारधाम यात्रा अपने चरम पर है और राज्य सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल माध्यमों का सक्रिय उपयोग कर रही है। उत्तरकाशी का यह शिव धाम आने वाले समय में और अधिक श्रद्धालुओं को आकर्षित करने की क्षमता रखता है।