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तुंगनाथ मंदिर: दुनिया का सबसे ऊंचा शिव धाम, CM धामी ने शेयर किया भव्य वीडियो

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तुंगनाथ मंदिर: दुनिया का सबसे ऊंचा शिव धाम, CM धामी ने शेयर किया भव्य वीडियो

सारांश

समुद्र तल से 3,680 मीटर ऊपर, रुद्रप्रयाग की हिमालयी वादियों में विराजमान तुंगनाथ सिर्फ एक मंदिर नहीं — यह पंच केदार का तीसरा और सर्वोच्च पड़ाव है, जहाँ पांडवों ने स्वयं महाभारत के पाप-बोध से मुक्ति पाने के लिए भोलेनाथ की भुजाओं की पूजा की थी। CM धामी ने इसी धाम का वीडियो एक्स पर साझा किया।

मुख्य बातें

तुंगनाथ मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित विश्व का सर्वोच्च शिव मंदिर है।
यह पंच केदार तीर्थयात्रा का तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है; यहाँ भगवान शिव की भुजाओं की पूजा होती है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार मंदिर का निर्माण महाभारत काल में स्वयं पांडवों ने किया था।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 31 जुलाई को एक्स पर मंदिर का भव्य वीडियो साझा कर श्रद्धालुओं को दर्शन का आह्वान किया।
पंच केदार में केदारनाथ (पीठ), तुंगनाथ (भुजाएँ), मध्यमहेश्वर (नाभि), रुद्रनाथ (मुख) और कल्पेश्वर (जटाएँ) शामिल हैं।

रुद्रप्रयाग जनपद की हिमालयी गोद में 3,680 मीटर की ऊंचाई पर विराजमान तुंगनाथ मंदिर विश्व का सबसे ऊंचा शिव मंदिर है और पंच केदार तीर्थयात्रा का तीसरा तथा सर्वाधिक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। 31 जुलाई को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर मंदिर का भव्य वीडियो साझा कर इस धाम की आध्यात्मिक महत्ता को देशभर के श्रद्धालुओं तक पहुंचाया।

मुख्यमंत्री धामी का संदेश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर लिखा, 'रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित भगवान शिव को समर्पित श्री तुंगनाथ मंदिर पंचकेदार में से एक है। हिमालय की मनोरम पर्वत शृंखलाओं के मध्य अवस्थित यह पावन धाम आध्यात्मिक आस्था, सनातन परंपरा और अद्वितीय प्राकृतिक सौंदर्य का अनुपम संगम है। देवभूमि उत्तराखंड की यात्रा के दौरान श्री तुंगनाथ धाम के दर्शन कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करें।' यह पोस्ट उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की राज्य सरकार की व्यापक कोशिशों का हिस्सा है।

पौराणिक महत्व और महाभारत से संबंध

मान्यताओं के अनुसार तुंगनाथ मंदिर का निर्माण महाभारत काल में स्वयं पांडवों द्वारा किया गया था। पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत युद्ध के पश्चात नरसंहार के पाप-बोध से व्यथित पांडव आत्मशुद्धि की खोज में हिमालय क्षेत्र में आए। भीम ने दो पर्वतों पर पैर टिकाकर भोलेनाथ को खोजना आरंभ किया। गुप्तकाशी के निकट उन्हें एक बैल दिखाई दिया, जिसे उन्होंने भगवान शिव का रूप पहचाना और उसकी पूंछ व पिछली टांगें थाम लीं।

कथा के अनुसार भगवान शिव उस बैल रूप में धरती में समा गए और बाद में पाँच अलग-अलग स्थानों पर पाँच भिन्न रूपों में प्रकट हुए — इस प्रकार पंच केदार की उत्पत्ति हुई।

पंच केदार में तुंगनाथ का स्थान

पंच केदार के पाँचों धामों में शिव के विभिन्न अंगों की पूजा की जाती है। केदारनाथ में पीठ की, तुंगनाथ में भुजाओं (हाथों) की, मध्यमहेश्वर में नाभि और उदर की, रुद्रनाथ में मुख की, तथा कल्पेश्वर में जटाओं की पूजा होती है। पौराणिक मान्यता है कि पांडवों ने इन्हीं पाँच स्थानों पर मंदिर बनवाए और शिव के दर्शन पाकर अपने पापों से मुक्ति प्राप्त की।

भौगोलिक और आध्यात्मिक विशेषता

समुद्र तल से 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित होने के कारण तुंगनाथ को विश्व का सर्वोच्च शिव मंदिर होने का गौरव प्राप्त है। देवभूमि उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में हिमालय की मनोरम पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य यह धाम आस्था और प्रकृति का दुर्लभ संगम प्रस्तुत करता है। प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु और पर्यटक यहाँ दर्शन के लिए पहुंचते हैं, और राज्य सरकार इस क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन के विकास पर निरंतर ध्यान दे रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें सोशल मीडिया को तीर्थाटन प्रचार का हथियार बनाया जा रहा है। गौरतलब है कि तुंगनाथ को हाल के वर्षों में 'झुकाव' (tilting) की समस्या के चलते ASI की निगरानी में रखा गया है, जो इसकी संरचनात्मक नाजुकता को उजागर करती है — लेकिन इस पहलू पर आधिकारिक प्रचार प्रायः चुप रहता है। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना सराहनीय है, किंतु विरासत संरक्षण और बढ़ती भीड़ प्रबंधन पर समानांतर ध्यान भी उतना ही ज़रूरी है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुंगनाथ मंदिर कहाँ स्थित है और यह क्यों प्रसिद्ध है?
तुंगनाथ मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में समुद्र तल से 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और इसे विश्व का सर्वोच्च शिव मंदिर माना जाता है। यह पंच केदार तीर्थयात्रा का तीसरा पड़ाव है, जहाँ भगवान शिव की भुजाओं की पूजा की जाती है।
पंच केदार क्या है और तुंगनाथ इसमें कौन-से स्थान पर आता है?
पंच केदार उत्तराखंड के हिमालय क्षेत्र में स्थित भगवान शिव के पाँच पवित्र धामों का समूह है — केदारनाथ, तुंगनाथ, मध्यमहेश्वर, रुद्रनाथ और कल्पेश्वर। तुंगनाथ इस यात्रा का तीसरा पड़ाव है और सबसे ऊंचाई पर स्थित होने के कारण सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
तुंगनाथ मंदिर का महाभारत से क्या संबंध है?
पौराणिक मान्यता के अनुसार तुंगनाथ मंदिर का निर्माण महाभारत काल में पांडवों ने किया था। युद्ध के बाद पाप-बोध से मुक्ति पाने के लिए पांडव हिमालय आए, जहाँ भगवान शिव बैल रूप में धरती में समाकर पाँच स्थानों पर प्रकट हुए — इन्हीं पाँच स्थानों पर पांडवों ने मंदिर बनवाए।
CM धामी ने तुंगनाथ को लेकर क्या पोस्ट किया?
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 31 जुलाई को एक्स पर तुंगनाथ मंदिर का भव्य वीडियो साझा किया। उन्होंने श्रद्धालुओं से देवभूमि उत्तराखंड की यात्रा के दौरान तुंगनाथ धाम के दर्शन कर भोलेनाथ का आशीर्वाद लेने का आह्वान किया।
पंच केदार के पाँचों धामों में किस अंग की पूजा होती है?
पंच केदार में शिव के पाँच अंगों की अलग-अलग पूजा होती है — केदारनाथ में पीठ, तुंगनाथ में भुजाएँ, मध्यमहेश्वर में नाभि और उदर, रुद्रनाथ में मुख, और कल्पेश्वर में जटाओं की पूजा की जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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