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मुक्तेश्वर महादेव मंदिर नैनीताल: 2,312 मीटर ऊंचाई पर बसा शिव धाम, CM धामी ने की तारीफ

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मुक्तेश्वर महादेव मंदिर नैनीताल: 2,312 मीटर ऊंचाई पर बसा शिव धाम, CM धामी ने की तारीफ

सारांश

सावन से पहले उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी ने नैनीताल के मुक्तेश्वर महादेव मंदिर का वीडियो एक्स पर साझा किया। 2,312 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर पांडवकालीन मान्यताओं, सफेद संगमरमर के शिवलिंग और मोक्ष की आस्था के लिए प्रसिद्ध है।

मुख्य बातें

मुक्तेश्वर महादेव मंदिर उत्तराखंड के नैनीताल जिले में समुद्र तल से 2,312 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सावन माह से पहले एक्स पर मंदिर का वीडियो साझा कर दर्शन का आमंत्रण दिया।
मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना पांडवों ने 12 वर्ष के वनवास के दौरान की थी।
मंदिर में सफेद संगमरमर का शिवलिंग , भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा की प्रतिमाएं स्थापित हैं।
मंदिर तक पहुंचने के लिए पत्थर काटकर बनाई गई सीढ़ियों से गुजरना पड़ता है; परिसर में प्राचीन घंटी भी है।

उत्तराखंड के नैनीताल जिले में समुद्र तल से लगभग 2,312 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मुक्तेश्वर महादेव मंदिर अपनी गहरी धार्मिक आस्था, नैसर्गिक सौंदर्य और ऐतिहासिक महत्व के लिए उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थ स्थलों में गिना जाता है। सावन माह के आरंभ से पहले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर मंदिर का वीडियो साझा कर श्रद्धालुओं और पर्यटकों को इस पवित्र स्थल के दर्शन का आमंत्रण दिया।

मुख्यमंत्री धामी का संदेश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर मंदिर का वीडियो जारी करते हुए लिखा, 'नैनीताल जिले में स्थित मुक्तेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यह मंदिर अपनी आस्था, आध्यात्मिक शांति और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। चारों ओर हरियाली और पहाड़ों से घिरा यह पवित्र स्थान श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित करता है।' उन्होंने यह भी कहा कि नैनीताल यात्रा पर जाने वाले लोग इस मंदिर के दर्शन अवश्य करें, क्योंकि यहां का शांत वातावरण यात्रा को यादगार बना देता है।

पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व

मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना पांडवों ने अपने 12 वर्ष के वनवास के दौरान की थी। कहा जाता है कि महाभारत काल में अज्ञातवास के समय पांडवों ने जीवन के कष्टों से मुक्ति पाने की कामना लेकर यहां भगवान शिव की आराधना की थी। इसी धार्मिक विश्वास के कारण इस स्थान का नाम 'मुक्तेश्वर' पड़ा — अर्थात वह स्थान जहां मुक्ति या मोक्ष की प्राप्ति होती है।

यह ऐसे समय में विशेष महत्व रखता है जब सावन माह में उत्तराखंड के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है और राज्य सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने में जुटी है।

मंदिर की विशेषताएं

मंदिर परिसर में भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा की प्रतिमाएं स्थापित हैं। मंदिर के गर्भगृह में सफेद संगमरमर से निर्मित शिवलिंग विराजमान है, जिसके साथ तांबे की योनि भी स्थापित है। मंदिर तक पहुंचने के लिए पत्थरों को काटकर बनाई गई सीढ़ियों से होकर गुजरना पड़ता है, जो इस तीर्थ यात्रा को और भी रोमांचकारी अनुभव बनाती हैं। परिसर में एक प्राचीन घंटी भी टंगी है, जिसे बजाकर भक्त अपनी मन्नतें मांगते हैं।

प्राकृतिक परिवेश और पर्यटन आकर्षण

चारों ओर हरे-भरे पहाड़ों और घने जंगलों से घिरा यह मंदिर धार्मिक आस्था रखने वालों के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों को भी समान रूप से आकर्षित करता है। 2,312 मीटर की ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां से हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं का मनोरम दृश्य भी देखा जा सकता है। गौरतलब है कि मुक्तेश्वर क्षेत्र पहले से ही अपनी ठंडी जलवायु और सेब के बागानों के लिए प्रसिद्ध है, और यह मंदिर उस क्षेत्र के आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित है।

आगे क्या

सावन माह में मुक्तेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। राज्य सरकार द्वारा धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में इस तरह के प्रयास उत्तराखंड को देश के प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन गंतव्यों में और मजबूती से स्थापित करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उत्तराखंड की धार्मिक पर्यटन अर्थव्यवस्था को सावन के मौसम में गति देने की सोची-समझी रणनीति भी है। राज्य सरकार हर सावन में मंदिरों के प्रचार को पर्यटन राजस्व से जोड़ती है, जो एक सकारात्मक कदम है। हालांकि, 2,312 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर तक बुनियादी ढांचे और भीड़ प्रबंधन की स्थिति पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है जितना प्रचार करना। धार्मिक पर्यटन की असली सफलता तभी मापी जा सकती है जब श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुविधाजनक अनुभव मिले।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुक्तेश्वर महादेव मंदिर कहां स्थित है?
मुक्तेश्वर महादेव मंदिर उत्तराखंड के नैनीताल जिले में समुद्र तल से लगभग 2,312 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह मंदिर नैनीताल से लगभग 51 किलोमीटर की दूरी पर मुक्तेश्वर कस्बे में है।
मुक्तेश्वर मंदिर का नाम 'मुक्तेश्वर' क्यों पड़ा?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां भगवान शिव के दर्शन करने से भक्तों को मोक्ष या मुक्ति की प्राप्ति होती है, इसीलिए इस स्थान का नाम 'मुक्तेश्वर' पड़ा। 'मुक्तेश्वर' का शाब्दिक अर्थ है — मुक्ति देने वाले ईश्वर।
मुक्तेश्वर मंदिर का पांडवों से क्या संबंध है?
मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों ने अपने 12 वर्ष के वनवास के दौरान इस मंदिर का निर्माण कराया था। कहा जाता है कि उन्होंने जीवन के कष्टों से मुक्ति पाने की कामना से यहां भगवान शिव की आराधना की थी।
मुक्तेश्वर मंदिर में क्या-क्या देखने को मिलता है?
मंदिर के गर्भगृह में सफेद संगमरमर से बना शिवलिंग और तांबे की योनि स्थापित है। इसके अलावा परिसर में भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा की प्रतिमाएं, एक प्राचीन घंटी और पत्थरों को काटकर बनाई गई सीढ़ियां भी हैं।
CM पुष्कर सिंह धामी ने मुक्तेश्वर मंदिर के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सावन माह से पहले एक्स पर मंदिर का वीडियो साझा करते हुए इसे आस्था, आध्यात्मिक शांति और प्राकृतिक सुंदरता का केंद्र बताया। उन्होंने नैनीताल यात्रा पर जाने वाले लोगों से इस मंदिर के दर्शन करने का आग्रह किया।
राष्ट्र प्रेस
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