बिनसर महादेव मंदिर: रानीखेत के देवदार वनों में बसा शिव का प्राचीन धाम, सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के रानीखेत (अल्मोड़ा) में घने देवदार के जंगलों के बीच स्थित बिनसर महादेव मंदिर श्रावण मास में श्रद्धालुओं का प्रमुख आस्था केंद्र बन जाता है। यह प्राचीन मंदिर न केवल धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है, बल्कि अपनी अद्वितीय स्थापत्य कला और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भी विशेष पहचान रखता है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा कर श्रद्धालुओं से इस पवित्र धाम के दर्शन करने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री धामी का आह्वान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, 'सावन के पवित्र महीने में भगवान भोलेनाथ की पूजा का विशेष महत्व है। इस शुभ समय में, श्रद्धालु बड़ी संख्या में रानीखेत (अल्मोड़ा) के घने देवदार के जंगलों के बीच स्थित बिनसर महादेव मंदिर पहुँचते हैं और आस्था, भक्ति व आध्यात्मिक शांति की कामना करते हैं।' उन्होंने आगे कहा कि यह क्षेत्र तीर्थयात्रियों को दिव्य अनुभव के साथ-साथ प्रकृति से एक अनोखा जुड़ाव भी प्रदान करता है।
धामी ने सावन में रानीखेत की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं से विशेष रूप से अनुरोध किया कि वे आध्यात्मिक पुण्य का लाभ पाने के लिए बिनसर महादेव मंदिर में दर्शन और पूजा के लिए अवश्य जाएं।
मंदिर का ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, बिनसर महादेव मंदिर का निर्माण 9वीं-10वीं शताब्दी में हुआ था, जो इसे उत्तराखंड के सबसे प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक बनाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण राजा पिठ्ठ ने अपने पिता बिंदू की स्मृति में करवाया था, और इसी कारण इसे बिंदेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
मंदिर परिसर में गणेश, हर गौरी और महेशमर्दिनी की प्रतिमाएँ स्थापित हैं। विशेष रूप से, महेशमर्दिनी की मूर्ति 9वीं शताब्दी की है, जिस पर 'नगरीलिपी' में ग्रंथ उत्कीर्ण हैं — यह इस मंदिर की स्थापत्य विरासत का जीवंत प्रमाण है।
स्वयंभू शिवलिंग और आस्था की विशेष मान्यता
स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच यह मान्यता प्रचलित है कि बिनसर महादेव मंदिर में भगवान शिव स्वयंभू शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। इस मंदिर से जुड़ी एक विशेष आस्था यह भी है कि यहाँ तक हर कोई नहीं पहुँच पाता — जिस भक्त को भगवान शिव का बुलावा होता है, वही इस धाम तक पहुँचने में सफल होता है। यह मान्यता मंदिर की रहस्यमय आभा को और गहरा करती है।
बैकुंठ चतुर्दशी मेला और प्राकृतिक परिवेश
प्रतिवर्ष बैकुंठ चतुर्दशी के अवसर पर यहाँ एक विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु शामिल होते हैं। देवदार, पाइन और ओक के घने वनों से घिरा यह मंदिर उत्तराखंड के आध्यात्मिक पर्यटन मानचित्र पर एक विशिष्ट स्थान रखता है।
यह ऐसे समय में है जब उत्तराखंड सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से प्रयासरत है, और मुख्यमंत्री धामी का यह आह्वान उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सावन के शेष सप्ताहों में बिनसर महादेव में श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि की संभावना है।