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ऋषेश्वर महादेव मंदिर: कैलाश मानसरोवर यात्रा का प्राचीन पड़ाव, CM धामी ने शेयर किया वीडियो

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ऋषेश्वर महादेव मंदिर: कैलाश मानसरोवर यात्रा का प्राचीन पड़ाव, CM धामी ने शेयर किया वीडियो

सारांश

चंपावत की लोहावती नदी के तट पर बसा ऋषेश्वर महादेव मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं — यह कैलाश मानसरोवर के प्राचीन तीर्थ-मार्ग की जीवित स्मृति है। CM धामी के वीडियो ने इस अनजाने मंदिर को राष्ट्रीय नज़रों में ला दिया।

मुख्य बातें

ऋषेश्वर महादेव मंदिर उत्तराखंड के चंपावत जिले में लोहावती नदी के तट पर स्थित है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार यह मंदिर कभी कैलाश मानसरोवर यात्रा के प्राचीन मार्ग का महत्वपूर्ण पड़ाव था।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 26 अगस्त को एक्स पर मंदिर का वीडियो साझा कर श्रद्धालुओं को दर्शन का आमंत्रण दिया।
परिसर में माता कालिका , दुर्गा और राधा-कृष्ण के मंदिरों के साथ धर्मशाला, पार्क और पार्वती रसोई की सुविधा उपलब्ध है।
मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से पूजा करने पर मनोकामनाएँ पूरी होती हैं और निसंतान दंपतियों को संतान सुख का आशीर्वाद मिलता है।

उत्तराखंड के चंपावत जिले में लोहावती नदी के पावन तट पर विराजमान ऋषेश्वर महादेव मंदिर सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर कभी प्राचीन कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग का एक महत्वपूर्ण पड़ाव हुआ करता था। 26 अगस्त को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मंदिर का एक विशेष वीडियो साझा कर इसकी महिमा को व्यापक जन-समुदाय तक पहुँचाया।

मुख्यमंत्री धामी की अपील

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, 'चंपावत जिले में लोहावती नदी के पवित्र तट पर स्थित ऋषेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित पूजा का एक पुराना केंद्र है, जो आस्था से गहराई से जुड़ा हुआ है। सावन के महीने में यहाँ भगवान भोलेनाथ के दर्शन और पूजा करने से आत्मा को असीम शांति, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है। चंपावत पहुँचने पर आपको भी इस पवित्र मंदिर के दर्शन ज़रूर करने चाहिए।' यह पोस्ट तेज़ी से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच साझा की जाने लगी।

ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व

ऋषेश्वर महादेव मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न अंग है। पौराणिक मान्यता है कि यहाँ भगवान शिव स्वयं ब्राह्मण वेश में प्रकट हुए थे। लोहाघाट के निवासियों में यह विश्वास गहरी जड़ें जमाए है कि इस मंदिर के दर्शन किए बिना लोहाघाट की यात्रा अधूरी मानी जाती है।

यह मंदिर कभी कैलाश मानसरोवर यात्रा के प्राचीन मार्ग पर एक विश्राम-स्थल के रूप में जाना जाता था, जहाँ तीर्थयात्री आगे की कठिन यात्रा से पहले भगवान शिव का आशीर्वाद लेते थे। यह ऐतिहासिक संदर्भ इस स्थान को उत्तराखंड के धार्मिक मानचित्र पर विशेष स्थान दिलाता है।

मंदिर परिसर और सुविधाएँ

मुख्य ऋषेश्वर महादेव के गर्भगृह के साथ-साथ मंदिर परिसर में माता कालिका, दुर्गा और राधा-कृष्ण के मंदिर भी स्थित हैं। परिसर में अखंड भैरव धूनी, बच्चों के लिए पार्क, धर्मशाला और पार्वती रसोई जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं, जो इसे एक समग्र तीर्थ-स्थल बनाती हैं।

यहाँ वर्षभर शिव पूजा, यज्ञोपवीत संस्कार और विविध धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होते रहते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार सच्चे मन से पूजा करने पर मनोकामनाएँ पूरी होती हैं और निसंतान दंपतियों को संतान सुख का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

आम जनता पर असर

मुख्यमंत्री के वीडियो साझा करने के बाद मंदिर को लेकर सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छिड़ गई है। उत्तराखंड सरकार की ओर से इस तरह के प्रयास राज्य के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माने जा रहे हैं। चंपावत पहुँचने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यह मंदिर अब एक अनिवार्य गंतव्य के रूप में उभर रहा है।

क्या होगा आगे

उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन को लेकर राज्य सरकार की सक्रियता बढ़ती जा रही है। ऋषेश्वर महादेव मंदिर जैसे स्थलों को प्रचारित करने से चंपावत और लोहाघाट क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की संभावना है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी लाभकारी सिद्ध हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इन स्थलों तक पहुँचने के लिए बुनियादी ढाँचा — सड़क, आवास, स्वच्छता — उसी गति से विकसित हो रहा है जिस गति से इन्हें प्रचारित किया जा रहा है। चंपावत जैसे दूरदराज़ जिलों में पर्यटन की असली क्षमता तभी उजागर होगी जब डिजिटल प्रचार ज़मीनी सुविधाओं के साथ कदमताल करे।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऋषेश्वर महादेव मंदिर कहाँ स्थित है?
ऋषेश्वर महादेव मंदिर उत्तराखंड के चंपावत जिले में लोहावती नदी के तट पर स्थित है। यह लोहाघाट क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक स्थल है और स्थानीय लोगों की गहरी आस्था का केंद्र है।
ऋषेश्वर महादेव मंदिर का कैलाश मानसरोवर यात्रा से क्या संबंध है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर प्राचीन काल में कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग का एक महत्वपूर्ण पड़ाव हुआ करता था। तीर्थयात्री आगे की कठिन यात्रा से पहले यहाँ भगवान शिव का आशीर्वाद लेते थे।
CM पुष्कर सिंह धामी ने इस मंदिर के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 26 अगस्त को एक्स पर मंदिर का वीडियो साझा करते हुए कहा कि सावन में यहाँ दर्शन करने से आत्मा को असीम शांति, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है। उन्होंने चंपावत आने वाले सभी लोगों से इस मंदिर के दर्शन करने की अपील की।
ऋषेश्वर महादेव मंदिर परिसर में क्या-क्या सुविधाएँ हैं?
मंदिर परिसर में मुख्य ऋषेश्वर महादेव के अलावा माता कालिका, दुर्गा और राधा-कृष्ण के मंदिर हैं। इसके साथ ही अखंड भैरव धूनी, बच्चों के लिए पार्क, धर्मशाला और पार्वती रसोई की सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं।
इस मंदिर में दर्शन का क्या महत्व माना जाता है?
स्थानीय मान्यता के अनुसार सच्चे मन से पूजा करने पर मनोकामनाएँ पूरी होती हैं और निसंतान दंपतियों को संतान सुख का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पौराणिक मान्यता यह भी है कि भगवान शिव यहाँ स्वयं ब्राह्मण वेश में प्रकट हुए थे।
राष्ट्र प्रेस
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