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डीडीहाट का श्री मलयनाथ स्वामी मंदिर: CM धामी ने बताया आस्था और सांस्कृतिक विरासत का संगम

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डीडीहाट का श्री मलयनाथ स्वामी मंदिर: CM धामी ने बताया आस्था और सांस्कृतिक विरासत का संगम

सारांश

उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी ने डीडीहाट के श्री मलयनाथ स्वामी मंदिर को आस्था, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक विरासत का संगम बताते हुए श्रद्धालुओं से दर्शन की अपील की। भगवान शिव को समर्पित यह प्राचीन सीराकोट मंदिर पंचाचुली और नंदा देवी की चोटियों के मनमोहक नज़ारों के बीच कुमाऊं के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शुमार है।

मुख्य बातें

उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को श्री मलयनाथ स्वामी मंदिर का वीडियो X पर साझा किया।
मंदिर पिथौरागढ़ जिले के डीडीहाट में एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है और भगवान शिव को समर्पित है।
सीराकोट मंदिर के नाम से भी प्रसिद्ध इस स्थल की स्थापना चंद या रैका राजाओं द्वारा मानी जाती है।
मंदिर से पंचाचुली और नंदा देवी की हिमालयी चोटियों के दृश्य दिखाई देते हैं।
समीप की गुफा में प्राकृतिक पत्थर की आकृतियों की पूजा शिव और शेषनाग के रूप में होती है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को पिथौरागढ़ जिले के डीडीहाट में स्थित प्राचीन श्री मलयनाथ स्वामी मंदिर की भव्यता और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए श्रद्धालुओं और पर्यटकों से इस पवित्र स्थल के दर्शन की अपील की। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर एक ऊँची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है और कुमाऊं क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है।

मुख्यमंत्री का संदेश

मुख्यमंत्री धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर मंदिर का वीडियो साझा करते हुए लिखा, ‘पिथौरागढ़ जिले के डीडीहाट में स्थित श्री मलयनाथ स्वामी जी का पवित्र मंदिर आस्था, आध्यात्मिकता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम है।’

उन्होंने आगे लिखा, ‘भगवान शिव को समर्पित यह प्राचीन मंदिर अपने ऐतिहासिक महत्व, धार्मिक मान्यता और मनमोहक प्राकृतिक वातावरण के लिए विशेष पहचान रखता है। यदि आप पिथौरागढ़ जिले की यात्रा पर जाएं, तो इस पवित्र मंदिर के दर्शन अवश्य करें। यह स्थान श्रद्धालुओं और पर्यटकों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र है।’

मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

श्री मलयनाथ स्वामी मंदिर, जिसे सीराकोट मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के डीडीहाट क्षेत्र में स्थित एक प्रसिद्ध और पौराणिक शिव मंदिर है। मान्यता के अनुसार, इस प्राचीन मंदिर की स्थापना चंद या रैका राजाओं द्वारा की गई थी।

प्राकृतिक सौंदर्य और गुफा

समुद्र तल से काफ़ी ऊँचाई पर स्थित यह स्थान चारों ओर हरी-भरी घाटियों और हिमालय की चोटियों — जैसे पंचाचुली और नंदा देवी — के मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करता है। मंदिर के समीप एक गुफा है जिसमें प्राकृतिक रूप से बनी पत्थर की आकृतियाँ मौजूद हैं, जिनकी पूजा श्रद्धालु भगवान शिव और शेषनाग के रूप में करते हैं।

सांस्कृतिक और पर्यटन महत्व

यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय संस्कृति, लोकमान्यताओं और ऐतिहासिक विरासत का भी प्रतीक है। हर वर्ष यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक दर्शन एवं प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने पहुँचते हैं। स्थानीय लोगों की इस स्थान पर गहरी आस्था है, और इसे एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में भी जाना जाता है, जहाँ श्रद्धालु अक्सर शांति और ध्यान के लिए आते हैं।

मुख्यमंत्री की इस अपील से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले महीनों में डीडीहाट क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि पिथौरागढ़ और कुमाऊं की सीमावर्ती धरोहरें अपेक्षाकृत उपेक्षित रही हैं। मुख्यमंत्री धामी का सीराकोट जैसे कम-चर्चित स्थल को सीधे प्रचारित करना एक रणनीतिक संकेत है — सीमांत क्षेत्रों में धार्मिक पर्यटन को आर्थिक गतिविधि और स्थानीय रोज़गार से जोड़ने का। असली परीक्षा यह है कि क्या इस प्रचार के साथ सड़क, ठहराव और स्थानीय गाइड जैसे बुनियादी ढाँचे में निवेश भी आता है। बिना ज़मीनी तैयारी के, सोशल मीडिया पर साझा किए गए ऐसे वीडियो श्रद्धालुओं को आकर्षित तो कर सकते हैं, पर पर्यटन का दीर्घकालिक मॉडल नहीं बना सकते।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री मलयनाथ स्वामी मंदिर कहाँ स्थित है?
श्री मलयनाथ स्वामी मंदिर उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के डीडीहाट क्षेत्र में एक ऊँची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। इसे सीराकोट मंदिर के नाम से भी जाना जाता है और यह भगवान शिव को समर्पित है।
मंदिर की स्थापना किसने की थी?
मान्यता के अनुसार, इस प्राचीन मंदिर की स्थापना चंद या रैका राजाओं द्वारा की गई थी। मंदिर का ऐतिहासिक महत्व कुमाऊं की क्षेत्रीय राजवंशी विरासत से जुड़ा हुआ है।
CM पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने X पर मंदिर को आस्था, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम बताया। उन्होंने पिथौरागढ़ की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से मंदिर के दर्शन अवश्य करने की अपील की।
मंदिर के आसपास क्या देखने योग्य है?
मंदिर से पंचाचुली और नंदा देवी सहित हिमालय की चोटियों और हरी-भरी घाटियों के मनमोहक दृश्य दिखाई देते हैं। समीप ही एक गुफा है जिसमें प्राकृतिक रूप से बनी पत्थर की आकृतियों की पूजा भगवान शिव और शेषनाग के रूप में की जाती है।
क्या यह स्थल पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण है?
हाँ, सीराकोट मंदिर कुमाऊं क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है और हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं पर्यटक यहाँ पहुँचते हैं। यह स्थान ध्यान और शांति के अनुभव के लिए भी जाना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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