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पिथौरागढ़ का ध्वज मंदिर: 2000 मीटर ऊंचाई पर शिव-जयंती का पवित्र धाम, CM धामी ने की तारीफ

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पिथौरागढ़ का ध्वज मंदिर: 2000 मीटर ऊंचाई पर शिव-जयंती का पवित्र धाम, CM धामी ने की तारीफ

सारांश

पिथौरागढ़ की 2000 मीटर ऊंची पहाड़ी पर स्थित ध्वज मंदिर — शिव और जयंती माता का यह प्राचीन धाम अब राज्य सरकार की नज़र में भी है। CM धामी ने एक्स पर वीडियो शेयर कर इसे आस्था और प्रकृति के अनूठे संगम के रूप में प्रस्तुत किया।

मुख्य बातें

ध्वज मंदिर उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में लगभग 2000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और भगवान शिव तथा माता जयंती को समर्पित है।
मुख्य जयंती माता मंदिर से लगभग 200 फीट नीचे एक प्राचीन गुफा मंदिर है, जो लगभग 50 फीट गहरा बताया जाता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 30 जुलाई को एक्स पर मंदिर का वीडियो साझा कर इसे आध्यात्मिक पहचान का केंद्र बताया।
नवरात्र और महाशिवरात्रि पर यहाँ भारी भीड़ और विशेष मेले का आयोजन होता है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार मंदिर का नाम भगवान शिव के नाम पर स्थापित 'ध्वज' से पड़ा; इसका ऐतिहासिक संबंध खांडनाथ और कपड़ी वंश से भी माना जाता है।

उत्तराखंड के पूर्वी हिमालयी सीमांत जिले पिथौरागढ़ में लगभग 2000 मीटर की ऊंचाई पर एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित 'ध्वज मंदिर' भगवान शिव और माता जयंती को समर्पित एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यह मंदिर अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और हिमालय की बर्फीली चोटियों के अप्रतिम दृश्य के लिए श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच समान रूप से प्रसिद्ध है। 30 जुलाई को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर मंदिर का वीडियो साझा कर इसके महत्व को रेखांकित किया।

मुख्यमंत्री धामी ने क्या कहा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर मंदिर का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, 'पिथौरागढ़ जिले में भगवान शिव और माता जयंती को समर्पित 'ध्वज मंदिर' आध्यात्मिक पहचान और अटूट आस्था का एक प्रमुख केंद्र है। प्राकृतिक सुंदरता से घिरा यह पवित्र स्थान भक्तों को आध्यात्मिक शांति और अलौकिक ऊर्जा का अनुभव कराता है।' उन्होंने यह भी कहा कि नवरात्र के पावन अवसर पर यहाँ भव्य पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं, जिनमें दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त आते हैं।

मंदिर की संरचना और भौगोलिक विशेषता

मुख्य जयंती माता मंदिर से लगभग 200 फीट नीचे भगवान शिव का एक प्राचीन गुफा मंदिर स्थित है, जिसे स्थानीय मान्यताओं के अनुसार लगभग 50 फीट गहरा बताया जाता है। मंदिर परिसर से हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियाँ और चारों ओर के हरे-भरे पहाड़ों का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। यह भौगोलिक स्थिति इसे उत्तराखंड के सबसे दर्शनीय धार्मिक स्थलों में से एक बनाती है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और लोककथाएँ

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस ऊंची पहाड़ी पर प्राचीन ऋषियों ने तपस्या की थी और उन्हें देवी-देवताओं के दिव्य दर्शन हुए थे। कहा जाता है कि इस स्थान पर भगवान शिव के नाम पर एक 'ध्वज' स्थापित किया गया था, जिसके बाद स्थानीय निवासियों ने इसे 'ध्वज मंदिर' के नाम से जाना। एक अन्य जनश्रुति के अनुसार, इस स्थल का नाम 'कपड़ी वंश' के पूर्वजों द्वारा रखा गया था। इस मंदिर का ऐतिहासिक संबंध खांडनाथ से भी माना जाता है।

धार्मिक आयोजन और श्रद्धालुओं की आस्था

नवरात्र और महाशिवरात्रि के पर्वों पर यहाँ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और विशेष मेले का आयोजन किया जाता है। यह ऐसे समय में और अधिक प्रासंगिक हो जाता है जब उत्तराखंड सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। गौरतलब है कि पिथौरागढ़ जिला पहले से ही सीमांत पर्यटन और ट्रेकिंग के लिए जाना जाता है, और ध्वज मंदिर इस क्षेत्र की आध्यात्मिक विरासत का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।

पर्यटकों के लिए संदेश

मुख्यमंत्री धामी ने अपनी पोस्ट में पर्यटकों और श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि पिथौरागढ़ आने पर इस पवित्र मंदिर के दर्शन अवश्य करें। उत्तराखंड के धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के नक्शे पर ध्वज मंदिर की बढ़ती पहचान इस क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो रणनीतिक रूप से भारत-चीन-नेपाल सीमा पर हैं, वहाँ धार्मिक पर्यटन की बढ़ोतरी स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, बुनियादी ढाँचे और पहुंच मार्गों की स्थिति पर ध्यान दिए बिना केवल सोशल मीडिया प्रचार से धरातल पर बदलाव सीमित रहेगा।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ध्वज मंदिर पिथौरागढ़ कहाँ स्थित है?
ध्वज मंदिर उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में लगभग 2000 मीटर की ऊंचाई पर एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। यह भगवान शिव और माता जयंती को समर्पित है और हिमालय की बर्फीली चोटियों के दृश्य के लिए प्रसिद्ध है।
ध्वज मंदिर का नाम 'ध्वज' क्यों पड़ा?
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान पर भगवान शिव के नाम पर एक 'ध्वज' स्थापित किया गया था, जिसके बाद स्थानीय निवासियों ने इसे 'ध्वज मंदिर' कहना शुरू किया। एक अन्य जनश्रुति के अनुसार नाम 'कपड़ी वंश' के पूर्वजों द्वारा रखा गया था।
ध्वज मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
नवरात्र और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ विशेष धार्मिक आयोजन और मेले होते हैं, जो इसे श्रद्धालुओं के लिए सबसे उपयुक्त समय बनाते हैं। इन पर्वों पर बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं।
CM धामी ने ध्वज मंदिर के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 30 जुलाई को एक्स पर मंदिर का वीडियो साझा करते हुए इसे 'आध्यात्मिक पहचान और अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र' बताया। उन्होंने पर्यटकों से पिथौरागढ़ आने पर इस मंदिर के दर्शन करने का आग्रह किया।
ध्वज मंदिर में कौन-सा प्राचीन गुफा मंदिर है?
मुख्य जयंती माता मंदिर से लगभग 200 फीट नीचे भगवान शिव का एक प्राचीन गुफा मंदिर है, जो लगभग 50 फीट गहरा बताया जाता है। स्थानीय मान्यता है कि इस गुफा में दीर्घकाल तक भगवान शिव का वास रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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