13 सितंबर 2026
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ब्रिक्स भोज विवाद पर रिजिजू का कांग्रेस को करारा जवाब: 'शाकाहारी मेन्यू भारतीय संस्कृति का प्रतीक'

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ब्रिक्स भोज विवाद पर रिजिजू का कांग्रेस को करारा जवाब: 'शाकाहारी मेन्यू भारतीय संस्कृति का प्रतीक'

सारांश

ब्रिक्स भोज के शाकाहारी मेन्यू पर कांग्रेस की आलोचना के जवाब में रिजिजू ने एक्स पर पलटवार किया। उनका कहना है कि यह भारतीय विविधता और आतिथ्य का प्रतीक है — लेकिन सवाल यह है कि अंतरराष्ट्रीय राजनय के मंच पर घरेलू सियासत क्यों हावी हो रही है।

मुख्य बातें

किरेन रिजिजू ने 13 सितंबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर कांग्रेस पर ब्रिक्स भोज के मेन्यू पर राजनीति करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया था कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के आधिकारिक भोज में केवल शाकाहारी व्यंजन क्यों परोसे गए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स राष्ट्राध्यक्षों के सम्मान में विशेष भोज आयोजित किया, जिसमें विभिन्न राज्यों के पारंपरिक शाकाहारी व्यंजन परोसे गए।
रिजिजू ने कहा कि भारतीय शाकाहारी भोजन स्वाद, पोषण और क्षेत्रीय विविधता से भरपूर है और भारतीय संस्कृति का प्रतीक है।
भारत इस वर्ष ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 का मेजबान है; केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री भी भोज में शामिल हुए।

संसदीय कार्य मंत्री एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 13 सितंबर 2026 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर कड़ा पलटवार किया, जब कुछ कांग्रेस नेताओं ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के आधिकारिक भोज में परोसे गए विशुद्ध शाकाहारी मेन्यू को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए। रिजिजू ने स्पष्ट किया कि यह मेन्यू भारत की सांस्कृतिक विविधता और आतिथ्य परंपरा का प्रतीक था, न कि किसी विवाद का विषय।

रिजिजू का एक्स पर पलटवार

रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'मुझे यकीन नहीं हो रहा कि कांग्रेस पार्टी ब्रिक्स देशों के नेताओं को परोसे गए खाने के मेन्यू पर भी राजनीति कर रही है। हमारे मेहमानों ने भारतीय शाकाहारी भोजन का आनंद लिया, जो स्वाद और पोषण से भरपूर है और जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराएं शामिल हैं।' उन्होंने जोर देकर कहा कि विदेशी मेहमानों ने इस भोजन का भरपूर आनंद लिया और यह भारत की गौरवशाली खान-पान परंपरा को दर्शाता है।

विवाद की पृष्ठभूमि

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स राष्ट्राध्यक्षों के सम्मान में एक विशेष भोज का आयोजन किया था, जिसमें विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री भी शामिल हुए। इस भोज में भारत के विभिन्न राज्यों के पारंपरिक शाकाहारी व्यंजन परोसे गए, ताकि भारतीय खान-पान की विविधता को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जा सके। इसी के बाद कांग्रेस से जुड़े कुछ नेताओं ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि आधिकारिक भोज में केवल शाकाहारी भोजन ही क्यों परोसा गया।

रिजिजू की अन्य पोस्ट और भारतीय आतिथ्य का बखान

रिजिजू ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, 'भारत को ब्रिक्स समिट की मेजबानी करने पर गर्व है। केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के साथ, मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारत के अति-विशिष्ट अतिथियों के सम्मान में आयोजित भोज में भाग लिया, जिसमें शुद्ध भारतीय आतिथ्य का अनुभव मिला।' एक और पोस्ट में उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ब्रिक्स समिट 2026 की मेजबानी करने पर भारत को गर्व है। प्रधानमंत्री द्वारा विदेशी मेहमानों के सम्मान में आयोजित भोज में मैं अपने सहयोगियों और मुख्यमंत्रियों के साथ शामिल हुआ।'

ब्रिक्स मेजबानी और व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब भारत इस वर्ष ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 की मेजबानी कर रहा है — जो एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक मंच है जिसमें ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका समेत कई नए सदस्य देश शामिल हैं। गौरतलब है कि इस स्तर के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में मेजबान देश की सांस्कृतिक पहचान प्रस्तुत करना राजनयिक परंपरा का हिस्सा होता है। विवाद ने एक बार फिर यह रेखांकित किया है कि भारत में बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के आसपास सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच सियासी नोकझोंक कितनी तेज़ हो सकती है।

आगे क्या

कांग्रेस की ओर से अभी तक रिजिजू के पलटवार पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान कूटनीतिक गतिविधियाँ जारी हैं और आने वाले दिनों में इससे जुड़े और घटनाक्रम सामने आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह भारतीय राजनीति की उस पुरानी आदत को उजागर करता है जहाँ बड़े कूटनीतिक आयोजन भी घरेलू सियासत के अखाड़े बन जाते हैं। रिजिजू का जवाब रक्षात्मक होने के बजाय आक्रामक है — जो सत्तापक्ष की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें हर आलोचना को राष्ट्रवाद बनाम राजनीति की फ्रेम में रखा जाता है। कांग्रेस का सवाल प्रोटोकॉल को लेकर था, लेकिन बहस सांस्कृतिक पहचान पर आ गई — यह फ्रेमिंग बदलाव जानबूझकर दिखता है। असली प्रश्न यह है कि क्या ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंच पर भारत की छवि को घरेलू विवादों से नुकसान पहुँचता है, और मीडिया इस बिंदु को नज़रअंदाज़ कर रहा है।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स भोज के शाकाहारी मेन्यू पर विवाद क्या है?
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आयोजित आधिकारिक भोज में केवल शाकाहारी व्यंजन परोसे गए, जिस पर कांग्रेस से जुड़े कुछ नेताओं ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए। इसके जवाब में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पर पोस्ट कर कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगाया।
किरेन रिजिजू ने कांग्रेस को क्या जवाब दिया?
रिजिजू ने एक्स पर लिखा कि भारतीय शाकाहारी भोजन स्वाद, पोषण और क्षेत्रीय विविधता से भरपूर है और यह भारत की संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विदेशी मेहमानों ने इस भोजन का भरपूर आनंद लिया और कांग्रेस मेन्यू जैसे विषय पर भी राजनीति कर रही है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 की मेजबानी कौन कर रहा है?
इस वर्ष भारत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 की मेजबानी कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स देशों के राष्ट्राध्यक्षों के सम्मान में विशेष भोज का आयोजन किया, जिसमें केंद्रीय मंत्री और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए।
ब्रिक्स भोज में कौन से व्यंजन परोसे गए?
भोज में भारत के विभिन्न राज्यों के पारंपरिक शाकाहारी व्यंजन परोसे गए, ताकि भारतीय खान-पान की विविधता को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जा सके। रिजिजू के अनुसार इन व्यंजनों में अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराएं शामिल थीं।
इस विवाद का राजनीतिक महत्व क्या है?
यह विवाद एक बड़े पैटर्न को दर्शाता है जहाँ भारत में अंतरराष्ट्रीय आयोजन भी घरेलू राजनीतिक नोकझोंक का विषय बन जाते हैं। सत्तापक्ष ने आलोचना को सांस्कृतिक गर्व के फ्रेम में रखा, जबकि कांग्रेस का मूल सवाल कूटनीतिक प्रोटोकॉल को लेकर था।
राष्ट्र प्रेस
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