13 सितंबर 2026
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ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल और WBA ने महिला उद्यमिता व व्यापार सहयोग को दी नई दिशा

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ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल और WBA ने महिला उद्यमिता व व्यापार सहयोग को दी नई दिशा

सारांश

ब्रिक्स की दो शीर्ष कारोबारी संस्थाओं ने नई दिल्ली में एक साफ संदेश दिया — महिला उद्यमिता अब सामाजिक एजेंडा नहीं, आर्थिक रणनीति है। WBA अध्यक्ष अवर्णा जैन और बिजनेस काउंसिल प्रमुख जय श्रॉफ ने भारत की अध्यक्षता के तहत ब्रिक्स देशों के बीच गहरे व्यापार, निवेश और महिला नेतृत्व को विकास की बुनियाद बताया।

मुख्य बातें

ब्रिक्स WBA की अध्यक्ष अवर्णा जैन ने 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 2026 वार्षिक रिपोर्ट पेश करते हुए महिला उद्यमियों को नेतृत्व भूमिकाओं तक पहुँचाने का आह्वान किया।
ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल के अध्यक्ष जय श्रॉफ ने सदस्य देशों के बीच अधिक व्यापार, निवेश और मूल्य शृंखला विकास की आवश्यकता पर जोर दिया।
WBA की सिफारिशें पूंजी व नवाचार तक पहुँच, महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों के अनुकूल माहौल और सफल मॉडलों के ब्रिक्स-व्यापी विस्तार पर केंद्रित हैं।
काउंसिल की सिफारिशें भारत की अध्यक्षता के चार स्तंभों — लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता — के अनुरूप तैयार की गई हैं।
दोनों संस्थाओं ने एमएसएमई को अवसर देने और सीमा-पार व्यापारिक सहयोग को समावेशी विकास की कुंजी बताया।

ब्रिक्स वीमेन बिजनेस अलायंस (WBA) और ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल ने 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में आयोजित 2026 वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुति के दौरान ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच महिला उद्यमिता को प्रोत्साहन, आपसी व्यापार-निवेश में वृद्धि और गहरे कारोबारी सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। दोनों संस्थाओं का मानना है कि इन कदमों से ब्रिक्स देशों की विशाल आर्थिक क्षमता को ठोस विकास और रोज़गार सृजन में परिवर्तित किया जा सकता है।

महिला उद्यमिता: भागीदारी से नेतृत्व तक

WBA की अध्यक्ष अवर्णा जैन ने वार्षिक रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि ब्रिक्स देशों की महिलाएं आज व्यवसाय स्थापित कर रही हैं, रोज़गार पैदा कर रही हैं और नवाचार को आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब केवल भागीदारी काफी नहीं — अगला लक्ष्य महिलाओं को नेतृत्व की भूमिकाओं तक पहुँचाना है।

जैन ने कहा, 'जरूरत इस बात की है कि अधिक से अधिक महिला उद्यमी छोटे व्यवसायों से बड़े स्तर तक पहुंचें, स्थानीय सफलता को ब्रिक्स देशों के बड़े बाजारों तक ले जाएं और नेतृत्व की भूमिकाओं में आगे बढ़ें।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि महिला आर्थिक सशक्तिकरण को केवल सामाजिक मुद्दा नहीं, बल्कि आर्थिक रणनीति के रूप में देखा जाना चाहिए।

WBA की सिफारिशें: पूंजी, नवाचार और विस्तार

जैन ने बताया कि WBA की सिफारिशें चार बिंदुओं पर केंद्रित हैं — महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना, पूंजी और नवाचार तक पहुँच बढ़ाना, महिलाओं द्वारा संचालित समाधानों से आर्थिक लचीलापन सुनिश्चित करना, और सफल मॉडलों को पूरे ब्रिक्स नेटवर्क में फैलाना।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने 'महिला-नेतृत्व वाले विकास' को अपनी विकास यात्रा के केंद्र में रखा है और यह दृष्टिकोण ब्रिक्स देशों के लिए भी प्रेरणादायक हो सकता है।

ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल का आह्वान: अधिक व्यापार, अधिक निवेश

ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल के अध्यक्ष जय श्रॉफ ने सदस्य देशों के बीच आर्थिक एकीकरण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि ब्रिक्स के पास विशाल बाज़ार, प्राकृतिक संसाधन और तकनीकी क्षमताएँ हैं, लेकिन इन्हें अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ने की ज़रूरत है।

श्रॉफ ने कहा, 'हमें एक-दूसरे के साथ अधिक व्यापार करना चाहिए, एक-दूसरे में अधिक निवेश करना चाहिए, मजबूत मूल्य शृंखलाएं विकसित करनी चाहिए, प्रौद्योगिकियां साझा करनी चाहिए और व्यवसायों के बीच नई साझेदारियां बनानी चाहिए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स की असली चुनौती क्षमता निर्माण नहीं, बल्कि मौजूदा क्षमता को अवसरों और विकास में बदलना है।

भारत की अध्यक्षता के चार स्तंभ

श्रॉफ ने बताया कि काउंसिल की सिफारिशें भारत की अध्यक्षता के चार प्रमुख स्तंभों — लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता — के अनुरूप तैयार की गई हैं। उनके अनुसार लचीलापन अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है, नवाचार प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाता है, सहयोग विकास को गति देता है और स्थिरता दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित करती है।

यह ऐसे समय में आया है जब ब्रिक्स समूह का विस्तार हो चुका है और वैश्विक व्यापार में बदलते समीकरणों के बीच सदस्य देश आपसी आर्थिक सहयोग को और गहरा करने की कोशिश में जुटे हैं। दोनों संस्थाओं ने निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ाने, एमएसएमई को नए अवसर देने और सीमा-पार व्यापारिक सहयोग को सुदृढ़ करने को समावेशी व टिकाऊ विकास की बुनियाद बताया।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पूंजी पहुँच और सीमा-पार बाज़ार तक रास्ता अभी भी नीतिगत दस्तावेज़ों में ज़्यादा और ज़मीन पर कम है। गौरतलब है कि ब्रिक्स देशों के बीच आंतरिक व्यापार की हिस्सेदारी समूह की आर्थिक क्षमता के अनुपात में कहीं कम बनी हुई है। बिना बाध्यकारी क्रियान्वयन ढाँचे और स्वतंत्र जवाबदेही के, ये सिफारिशें वार्षिक प्रस्तुतियों की लंबी परंपरा का हिस्सा बनने का जोखिम उठाती हैं।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स वीमेन बिजनेस अलायंस (WBA) क्या है?
ब्रिक्स वीमेन बिजनेस अलायंस ब्रिक्स देशों की महिला उद्यमियों को एकजुट करने वाली एक प्रमुख व्यापारिक संस्था है, जो पूंजी, नवाचार और बाज़ार तक पहुँच बढ़ाने और महिलाओं को नेतृत्व भूमिकाओं में लाने पर काम करती है। 2026 में इसकी वार्षिक रिपोर्ट भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत नई दिल्ली में प्रस्तुत की गई।
ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल ने 2026 में क्या सिफारिशें दीं?
काउंसिल के अध्यक्ष जय श्रॉफ ने सदस्य देशों के बीच अधिक व्यापार, निवेश, मजबूत मूल्य शृंखलाएँ और तकनीक साझेदारी की सिफारिश की। ये सिफारिशें भारत की अध्यक्षता के चार स्तंभों — लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता — के अनुरूप तैयार की गई हैं।
महिला उद्यमिता को ब्रिक्स एजेंडे में क्यों शामिल किया गया है?
WBA की अध्यक्ष अवर्णा जैन के अनुसार महिला आर्थिक सशक्तिकरण को सामाजिक मुद्दे की बजाय आर्थिक रणनीति के रूप में देखा जाना चाहिए। ब्रिक्स देशों में महिलाएँ पहले से ही रोज़गार सृजन और नवाचार में योगदान दे रही हैं, और लक्ष्य उन्हें बड़े बाज़ारों तक ले जाना है।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के चार स्तंभ क्या हैं?
भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता के चार प्रमुख स्तंभ हैं — लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता। ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल ने अपनी सिफारिशें इन्हीं चार आधारों पर तैयार की हैं।
ब्रिक्स में एमएसएमई और सीमा-पार व्यापार को किस तरह बढ़ावा देने की योजना है?
दोनों संस्थाओं ने एमएसएमई को नए अवसर देने, सीमा-पार व्यापारिक सहयोग मजबूत करने और निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ाने को समावेशी व टिकाऊ विकास की बुनियाद बताया। हालाँकि, क्रियान्वयन के लिए बाध्यकारी ढाँचे का विवरण अभी सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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