13 सितंबर 2026
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सेमीकॉन इंडिया 2026 और ब्रिक्स मिलकर बढ़ाएंगे भारत की सेमीकंडक्टर ताकत: आईईएसए

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सेमीकॉन इंडिया 2026 और ब्रिक्स मिलकर बढ़ाएंगे भारत की सेमीकंडक्टर ताकत: आईईएसए

सारांश

ब्रिक्स और सेमीकॉन इंडिया 2026 — दो अलग मंच, एक साझा मकसद। आईईएसए के अध्यक्ष अशोक चंडक का कहना है कि ब्रिक्स रणनीतिक दिशा देता है और सेमीकॉन इंडिया उसे ज़मीन पर उतारने की क्षमता प्रदर्शित करता है। वैश्विक चिप-युद्ध के बीच भारत के लिए ग्लोबल साउथ का विश्वसनीय तकनीकी सेतु बनने का यह दुर्लभ अवसर है।

मुख्य बातें

इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (आईईएसए) ने 13 सितंबर 2026 को कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और सेमीकॉन इंडिया 2026 मिलकर भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं को गति दे सकते हैं।
आईईएसए अध्यक्ष अशोक चंडक के अनुसार, भारत चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर विनिर्माण, एडवांस्ड पैकेजिंग और आपूर्ति श्रृंखलाओं में ब्रिक्स -नेतृत्व वाले सहयोग में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
भारत को ग्लोबल साउथ के लिए एक विश्वसनीय तकनीकी सेतु और डिजाइन इंजन के रूप में स्थापित करने का अनूठा अवसर बताया गया।
ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं के बीच सेमीकंडक्टर सहयोग से विविधतापूर्ण और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाएं बनाने में मदद मिल सकती है।
चंडक ने कहा, ' ब्रिक्स रणनीतिक दिशा तय करता है; सेमीकॉन इंडिया भारत की उसे लागू करने की क्षमता प्रदर्शित करता है।'

इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (आईईएसए) ने 13 सितंबर 2026 को कहा कि हाल में संपन्न ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और आगामी सेमीकॉन इंडिया 2026 का संयुक्त प्रभाव वैश्विक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम में भारत की स्थिति को निर्णायक रूप से मजबूत कर सकता है। संगठन के अनुसार, ये दोनों मंच एक-दूसरे के पूरक बनकर रणनीतिक दिशा को ठोस औद्योगिक क्रियान्वयन में बदलने की क्षमता रखते हैं।

दोनों मंचों का महत्व और समय

आईईएसए के अध्यक्ष अशोक चंडक ने कहा कि इन दोनों आयोजनों का एक साथ आना विशेष रूप से अहम है। उनके अनुसार, ब्रिक्स ने मजबूत और लचीली प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखलाओं, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिजों और अत्याधुनिक तकनीकों की ज़रूरत को पुरज़ोर तरीके से रेखांकित किया है। वहीं सेमीकॉन इंडिया 2026 इन रणनीतिक प्राथमिकताओं को औद्योगिक साझेदारियों, निवेश और ठोस अवसरों में परिवर्तित करने का माध्यम बन सकता है।

चंडक ने कहा, 'ब्रिक्स रणनीतिक दिशा तय करता है; सेमीकॉन इंडिया भारत की उसे लागू करने की क्षमता को प्रदर्शित करता है।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है और भारत खुद को एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश में है।

भारत की भूमिका: डिज़ाइन से विनिर्माण तक

चंडक ने कहा कि सेमीकंडक्टर डिजाइन में भारत की स्थापित ताकत, विशाल इंजीनियरिंग प्रतिभा-भंडार और तेज़ी से विस्तार करता विनिर्माण इकोसिस्टम देश को चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर विनिर्माण, एडवांस्ड पैकेजिंग, तकनीकी मानकों और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं में ब्रिक्स-नेतृत्व वाले सहयोग में अग्रणी भूमिका निभाने में सक्षम बनाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत के पास 'ग्लोबल साउथ के लिए एक विश्वसनीय तकनीकी सेतु और डिजाइन इंजन' के रूप में खुद को स्थापित करने का यह एक अनूठा अवसर है। गौरतलब है कि भारत सरकार पहले से ही ₹76,000 करोड़ की सेमीकंडक्टर मिशन योजना के तहत देश में फैब और एटीएमपी इकाइयाँ स्थापित करने की प्रक्रिया में है।

ब्रिक्स सहयोग से आपूर्ति श्रृंखला को फायदा

आईईएसए के अनुसार, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों में ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं के बीच गहरे सहयोग से अधिक विविधतापूर्ण और लचीली तकनीकी आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित की जा सकती हैं। इससे न केवल निवेश के नए रास्ते खुलेंगे, बल्कि औद्योगिक साझेदारियों का दायरा भी व्यापक होगा।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब चीन और अमेरिका के बीच चिप-युद्ध के कारण वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला पुनर्गठन के दौर से गुज़र रही है और कई देश वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश में हैं।

ग्लोबल साउथ के साथ भारत की भूमिका

चंडक ने विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के संदर्भ में भारत की संभावनाओं को रेखांकित किया। उनका कहना था कि ब्रिक्स के एजेंडे और सेमीकॉन इंडिया 2026 का संयोजन भारत को एक वैश्विक स्तर पर जुड़े सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम के निर्माण में नेतृत्वकारी भूमिका दिला सकता है — खासकर विकासशील देशों के साथ तकनीकी सहयोग के संदर्भ में।

साथ मिलकर ये मंच भारत की एक मजबूत, विविधतापूर्ण और वैश्विक रूप से जुड़े सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम के निर्माण की क्षमता को और सुदृढ़ कर सकते हैं। आने वाले महीनों में सेमीकॉन इंडिया 2026 में वैश्विक निवेशकों और भागीदारों की भागीदारी यह स्पष्ट करेगी कि भारत की यह महत्वाकांक्षा ज़मीन पर कितनी उतरती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली प्रश्न यह है कि ब्रिक्स के भीतर भारत और चीन के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा और रणनीतिक अविश्वास के रहते सेमीकंडक्टर सहयोग व्यावहारिक धरातल पर कितना संभव है। 'ग्लोबल साउथ का तकनीकी सेतु' बनने की बात तब तक नारा ही रहेगी जब तक भारत की घरेलू फैब क्षमता — जो अभी शुरुआती दौर में है — वास्तविक उत्पादन नहीं करने लगती। सेमीकॉन इंडिया 2026 घोषणाओं का मंच बन सकता है, लेकिन निवेशकों की प्रतिबद्धता और क्रियान्वयन की गति ही यह तय करेगी कि भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षा वैश्विक पुनर्गठन की इस लहर में सवार हो पाती है या किनारे खड़ी रह जाती है।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईईएसए क्या है और इसने क्या कहा है?
इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (आईईएसए) भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग का प्रमुख संगठन है। 13 सितंबर 2026 को इसने कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और सेमीकॉन इंडिया 2026 मिलकर वैश्विक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में भारत की स्थिति मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर सकते हैं।
सेमीकॉन इंडिया 2026 क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
सेमीकॉन इंडिया 2026 भारत सरकार द्वारा आयोजित एक प्रमुख सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग सम्मेलन है, जो वैश्विक निवेशकों, कंपनियों और नीति-निर्माताओं को एक मंच पर लाता है। आईईएसए के अनुसार, यह आयोजन ब्रिक्स की रणनीतिक प्राथमिकताओं को औद्योगिक साझेदारियों और निवेश में बदलने का माध्यम बन सकता है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र को क्या फायदा हो सकता है?
आईईएसए अध्यक्ष अशोक चंडक के अनुसार, ब्रिक्स ने मजबूत और लचीली प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखलाओं, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों की ज़रूरत को रेखांकित किया है। ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग से विविधतापूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाएं बनाई जा सकती हैं और निवेश व औद्योगिक साझेदारियों के नए अवसर उत्पन्न हो सकते हैं।
भारत ग्लोबल साउथ का तकनीकी सेतु कैसे बन सकता है?
आईईएसए के अनुसार, सेमीकंडक्टर डिजाइन में भारत की विशेषज्ञता, विशाल इंजीनियरिंग प्रतिभा और बढ़ता विनिर्माण इकोसिस्टम देश को चिप डिजाइन, एडवांस्ड पैकेजिंग और आपूर्ति श्रृंखलाओं में ब्रिक्स सहयोग में अग्रणी भूमिका दे सकता है। यह भारत को ग्लोबल साउथ के देशों के लिए एक विश्वसनीय तकनीकी भागीदार के रूप में स्थापित कर सकता है।
भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र की मौजूदा स्थिति क्या है?
भारत सरकार पहले से ही सेमीकंडक्टर मिशन के तहत देश में फैब और एटीएमपी (असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग) इकाइयाँ स्थापित करने की प्रक्रिया में है। देश की पहचान मुख्यतः चिप डिजाइन और इंजीनियरिंग प्रतिभा के क्षेत्र में है, जबकि विनिर्माण क्षमता अभी विकास के शुरुआती चरण में है।
राष्ट्र प्रेस
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